भारत के लिए सिरदर्द बने कुख्यात ‘सलीम पिस्टल’ को नेपाल से पकड़ा, सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़ा नाम
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल पुलिस ने भारत के लिए लंबे समय से सिरदर्द बने कुख्यात अपराधी शेख सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ को काठमांडू से गिरफ्तार कर भारतीय एजेंसियों को सौंप दिया है। सलीम का नाम सिर्फ संगठित अपराध तक सीमित नहीं, बल्कि वह सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, बाबा सिद्दीकी की हत्या और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क में भी गहराई से जुड़ा बताया जाता है। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) और दिल्ली पुलिस कई वर्षों से उसकी तलाश में थीं।
सूचना से शुरू हुई कार्रवाई
कुछ दिन पहले नेपाल पुलिस के पास त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के कार्गो सेक्शन में काम करने वाले एक साधारण कर्मचारी ने सूचना दी—

“दुबई से आए एक कार्गो में हथियार जैसा सामान है।”
पहले तो पुलिस को इस सूचना पर पूरा भरोसा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने चुपचाप खुफिया निगरानी शुरू कर दी। पिछले तीन महीनों से नेपाल आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी गई। इसी दौरान पुलिस की नजर एक भारतीय नागरिक सलीम मल्लिक और उसके 19 वर्षीय बेटे अब्दुल कबीर पर पड़ी।
होटल से गिरफ्तारी
दोनों दुबई के रास्ते नेपाल आए थे और काठमांडू के सुन्धारा स्थित एक होटल में तीन महीने से रह रहे थे। पुलिस टीम ने होटल में छापा मारकर दोनों को हिरासत में ले लिया।
- तलाशी में 1,83,000 भारतीय रुपये, 2 लाख नेपाली रुपये और 12,000 दिरहम बरामद हुए।
- हालांकि मौके पर कोई हथियार नहीं मिला, लेकिन सलीम के मोबाइल से अत्याधुनिक हथियारों की तस्वीरें मिलीं।
पहचान बदलकर करता था सफर
शुरुआती जांच में उसके पास सलीम मल्लिक नाम का पासपोर्ट मिला, लेकिन नेपाल पुलिस के विशेष ब्यूरो ने जल्द ही पुष्टि कर दी कि वह वास्तव में शेख सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ है — वही व्यक्ति जिसे भारतीय एजेंसियां वर्षों से ढूंढ रही थीं।
पुलिस के मुताबिक, वह यात्रा के दौरान अलग-अलग नाम जैसे ‘अरबान अख्तर’ का पासपोर्ट इस्तेमाल करता था, ताकि पहचान छिपा सके।
जमानत और फिर भारत को सुपुर्दगी
नेपाल के राजस्व अन्वेषण विभाग ने 22.83 लाख रुपये की जमानत पर सलीम को रिहा कर दिया। उसका बेटा अब्दुल कबीर साढ़े 11 लाख रुपये की जमानत न दे पाने के कारण ललितपुर के नख्खु जेल भेजा गया।
जमानत के तुरंत बाद, भारत के विशेष अनुरोध पर नेपाल पुलिस ने सलीम को औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के बिना भारतीय एजेंसियों के हवाले कर दिया।
भारत में गंभीर आरोप
भारत में सलीम पर कई संगीन आरोप हैं —
- सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड (29 मई 2022) — पंजाब के मानसा जिले के जवाहरके गांव के पास गायक पर AK-47, AK-92, M-16 और तुर्की निर्मित ‘जिगाना’ पिस्तौल से हमला हुआ था।
- बाबा सिद्दीकी हत्या मामला — भारतीय मीडिया के अनुसार, इसमें भी सलीम की संलिप्तता रही है।
- दाऊद इब्राहिम की ‘डी कंपनी’ से जुड़ाव — हथियार और ड्रग्स तस्करी में सक्रिय नेटवर्क का हिस्सा।
- आईएसआई से संबंध — पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप।
नेपाल का ठिकाना और हथियार तस्करी का तरीका
पुलिस के अनुसार, सलीम नेपाल को हथियार तस्करी के लिए ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल करता था।
- वह पाकिस्तान और दुबई में रहता,
- नेपाल लौटते समय कार्गो के जरिए ऐसे हथियार भेजता जिन्हें X-ray मशीन भी पकड़ न सके,
- फिर काठमांडू से उन्हें भारत तस्करी करता।
पिछले तीन वर्षों में वह हर बार काठमांडू आने पर एक ही होटल में रुकता था, जिससे पुलिस की निगरानी आसान हो गई।
नेपाल-भारत के बीच कानूनी स्थिति
नेपाल और भारत के बीच औपचारिक प्रत्यार्पण संधि नहीं है, लेकिन दोनों देशों की पुलिस अनौपचारिक सहयोग के तहत अक्सर ऐसे अपराधियों को एक-दूसरे के हवाले करती रही है।
सलीम का मामला भी इसी अनौपचारिक सहयोग के तहत निपटाया गया, क्योंकि उसकी मौजूदगी नेपाल में भारत के लिए सुरक्षा खतरा मानी जा रही थी।
अन्तमें
‘सलीम पिस्टल’ की गिरफ्तारी नेपाल और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग का एक ताजा उदाहरण है। हालांकि, यह मामला यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय अपराधी पहचान बदलकर, नकली पासपोर्ट और सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल कर वर्षों तक गिरफ्तारी से बच सकते हैं।



