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नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

 

23 जेष्ठ, काठमांडू

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग  (सीआईएए) ने पतंजलि भूमि मामले में पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल समेत 93 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में मामला दर्ज कराया है। नेपाल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर 185.85 मिलियन रुपये का जुर्माना और सजा की मांग की गई है। अन्य के मामले में जुर्माने की राशि अलग-अलग है। इन पर सीमा से अधिक भूमि की खरीद-फरोख्त की अनुमति देकर भ्रष्टाचार करने और सरकारी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने के बाद नेपाल का संसदीय पद स्वतः ही निलंबित हो गया है। नेपाल के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है। इसी तरह यह पहली बार है कि मंत्रिपरिषद के किसी फैसले के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है।

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क्या हैं आरोप?

पतंजलि योगपीठ ने हर्बल खेती और आयुर्वेद अस्पताल के निर्माण के लिए रियायती दर पर जमीन खरीदी थी। सीआईएए ने इसलिए जांच शुरू की थी, क्योंकि पता चला था कि तत्कालीन सरकार द्वारा रियायत पर प्राप्त की गई भूमि को बाद में मंत्रिपरिषद के निर्णय से बेच दिया गया था। भूमि अधिनियम, 2021 में सरकार को किसी भी उत्पादक उद्योग या व्यवसाय के लिए भूमि रियायतें देने का प्रावधान है। हालांकि, ऐसी रियायतों के तहत खरीदी गई भूमि को बेचा नहीं जा सकता। यह सवाल तब उठा, जब सरकार ने खुद रियायतों के तहत प्राप्त भूमि की बिक्री की अनुमति दे दी।

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भारत के पतंजलि योगपीठ ने काभ्रे में आयुर्वेद विद्यालय, अस्पताल और हर्बल फार्म संचालित करने के लिए 2064 बीएस में एक कंपनी पंजीकृत की थी। चूंकि  जमीन पर्याप्त नहीं थी, इसलिए उसने सरकार से भूमि खरीद में रियायतें देने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। 18 माघ, 2066 को माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद ने काभ्रे में 815 रोपनी जमीन खरीदने के लिए पतंजलि को रियायत दी थी। उस समय पतंजलि ने करीब 600 रोपनी जमीन खरीदी थी। कुछ जमीन उसने पहले खरीदी थी। जमीन खरीदने के कुछ महीनों के भीतर ही उसने जमीन बेचने का फैसला कर लिया।

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कानूनी तौर पर रियायत वाली जमीन नहीं बेची जा सकती; कानूनी प्रावधान है कि कंपनी के भंग होने पर रियायती जमीन अपने आप सरकार को हस्तांतरित हो जाती है। लेकिन 2066 बीएस में तत्कालीन सरकार ने जमीन की बिक्री की अनुमति देने का फैसला किया।

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