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सोमवार तक भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना, लेकिन दरार पड़े मधेश में केवल हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान

 
नयाँ पत्रिका से साभार

 काठमांडू, श्रावण ४, २०८२ (रविवार) । असार महीने में झमाझम पानी गिरना चाहिए था, लेकिन इस बार पड़े सूखे के कारण मधेश के खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं। धान की रोपाई भी मुश्किल से हो पाई है। अब जबकि शनिवार रात से देश के अधिकांश हिस्सों में तीन दिन तक भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान किया गया है, मधेश में फिर भी केवल सामान्य वर्षा की संभावना जताई गई है।

मौसम पूर्वानुमान महाशाखा के अनुसार, नमीयुक्त हवाओं के साथ मानसूनी बादल पूर्वी नेपाल से प्रवेश कर चुके हैं और अब धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं। महाशाखा की वरिष्ठ मौसमविद् प्रतिभा मानन्धर ने बताया कि रविवार दोपहर तक कोशी और बागमती प्रदेशों में वर्षा की संभावना है। इसके बाद सोमवार तक गण्डकी, लुम्बिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेशों में अधिक वर्षा देखी जा सकती है।

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मानन्धर के अनुसार, सोमवार तक कई स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। लेकिन मधेश प्रदेश में केवल हल्की से मध्यम वर्षा का अनुमान है। अन्य प्रदेशों के मुकाबले मधेश में ज्यादा वर्षा की संभावना नहीं है।

मनसूनी प्रणाली जो शनिवार रात से सक्रिय है, वह सोमवार रात से कमजोर पड़ने की आशंका है। वर्तमान में मानसून की न्यूनचापीय रेखा पश्चिम और मध्य नेपाल में औसत से उत्तर की ओर है जबकि पूर्वी नेपाल में यह सामान्य स्थिति के आस-पास है।

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जलविद्युत परियोजनाओं को इप्पान की सतर्कता की अपील

स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ नेपाल (इप्पान) ने जलविद्युत परियोजनाओं को तीन दिन तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। मौसम विभाग ने शनिवार से सोमवार तक प्रमुख नदियों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है, ऐसा पूर्वानुमान जारी किया है।

कोशी, तमोर, अरुण, तामाकोशी, दूधकोशी और कन्काई जैसी पूर्वी नदियों में बाढ़ की उच्च संभावना बताई गई है। कोशी नदी में जलस्तर चेतावनी सीमा के करीब या उससे ऊपर जा सकता है। वहीं, रविवार शाम को बागमती नदी में बाढ़ आने से काठमांडू उपत्यका और निचले इलाकों में असर पड़ सकता है, जबकि मंगलवार तक महाकाली नदी और उसके किनारे बसे क्षेत्रों में भी बाढ़ की संभावना जताई गई है।

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बागलुङ, म्याग्दी, पर्वत, स्याङ्जा, पाल्पा, नवलपरासी और रुपन्देही जैसे जिलों में वर्षा का गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे नारायणी जलाधार क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों से लेकर निचले तटवर्ती इलाके प्रभावित होंगे। वहीं, पश्चिमी नेपाल के राप्ती और बबई क्षेत्रों में भी मध्यम प्रभाव की आशंका है, और महाकाली क्षेत्र में सोमवार और मंगलवार को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। नया पत्रिका से

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