खनाल ने चीन और भारत के बीच हुए नेपाल विरोधी समझौते को रद्द करने की मांग की
काठमांडू।

नेपाल एकीकृत समाजवादी पार्टी के सम्मानित नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने 19 अगस्त (3 भाद्र, 2082) को चीन और भारत के बीच हुए नेपाल विरोधी समझौते को रद्द करने की मांग की है।
शुक्रवार को एक बयान जारी करते हुए, नेता खनल ने कहा कि दिल्ली में संपन्न 12 सूत्री समझौते के 9वें बिंदु में लिपुलेख दर्रे के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापार फिर से शुरू करने के समझौते ने न केवल नेपाली भूमि पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल की स्वतंत्रता, संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता पर भी गंभीर दबाव डाला है।
खनाल ने कहा, “इसने देश और विदेश में सभी नेपाली लोगों की देशभक्ति की भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया है और वे इस समझौते के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए भी मजबूर हुए हैं।”
उन्होंने मांग की है कि सभी राजनीतिक दल, सभी देशभक्त संगठन, आम जनता और पूरा देश एकजुट होकर नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता के पक्ष में मजबूती से खड़ा हो और सभी दलों की ओर से एक स्वर में संसद में एक राष्ट्रीय संकल्प पारित करे।


