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गांधी आश्रम बसहिया को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए किया जायेगा प्रयास – शंकर कुमार सान्याल

 


जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। जनकपुरधाम बार्ड 24अवस्थित बसहिया गांधी आश्रम को विश्व स्तर तक पहचान दिया जाएगा। नेपाल में इस धरोहर को बचाने की आवश्यकता है। उपयुक्त बातें प्रख्यात गांधीवादी हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष सह इण्डियन ट्रेडिशनल हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष शंकर कुमार सान्याल ने बसहिया गांधी आश्रम के अवलोकन के पश्चात पत्रकारों को जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोसी राष्ट्र नेपाल जिसके साथ रोटी वेटी का संबंध है।उस देश में महात्मा गांधी का एक भी सरकारी स्तर महात्मा गांधी का प्रतिमा स्थापित नहीं होना दुख की बात है। शंकर कुमार सान्याल ने कहा कि गांधी जी के शिष्य तुलसी मेहर श्रेष्ठ जो गांधी जी के साथ साबरमती आश्रम में साये की तरह रहते थे। सात दशक पूर्व काठमांडू के बाद बसहिया ग्राम में गांधी आश्रम की स्थापना की । यहां चरखा से सूत काटकर बस्त्र तैयार किए जाते थे। सौ से अधिक महिला तथा पुरुष को रोजगार मिलता था।नेपाल केगांधी वादी नेता स्व.महेन्द्र नारायण निधि, गणेशमान सिंह, गजेन्द्र नारायण सिंह सहित कई नेता बसहिया गांधी आश्रम में निर्मित खादी बस्त्र पहनते थे। भारत के कई केन्द्रीय मंत्री, राज्यपाल, भारतीय राजदूत भी बसहिया गांधी आश्रम आकर गांधी तथा उनके शिष्य तुलसी मेहर श्रेष्ठ के तैल चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए है। लेकिन आज गांधी आश्रम बसहिया जीर्ण अवस्था में है।बसहिया आश्रम भी अभी अपनी खोयी पहचान को प्राप्त कर सकते है।बसहिया गांधी आश्रम में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र खोलने तथा बस्त्र उत्पादन के लिए भारत सरकार के साथ नेपाल सरकार सेभी पहल किया जाएगा। इस अवलोकन के दौरान इण्डियन ट्रेडिशनल हेल्थ आर्गेनाइजेशन के उपाध्यक्ष डॉ.एन.पी.सिंह ,आर.एस.डावास, डॉ.प्रदीप टाकू सहित कई लोग थे। गांधी आश्रम बसहिया के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर राघवेन्द्र कर्ण ने सभी को स्वागत किया।

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