Sat. Jul 11th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जापान को पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं कट्टर रूढ़िवादी सानाए ताकाइची

 


टोक्यो, 21 अक्टूबर 2025 । जापान की संसद ने मंगलवार को सानाए ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना है। पितृसत्तात्मक समाज और राजनीति में पुरुषों के वर्चस्व वाले जापान के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

 गहराई से रूढ़िवादी विचारधारा

सानाए ताकाइची को जापान की कट्टर दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञों में गिना जाता है।
वे समलैंगिक विवाह और विवाहित जोड़ों को अलग-अलग उपनाम (थर) रखने की आज़ादी के खिलाफ हैं।
साथ ही, वे जापान के शांतिवादी संविधान में संशोधन की पक्षधर हैं और उस विवादित युद्ध स्मारक पर नियमित रूप से जाती हैं, जहाँ द्वितीय विश्वयुद्ध के अपराधियों के नाम शामिल हैं।

यह भी पढें   नई सरकार हालात पुराने - टूटते युवाओं के सपने : कंचना झा

उनकी इस विचारधारा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के मध्यमार्गी नेताओं में चिंता बढ़ा दी है।

 आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियाँ

ताकाइची ने प्रधानमंत्री का पद ऐसे समय में संभाला है जब जापान उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ती जीवन-यापन लागत और घटते जन्मदर जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
उनकी अधिक खर्च और कर कटौती वाली आर्थिक नीति पर कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
साथ ही, चीन के प्रति उनका कठोर रुख जापान के क्षेत्रीय रिश्तों को और जटिल बना सकता है।

ताकाइची को अब 12 करोड़ जापानी नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
उनके सामने खाद्य सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी (जैसे – चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो चुकी है) और वृद्ध होती जनसंख्या जैसे गंभीर मुद्दे हैं।

यह भी पढें   प्रतिनिधि सभा –सीमा विवाद संबंधी विषय में विपक्षी दलों को दिया गया समय

 राजनीतिक सफर और निजी जीवन

सानाए ताकाइची का जन्म सन् 1961 में नारा प्रिफेक्चर में हुआ था। उनके पिता कार्यालय कर्मचारी और माँ पुलिस अधिकारी थीं।
राजनीति से दूर बचपन बिताने वाली ताकाइची युवावस्था में एक समय हेवी मेटल बैंड की ड्रमर भी रही हैं — वे इतनी तेज़ ड्रम बजाती थीं कि अक्सर ड्रमस्टिक टूट जाती थी।

राजनीति में उनका प्रवेश 1980 के दशक के अमेरिका–जापान व्यापार विवाद के दौरान हुआ।
उन्होंने 1996 में एलडीपी से संसदीय चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया, और तब से अब तक 10 बार सांसद चुनी जा चुकी हैं।
दो बार पार्टी नेतृत्व पाने में असफल होने के बाद, इस बार उन्होंने एलडीपी की नेतृत्व पद की जीत दर्ज की — जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।

यह भी पढें   गणेश नेपाली की मृत्यु के बाद काठमांडू के विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन

 ऐतिहासिक उपलब्धि, पर कठिन राह

सानाए ताकाइची की जीत ने एलडीपी के भीतर दक्षिणपंथी झुकाव को और मजबूत किया है।
हालाँकि, उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती होगी — आर्थिक स्थिरता बहाल करना, घटती जनसंख्या को सँभालना और जापान की वैश्विक भूमिका को परिभाषित करना।

पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में ताकाइची का कार्यकाल जापान के इतिहास में एक नया अध्याय तो खोलेगा, लेकिन इसे सफल बनाना उनके लिए आसान नहीं होगा।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *