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फेडरल डेमोक्रेटिक फ्रंट में एकता और परिवर्तन की आवश्यकता पर शुरू हुई बहस

 

विनोदकुमार विमल/काठमांडू, 18 सितम्बर

Gen Z आंदोलन के बाद, नेपाली कांग्रेस, नेकपा ( एमाले ) और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ( माओवादी केन्द्र ) दलों के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बहस शुरू हो गई है । यह बहस अब मधेश केंद्रित दलों के भीतर भी चल रही है ।

तराई-मधेश-केंद्रित दलों के संघीय लोकतांत्रिक मोर्चे की सचिवालय बैठक मंगलवार को हुई l बैठक में मधेश-केंद्रित दलों के बीच एकता और परिवर्तन की आवश्यकता पर चर्चा हुई ।

जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल के महासचिव राम कुमार शर्मा के अनुसार, मोर्चे की बैठक में Gen Z आंदोलन की समीक्षा की गई और पार्टी के भीतर परिवर्तन की आवश्यकता पर चर्चा की गई ।

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युवा नेताओं ने भी अपनी-अपनी पार्टी के अध्यक्षों पर नेतृत्व सौंपने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है । एक नेता ने बताया कि जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल के अध्यक्ष उपेंद्र यादव को नेतृत्व से हटकर नई पीढ़ी को कमान सौंपने का प्रस्ताव भी दिया गया है । यादव ने कहा है कि वह बदलाव को लेकर सकारात्मक हैं । उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहने के बजाय वास्तविकता की समीक्षा करना और पार्टी में बदलाव लाना ज़रूरी है । यादव मधेश-केंद्रित पार्टियों के बीच एकता को लेकर भी सकारात्मक बताए जा रहे हैं ।

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डेमोक्रेटिक फ्रंट के घटक राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के महासचिव केशव झा ने कहा कि Gen Z आंदोलन का फेडरल डेमोक्रेटिक फ्रंट पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा है । उन्होंने कहा कि अब से यह ज़्यादा संगठित तरीक़े से आगे बढ़ेगा ।

उन्होंने कहा कि मोर्चा के भीतर संविधान दिवस, आसोज 3 को काला दिवस मनाने पर भी सहमति बनी है । मोर्चा इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि यह संविधान मधेशियों, मूलनिवासियों और पिछड़े समुदायों पर जबरन थोपा गया है ।

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झा ने कहा, “मोर्चे को सरकार पर दबाव डालना चाहिए कि वह Gen Z आंदोलन के लिए काम करे । अगर आंदोलन भ्रष्टाचार को खत्म करने और सुशासन के लिए था, तो भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए ।” झा ने आगे कहा कि परिवर्तन का मुद्दा पार्टियों के भीतर भी उठाया जा रहा है और प्रत्येक पार्टी के भीतर इस पर बहस होगी ।

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