सुदन गुरुंग की ‘सिविलियन फोर्स’: नेपाल में डिजिटल क्रांति का नया प्रयोग या जोखिम भरा कदम ?
**काठमांडू, 3 जनवरी 2026:** नेपाल के युवा उद्यमी और ‘द काउंसिल ऑफ जेनजी’ के नेता सुदन गुरुंग ने हाल ही में ‘सिविलियन फोर्स’ नामक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसे वे देश को डिजिटल रूप से बदलने का विचारधारा बता रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म आम नेपाली नागरिकों को एकजुट करने, उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए प्रयास करने का दावा करता है। लेकिन विशेषज्ञों की राय में, इसमें इस्तेमाल होने वाली एआई तकनीक अभी प्रयोग के चरण में है, जो डेटा सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिहाज से जोखिमपूर्ण हो सकती है।
सुदन गुरुंग ने 18 पौष (जनवरी 2, 2026) को रात 11 बजे इस प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक किया। उनके अनुसार, यह विचार पिछले दो महीनों से तैयार हो रहा था। “यह छितरे हुए नेपाली लोगों को एक जगह जोड़ने का अभियान है,” उन्होंने एक वीडियो में कहा। गुरुंग इसे पहले के आंदोलनों से अलग बताते हैं, जहां विद्रोह की बजाय सकारात्मक बदलाव पर जोर है। उनका मानना है कि कोई एक नेता या सरकार अकेले देश नहीं बना सकती; इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।

#### सिविलियन फोर्स कैसे काम करेगा?
– **समस्या साझा करने का प्लेटफॉर्म:** वेबसाइट (जिसका डोमेन ‘राष्ट्र एकीकरण अभियान’ है) पर लोग अपनी स्थानीय समस्याएं पोस्ट कर सकते हैं, जैसे गांव में सड़क न बनना। ये समस्याएं जिला, प्रांत से होते हुए केंद्र तक पहुंचाई जाएंगी।
– **सरल इंटरफेस:** गुरुंग का दावा है कि यह टिकटॉक जितना आसान है। नारा है – ‘जनता के लिए, राष्ट्र के लिए’।
– **टेस्ट वर्जन और लॉन्च:** फिलहाल यह टेस्ट वर्जन है, जो 10 दिनों तक चलेगा। 27 पौष (जनवरी 10, 2026) को, जो राष्ट्रीय एकता दिवस है, पहला आधिकारिक वर्जन लॉन्च होगा।
– **एआई का इस्तेमाल:** दूसरे वर्जन में ‘एजेंटिक एआई’ का प्रयोग होगा, जो नेपाल के संविधान और कानूनों पर ट्रेन किया जाएगा। अगर कोई समस्या पोस्ट की जाती है, तो एआई कानूनी धाराओं के आधार पर सलाह देगा, चर्चाओं से बेहतरीन सुझाव चुनेगा और संबंधित मंत्रालयों की जानकारी देगा। उसके बाद मानव विशेषज्ञों की टीम (ह्यूमन इंटरवेंशन) इसकी पुष्टि करेगी।
– **छाया सरकार:** कार्यान्वयन के लिए काठमांडू में एक ‘छाया सरकार’ बनाई जाएगी, जो संबंधित विभागों पर दबाव डालकर समस्याओं का समाधान करेगी। गुरुंग कहते हैं, “यह तोड़फोड़ करने वाली शक्ति नहीं, बल्कि निर्माण करने वाली है।”

#### आधिकारिकता और पारदर्शिता पर सवाल
सिविलियन फोर्स अभी किसी आधिकारिक संस्था के तहत नहीं है। यह न तो ‘हम नेपाल’ के अंतर्गत है, न जेनजी ग्रुप का हिस्सा, और न ही कहीं रजिस्टर्ड। गुरुंग खुद मानते हैं कि यह फिलहाल उनके नियंत्रण में है, लेकिन लॉन्च से पहले इसे संचार मंत्रालय या किसी सरकारी निकाय में रजिस्टर करवाया जाएगा। “हम पारदर्शी रहेंगे और सरकारी नियमों का पालन करेंगे,” उन्होंने कहा।
द काउंसिल ऑफ जेनजी के बागमती प्रांत के सह-संयोजक अमृत अधिकारी ने बताया कि उन्हें प्लेटफॉर्म के बारे में पता था, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली पर चर्चा नहीं हुई। अब सार्वजनिक होने के बाद आगे सलाह लेंगे।
#### विशेषज्ञों की चिंताएं: एआई और डेटा सुरक्षा
एआई विशेषज्ञ दोभान राई इस प्लेटफॉर्म में एजेंटिक एआई के इस्तेमाल पर सतर्क करती हैं। “एजेंटिक एआई एक जटिल तकनीक है, जो अभी विश्व बाजार में प्रयोग के चरण में है। यह डेटा-ड्रिवन है और चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स से अलग, खुद निर्णय लेती है। लेकिन यह इतनी जटिल है कि इस पर पूरी तरह भरोसा करना घातक हो सकता है,” राई कहती हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर गलत कंपनी को जिम्मेदारी दी गई तो डेटा लीक का खतरा है।
गुरुंग ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उनका अपना तकनीकी टीम इसे बना रहा है, जिसमें लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) का इस्तेमाल हो रहा है। कोई बाहरी कंपनी शामिल नहीं है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राजीव सुब्बा कहते हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म राजनीतिक एडवोकेसी के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा जरूरी है। “समूह पारदर्शी हो, गुनासों को सब देख सकें, रिपोर्ट सार्वजनिक हों। डिस्क्लेमर में डेटा बेचने या दुरुपयोग न करने की गारंटी हो,” वे सलाह देते हैं। गुरुंग ने आश्वासन दिया कि वे नेपाल सरकार के सभी डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे और हैकिंग जैसे जोखिमों को कम करने के लिए काम करेंगे। “देश बनाने की बात पर सबको क्यों जलन होती है?” उन्होंने सवाल उठाया।
#### निष्कर्ष: उम्मीदें और चुनौतियां
सिविलियन फोर्स नेपाल में नागरिक भागीदारी बढ़ाने का एक नवीन प्रयास लगता है, जो डिजिटल तकनीक से समस्याओं का समाधान करना चाहता है। लेकिन एआई की अपरिपक्वता, डेटा प्राइवेसी और आधिकारिकता जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा। अगर सही तरीके से लागू हुआ, तो यह नेपाल के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल, आम नेपाली इसे टेस्ट कर सुझाव दे सकते हैं। क्या यह वाकई देश को एकजुट करेगा या सिर्फ एक प्रयोग बनकर रह जाएगा, यह समय बताएगा।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।)


