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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामबरन यादव द्वारा ‘सत्संग दीक्षा’ पुस्तक का लोकार्पण

 

काठमांडू 12 जुलाइ

राजधानी में शनिवार को ‘सत्संग दीक्षा’ पुस्तक का लोकार्पण हुआ। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय, हनुमानढाेका दरबार संग्रहालय विकास समिति और स्वामीनारायण सेवा संस्थान नेपाल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस पुस्तक का लोकार्पण किया गया।
हनुमानढाेका दरबार संग्रहालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामबरन यादव और महामहोपाध्याय भद्रेशदास स्वामीजी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि और स्वामीजी ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया।

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औपचारिक कार्यक्रम शुरू होने से पहले एक शोभायात्रा भी निकाली गई। विद्वान शंकर तिवारी ने पुस्तक पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि ‘सत्संग दीक्षा’ पुस्तक सरल और बोधगम्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हर पीढ़ी इस पुस्तक से लाभान्वित हो सकती है।

मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति यादव ने कहा कि भगवान स्वामी नारायण का नेपाल से भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि ‘सत्संग दीक्षा’ पुस्तक वैदिक होने के बावजूद सरल शैली में लिखी गई है।
भद्रेशदास स्वामी ने कहा कि उस ऐतिहासिक स्थल पर आना उनके लिए गौरव की बात है जहाँ स्वामी नारायण ने 240 वर्षों के बाद नेपाल आने पर तत्कालीन महाराजा राणा बहादुर शाह के साथ सत्संग किया था। उन्होंने कहा कि यदि हम भाषा, वेशभूषा, खान-पान और भजनों पर नियंत्रण कर सकें, तो सभी राष्ट्र प्रगति कर सकते हैं।
सत्संग दीक्षा पुस्तक के रचयिता महंतस्वामी महाराज हैं, जो गुजराती में साक्षात ब्रह्मस्वरूप हैं। इसके संस्कृत श्लोकों की रचना और अनुवाद भद्रेशदास स्वामीजी ने किया है। पुस्तक के नेपाली अनुवादक माधव उपाध्याय और निश्चल बिक्रम पौडेल हैं।

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