अवतार, संभावना : वाणी कर्ण
अवतार
सद्गुण अपनाकर सदा, निज का हो अवतार I
अपने को पहचानिये, रखकर सरल विचार I I
प्रगति स्वयं की कीजिये, अपने दोष सुधार I
परमात्मा के अंश हम, उनके ही अवतार I I
संकट आने पर कभी, बने सहायक धैर्य I
दिनानुदिन अवतार हो, सिद्धांतों में स्थैर्य I I
हरि को प्रिय एकादशी, भक्ति श्रद्धा है सार I
सबके प्रभु श्रीराम हैं, स्वयं विष्णु अवतार I I
माया में हैं सब फँसे, कैसा यह व्यवहार I
अर्थपूर्ण अब ध्येय से, विध्वंसक अवतार I I
जीवन मूल्यों को बचा, आपस में हो प्यार I
सत्य कर्म सुविचार से, जग का नव अवतार I I
परिवर्तन हो सोच में, सही समय अनुसार I
जीवन गति का नाम है, एक सत्य अवतार I I
मन को बाँधे रख सके, यही बड़ा संन्यास I
कृष्ण रूप अवतार में, धर्मयुक्त विन्यास I I
आपस के सम्बन्ध में, मन में रख विश्वास I
प्रत्याशित अवतार है, शनैः शनैः उल्लास I I
ज्ञान प्राप्त गुरु से किये, उनको सदा प्रणाम I
मनुज रूप अवतार है, कठिन जगत संग्राम I I
संभावना
जन्म हुआ संभावना, जहाँ कष्ट का वास I
साथ सभी जब छोड़ दे, यही एक है आस I I
मन बाँधे संभावना, बनता है हथियार I
सत्य सकारात्मक रहे, जीवन का आधार I I
तथ्य जुड़े संभावना, प्राप्त सही निष्कर्ष I
ध्यान उचित का रख करें, अनुमानित फल हर्ष I I
साथ लिए संभावना, छोड़ आज पहचान I
जीवन किस रुख है मुड़ा, सोच समझ नादान I I
कल्पित है संभावना, नहीं वास्तविक छोर I
आशंका प्रतिपल रहे, बाँध आस की डोर I I
दूर रहे संभावना, अनहोनी सामीप्य I
सही गलत सबको परख, निर्णय ले गाम्भीर्य I I
संकल्पित संभावना, नव जग का निर्माण I
अनुभव से ही प्राप्त हो, सरल सहज निर्वाण I I
परिवर्तन जग का नियम, बीता आज प्रधान I
कठिन यही संभावना, अद्भुत है अनुदान I I
सकल जगत संभावना, अंतिम सत्य प्रमाण I
सही सोच संस्कार है, सफल वही कल्याण I I
माने जो संभावना, होते सफल सुकाज I
जीवन बदले रूप है, बीता कल में आज I I
वाणी नित्या


