रास्वपा का प्रतिनिधि सभा में विरोध प्रदर्शन जारी
राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने विजिट वीजा मामले की न्यायिक जांच की मांग को लेकर शनिवार को प्रतिनिधि सभा में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। रास्वपा ने सरकार पर जांच समिति के नाम पर मानव तस्करी में शामिल लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। शनिवार को बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए रास्वपा सांसद गणेश परजुली ने कहा, “हमारा आंदोलन जारी है। फर्जी भूटानी शरणार्थी बनाने और अपने ही देश के लोगों को बेचने के देशद्रोही अपराध के बाद अब विजिट वीजा की आड़ में लोगों को मानव तस्करी के जाल में धकेलने और उसी अपराध में शामिल तस्करों और दलालों को बचाने के तथ्य एक के बाद एक सामने आ रहे हैं, जिसमें राज्य और सरकार चलाने वाली पार्टियों के नेताओं की संलिप्तता है। इससे नेपाली जनता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शर्म और अपमान का बोझ लेकर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि राष्ट्र और लोगों के सम्मान और स्वाभिमान का अपमान भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे किसी भी हालत में माफ नहीं किया जा सकता।
‘आज हमारा देश मानव तस्करी के लिए एक पारगमन केंद्र के रूप में जाना जा रहा है। राज्य इस तरह से काम कर रहा है जैसे कि उसे इस स्थिति के बारे में पता ही नहीं है, जहां हजारों नेपाली लड़कियां जो श्रम की तलाश में विदेश पहुंचती हैं, उनका शोषण किया जा रहा है और उन्हें जानवरों की तरह बेचा जा रहा है।’ इसलिए पिछले जेष्ठ 13 से हम जो मुद्दा लगातार उठा रहे हैं, वह विजिट वीजा का मुद्दा नहीं है। हमने जो मुद्दा उठाया है, वह विजिट वीजा की आड़ में मानव तस्करी का मुद्दा है।
उन्होंने गृह मंत्री रमेश लेखक से तीन सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्री से मेरा सवाल है कि क्या जेष्ठ 7 पर सीआईएए द्वारा कार्रवाई किए जाने पर इमिग्रेशन चीफ को बचाने और मामले की जांच कर रहे डीआईजी को स्थानांतरित करने का आपका व्यवहार संदेह के दायरे में आता है? जब आपके ही सचिवालय के एक सदस्य के इस अपराध में शामिल होने की बात सामने आ रही है, तो क्या इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि इस घटना में राजनीतिक संरक्षण है?’ उन्होंने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कमेटी के गठन की पार्टी की मांग दोहराई।


