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शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन, माँ कुष्मांडा की पूजा अराधना

 

 

काठमांडू, आश्विन ९ –

देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का व्रत विशेष रूप से करने का विधान है । इन पूरे नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है । वहीं नवरात्रि के चौथे दिन यानी आज मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जा रही है ।
कुष्मांडा देवी का चौथा स्वरूप है। ग्रंथों के अनुसार इन्हीं देवी की मंद मुस्कान से अंड यानी ब्रह्मांड की रचना हुई थी। इसी कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। ये देवी भय दूर करती हैं। भय यानी डर ही सफलता की राह में सबसे बड़ी मुश्किल होती है। जिसे जीवन में सभी तरह के भय से मुक्त होकर सुख से जीवन बिताना हो, उसे देवी कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए।
देवी कुष्मांडा की आठ भुजाएँ हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं । जिनमें वे कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, गदा और आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है । उनका वाहन सिंह है । मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से रोग, शोक व कष्ट दूर होते हैं और धन, यश व आय में वृद्धि होती है । मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप की उपासना से घर में सुख–समृद्धि व उन्नति आने की भी मान्यता है ।
माँ कुष्मांडा को नारंगी रंग बहुत पसंद है । उन्हें नारंगी फूल पसंद हैं । माँ कुष्मांडा का प्रिय फूल गेंदा और चमेली है ।

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