११ महीनों बाद देउवा–प्रचण्ड की द्विपक्षीय बैठक, संसद खोलने की कोशिशें तेज
काठमांडू, मिति: २५ जेठ २०८२ ।कांग्रेस–एमाले गठबंधन सरकार गठन के ११ महीने बाद पहली बार नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा और माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के बीच प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता हुई है। शनिवार को प्रचण्ड देउवा से मिलने उनके निवास बुढानीलकण्ठ पहुँचे थे। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच कई बार टेलीफोन पर बातचीत और कुछ त्रिपक्षीय बैठकें प्रधानमंत्री केपी ओली की उपस्थिति में हो चुकी थीं, लेकिन आमने-सामने द्विपक्षीय बैठक यह पहली बार हुई है।
यह बैठक विशेष रूप से संसद को पुनः सक्रिय करने के प्रयासों के तहत हुई, जो माओवादी और अन्य विपक्षी दलों द्वारा लगभग दो हफ्तों से बाधित है। ये दल गृह मंत्री रमेश लेखक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिनका नाम भिजिट वीज़ा के नाम पर मानव तस्करी और ठगी में जुड़ा हुआ है।
बैठक में प्रचण्ड ने २०६४ साल से अब तक के सभी गृहमंत्रियों की भूमिका की जाँच के लिए एक संसदीय समिति गठन करने का प्रस्ताव रखा। इस पर देउवा ने जवाब दिया कि चूंकि मामला पहले से ही संवैधानिक निकाय ‘अख्तियार’ द्वारा जाँच में है, इसलिए एक और समिति बनाना संभव नहीं है।
कांग्रेस उपसभापति पूर्णबहादुर खड्का ने जानकारी दी कि प्रचण्ड ने स्पष्ट रूप से कहा कि विपक्षी दल जाँच समिति की गारंटी चाहते हैं और तभी संसद सुचारु रूप से चलेगी। देउवा ने विपक्षी दलों से संवाद कर सकारात्मक वातावरण बनाने की आवश्यकता जताई।
१३ जेठ से संसद अवरुद्ध है और विपक्ष गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अडिग है। हालांकि, १५ जेठ को बजट प्रस्तुत करने की संवैधानिक बाध्यता के चलते एक दिन के लिए संसद चली थी। अब जबकि बजट पर चर्चा का कार्यसूची है, संसद की बैठकें फिर से बाधित हैं।
प्रचण्ड विपक्षी दलों की ओर से सरकार से वार्ता की जिम्मेदारी लेकर देउवा के पास पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि वे विपक्षी दलों से और विचार-विमर्श कर फिर से बैठक करेंगे।
कांग्रेस नेता – उपसभापति पूर्णबहादुर खड्का, महामंत्री गगन थापा, गृहमंत्री रमेश लेखक, प्रमुख सचेतक श्याम घिमिरे, तथा ज्ञानेन्द्र कार्की – लगातार विपक्षी दलों से संवाद में हैं। शुक्रवार को भी कांग्रेस नेताओं ने प्रचण्ड और रास्वपा उपसभापति स्वर्णिम वाग्ले से चर्चा की थी।
उधर, सरकार का नेतृत्व कर रही एमाले इस मुद्दे पर प्रत्यक्ष चर्चा में नहीं है, न तो विपक्ष से और न ही सत्ता साझेदारों से। प्रधानमंत्री ओली पहले ही कह चुके हैं कि संसद को किसी भी हाल में चलाया जाएगा। एमाले के प्रमुख सचेतक ने भिजिट वीजा प्रकरण पर किसी भी समिति की आवश्यकता से इनकार किया है।
माओवादी प्रमुख सचेतक हितराज पाण्डे और रास्वपा प्रमुख सचेतक सन्तोष परियार ने कहा कि अब तक संसद खोलने को लेकर कोई प्रगति नहीं हुई है और सत्तापक्ष इस विषय में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
इस स्थिति में आइतबार दोपहर १ बजे के लिए बुलाया गया प्रतिनिधिसभा का सत्र अनिश्चित हो गया है। विपक्षी माओवादी, रास्वपा, राप्रपा और एकीकृत समाजवादी जैसे दलों ने १३ जेठ से ही गृहमंत्री के इस्तीफे की माँग करते हुए सदन अवरुद्ध किया है।प्रेम गौतम, नया पत्रिका


