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मधेश सरकार का सॉफ्टवेयर स्कैंडल : जिन्सी में नाम ही नहीं, रकम का भुगतान

 

१३ भाद्र, जनकपुरधाम । मधेश सरकार मुख्यमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय ने ६५ लाख रुपये में खरीदे गए ६ सॉफ्टवेयर कार्यालय में ही नहीं लाए गए और गायब कर दिए गए।
आर्थिक वर्ष २०७७/०७८ में खरीदे गए ६ सॉफ्टवेयर अब तक जिन्सी में दर्ज किए बिना ही गायब कर दिए गए हैं।

कार्यालय ने इन्वेन्ट्री म्यानेजमेन्ट इन्फरमेशन सिस्टम (IMIS), अफिस अटोनोमेशन सिस्टम (OAS), पर्सनल इन्फरमेशन सिस्टम (PPIS), कॉन्ट्रैक्ट म्यानेजमेन्ट इन्फरमेशन सिस्टम (CMIS), प्रोजेक्ट परफरमेन्स सिस्टम (PPIS) और डाटा एन्ट्री एण्ड रिपोर्टिंग एप्लिकेशन सिस्टम सॉफ्टवेयर खरीदे थे।

खरीदे गए ६ों सॉफ्टवेयर जिन्सी में दर्ज नहीं हैं। लेकिन आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान खरीद वाले वर्ष में ही हो चुका है।

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तत्कालीन मुख्यमंत्री लालबाबु राउत के समय विभिन्न प्रयोजनों के लिए कार्यालय ने ६ कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर लगभग ६५ लाख में आपूर्तिकर्ता कम्पनी से खरीदे थे।

कार्यालय के अनुसार –

अफिस अटोनोमेशन सिस्टम सॉफ्टवेयर १८ लाख ६२ हजार ८०५ रुपये में ड्राई आइस सोलुशन, काठमांडू से खरीदा गया था।

इसी तरह प्रोजेक्ट परफरमेन्स इन्फरमेशन सिस्टम सॉफ्टवेयर भी ड्राई आइस सोलुशन से ही १८ लाख ६६ हजार ७६० रुपये में खरीदा गया था।

पर्सनल इन्फरमेशन सिस्टम (PPIS) १२ लाख ७५ हजार ५३४ रुपये में हिमालयन इन्स्टिच्युट अफ टेक्नोलोजी, काठमांडू से आपूर्ति किया गया था।

कॉन्ट्रैक्ट म्यानेजमेन्ट इन्फरमेशन सिस्टम (CMIS) ४ लाख ९५ हजार ९५७ रुपये में एस्टर इनोभेसन, ललितपुर से और डाटा एन्ट्री एण्ड रिपोर्टिंग एप्लिकेशन सिस्टम हुमला टेक्नोलोजी, काठमांडू से ४ लाख ६५ हजार ३६२ रुपये में खरीदा गया था।

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इन्वेन्ट्री म्यानेजमेन्ट इन्फरमेशन सिस्टम (IMIS) पिस नेपाल, काठमांडू से ४ लाख ९५ हजार ७३१ रुपये में खरीदा गया था।

खरीदे गए ये सॉफ्टवेयर अब तक जिन्सी शाखा में नहीं हैं। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने भी इस विषय में अनुसन्धान कर रहा है।

कार्यालय के जिन्सी शाखा प्रमुख रामअशिष राय ने बताया कि २०७७/०७८ में खरीदे गए ६ों सॉफ्टवेयर अब तक कार्यालय में दर्ज नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा –
“६ सॉफ्टवेयर अब तक जिन्सी में दर्ज नहीं हैं। अख्तियार से पत्र आने पर मैंने भी खोजा था। लेकिन दाखिला नहीं मिला। ये किस स्थिति में हैं यह भी मुझे नहीं पता।”

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कार्यालय स्रोत के अनुसार, आव २०७७/०७८ के अन्त में बिना किसी कार्यविधि, योजना और औचित्य सॉफ्टवेयर खरीदे गए थे।

तत्कालीन कार्यालय सचिव यमप्रसाद भूषाल के एकल निर्णय से खरीद किया गया था। सचिव भूषाल वही व्यक्ति हैं जिन्हें मुख्यमंत्री बेटी पढाओ, बेटी बचाओ कार्यक्रम अन्तर्गत बेटियों को वितरण के लिए खरीदे गए ब्राण्ड से बाहर के साइकिल में भ्रष्टाचारी ठहराया जा चुका है।

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