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राष्ट्रपति के समन्वय से प्रधानमंत्री और विपक्षी नेताओं के बीच संवाद शुरू, चुनावी वातावरण बनाने पर सहमति

 

काठमांडू, २४ दिसंबर २०२५ – राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के समन्वय से कल प्रधानमंत्री सुशीला कोइराला और प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक लंबे समय से चली आ रही संवादहीनता को तोड़ने और २१ फाल्गुन (मार्च २०२६) में प्रस्तावित प्रतिनिधि सभा के चुनावों के लिए राजनीतिक वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

बैठक के मुख्य बिंदु:

1. संवादहीनता का अंत: यह पहली बार है जब राष्ट्रपति के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्य विपक्षी दलों – नेपाली कांग्रेस (शेरबहादुर देउवा), CPN-UML (केपी शर्मा ओली) और माओवादी केंद्र (पुष्पकमल दहाल ‘प्रचंड’) – के नेताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ।
2. चुनाव पर साझा दृष्टिकोण: सभी नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि देश को वर्तमान गतिरोध से बाहर निकालने के लिए चुनाव सफल बनाना सभी राजनीतिक शक्तियों की साझा जिम्मेदारी है। चुनावी वातावरण बनाने के लिए निरंतर संवाद जारी रखने पर सहमति बनी।
3. आगे का रास्ता: प्रधानमंत्री कार्की ने जल्द ही अपने आधिकारिक निवास बालुवाटार में एक विस्तृत बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर चर्चा करने का वादा किया।
4. विश्वास निर्माण का प्रयास: बैठक से पहले, सूचना मंत्री जगदीश खरेल के नेतृत्व में एक सरकारी दल ने ‘जनआंदोलन’ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए प्रमुख दलों के कार्यालयों का दौरा कर विश्वास बहाल करने का प्रयास किया।

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नेताओं के प्रमुख बयान:

· राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल: उन्होंने जोर देकर कहा कि वे कार्यकारी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक राष्ट्रपति हैं। उन्होंने केवल संवाद का समन्वय किया है और अब सरकार को चुनावी माहौल बनाने के लिए निरंतर बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए।
· प्रधानमंत्री सुशीला कार्की : उन्होंने कहा कि देश को स्थिरता और नियमितता में लौटाने के लिए चुनाव ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने नेताओं से चुनावी वातावरण बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे चिंता न करें और चुनावी तैयारियों पर ध्यान दें।
· केपी शर्मा ओली (CPN-UML): उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक चुनाव के लिए विश्वसनीय माहौल नहीं बनाया है। उनका मुख्य विकल्प संसद (प्रतिनिधि सभा) की पुनर्स्थापना रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि पुनर्स्थापित संसद से ही संविधान संशोधन कर सर्वदलीय चुनावी सरकार बनाकर चुनाव कराया जा सकता है।
· पुष्पकमल दहाल ‘प्रचंड’ (माओवादी केंद्र): उन्होंने २१ फाल्गुन में चुनाव कराने पर जोर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि यदि चुनाव नहीं हो पाता है, तो देश को दिशाहीनता से बचाने के लिए संसद की तत्काल पुनर्स्थापना करनी चाहिए।
· शेरबहादुर देउवा (नेपाली कांग्रेस): उन्होंने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए सभी पक्षों से आम सहमति बनाकर देश को एक रास्ता देने की अपील की।

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राजनीतिक संदर्भ:

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब २१ फाल्गुन के चुनाव को लेकर अनिश्चितता और संशय बढ़ रहा था। पिछले महीनों में ‘जनआंदोलन’ और सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के बीच गहरे मतभेदों के कारण राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया था। राष्ट्रपति की इस पहल को इस गतिरोध को तोड़ने की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

अन्तमे

राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास) में हुई यह बैठक नेपाल की वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि मुख्य विपक्षी दल अपनी शर्तों और चिंताओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन संवाद की शुरुआत और चुनाव को सफल बनाने की साझा इच्छा एक आशाजनक संकेत है। अब नजर प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई जाने वाली अगली बैठक और उससे निकलने वाले ठोस नतीजों पर टिकी है।

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