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मेरा अभिमान : मेरा देश ‘बाल कविता’ प्रतियोगिता

 

हिमालिनी ज्ञानकुंज

‘बाल कविता’ प्रतियोगिता

मेरा अभिमान : मेरा देश

साहिल सिंह उज्जैन कक्षाः ११ डीएवी विद्यालय, जावलाखेल, ललितपुर

जहाँ पे मैंने जन्म लिया
जहाँ की हवाओ ने मुझे साँस लेना सिखाया,
जहाँ मैंने जीवन जीना सीखा
हाँ, यह मेरा देश है
जो अटल है, जो बहुत खूबसूरत है ।

श्रेष्ठों में श्रेष्ठ सर्वश्रेष्ठ यह
इसी से मेरी पहचान है,
मेरा देश महान है ।

ए वतन,
तू ही मेरा अभिमान है,
तुझसे जुड़ा मेरा सम्मान है ।

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मेरा प्यारा देश,
तू मेरा निःस्वार्थ प्रेम है,
जिसके लिए मैं अपनी जान देने को तैयार हूँ ।

मातृभूमि तुम अगर कहो तो मैं अपनी जान दे दूँ
अगर कोई तेरा अपमान करे तो
उन को दुनिया से मिटा दूँ ।
ऐ वतन, तू ही मेरा अभिमान है,
तुझसे ही हम सबका कल्याण है ।

उन सैनिकों को दिल से सलाम है,
जिन्हों ने हमारे लिए अपनी जान गवाई है ।

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उनसे बड़ा कोई देशप्रेमी नहीं,
उनसे बड़ा कोई आदर्श नहीं
हम सब उन सैनिकों के आभारी हैं
इस देशके महान् सपूतों की,
जिनकी वजह से हम आज भी जीवित हैं ।
इन सैनिकों से पूछो प्रेम की परिभाषा क्या है,
जिन्होंने हमेशा देशभक्ति को सर्वश्रेष्ठ माना है ।

लाखों जवानों ने जीवन त्याग दिया,
देश के लिए, देश निर्माण के लिए,
अपनी सारी खुशियों की कुर्बान कर दी
देश मातृ की एक खुशी के लिए ।
हम उनको करते हैं कोटि–कोटि नमन
उन्हीं की वजह से बना यह देश महान
उन्हीं की वजह से बना यह देश महान ।

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जय मातृभूमि, जय जय मातृभूमि ।

साहिल सिंह उज्जैन कक्षाः ११ डीएवी विद्यालय, जावलाखेल, ललितपुर

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