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अब भारतीय सांसद पाकिस्तान को बेनकाब करने जाएंगे : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

 

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज ।  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंक के अड्डों को खत्म करने के बाद अब भारत कूटनीतिक मोर्चे पर भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुका है। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनिंदा सांसदों की टीमें 22 मई से 10 दिनों के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, कतर, आस्ट्रेलिया और यूएई भेजी जाएंगी। इन देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के हालिया एक्शन और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति को विस्तार से रखा जाएगा।

इस डेलिगेशन में अलग-अलग पार्टियों के सीनियर सांसद जाएंगे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर को ग्रुप लीडर बनाया जा सकता है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी डेलिगेशन का हिस्सा हो सकते हैं।

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भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के बाद से पाकिस्तानी तेजी से दुष्प्रचार करने की कोशिश कर रहा है। इसे रोकने के लिए भारत सरकार के द्वारा तमाम प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

दरअसल, भारत के ऑपरेशन सिंदूर से घबराया हुआ पाकिस्तान अब सोशल मीडिया और तमाम प्लेटफॉर्म पर फेक नैरेटिव चला रहा है। हालांकि अभी तक भारत सरकार ने पाकिस्तान के किसी भी फेक नैरेटिव को सफल नहीं होने दिया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अब सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान के चेहरे को बेनकाब करने की तैयारी कर ली है।

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भारत की ये ख़ूबी है कि जब देश की बात आती है तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता अपने गीले-शिकवे भुला कर देश के लिए एकजुट हो जाते है। गौरतलब है कि पिछली सरकारों द्वारा भारत का पक्ष रखने के लिए डेलिगेशन विदेश भेजे है।

* 1994: विपक्ष के नेता वाजपेयी ने UNHRC में भारत का पक्ष रखा था।

* 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय डेलिगेशन को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग भेजा था। उस डेलिगेशन में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और सलमान खुर्शीद जैसे नेता भी शामिल थे। तब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में UNHRC के सामने एक प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था।

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* 2008: मुंबई हमलों के बाद मनमोहन सरकार ने डेलिगेशन विदेश भेजा था। 2008 में मुंबई हमलों के बाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी लिंक होने से जुड़े दस्तावेजों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के डेलिगेशन को विदेश भेजने का फैसला किया था।

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

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