ट्रम्प की नजर सिर्फ वेनेजुएला के तेल पर ही नहीं बल्कि कई अन्य रिसोर्स पर भी
काठमान्डू
अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 की रात बड़ा ऑपरेशन चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया और अब वो देश अमेरिका के हाथ में आ गया है. ट्रंप का कहना है कि कि अमेरिकी कंपनियां वहां तेल निकालेंगी और देश की आर्थिक स्थिति को ठीक करेंगी. लेकिन असली बात ये है कि वेनेजुएला सिर्फ तेल का खजाना नहीं, बल्कि कई सारे रिसोर्स से भरा पड़ा है.
सबसे पहली बात करें तेल की तो वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल रिजर्व है, पूरे 300 बिलियन बैरल. ये किसी भी दूसरे देश से ज्यादा है. इसके अलावा नेचुरल गैस के रिजर्व 200 ट्रिलियन क्यूबिक फीट हैं, जो दुनिया में 34वें नंबर पर आते हैं. ये गैस आने वाले समय में घरों और फैक्टरियों के लिए बड़ी ऊर्जा दे सकती है.
वेनेजुएला में आयरन और गोल्ड कितना है?
अब लोहे की बात करें तो यहां 4 बिलियन टन आयरन ओर (Iron Ore Venezuela) दबा हुआ है, जिसकी कीमत करीब 600 बिलियन डॉलर है. स्टील बनाने वाली कंपनियों के लिए ये बहुत कीमती है.
सोने के रिसोर्सेस भी कमाल के हैं, 8000 टन से ज्यादा गोल्ड, जो पूरे लैटिन अमेरिका में सबसे ज्यादा है. कोयले के रिजर्व 500 मिलियन टन से ऊपर हैं, जो बिजली बनाने में काम आएगा.
रिन्यूएबल फ्रेशवाटर रिसोर्सेस 12 फीसदी
इसके अलावा दुनिया के कुल रिन्यूएबल फ्रेशवाटर रिसोर्सेस का 2 परसेंट हिस्सा सिर्फ वेनेजुएला के पास है. मतलब नदियां, झीलें इतनी कि पानी की कभी कमी नहीं. और तो और, निकेल, कॉपर और फॉस्फेट्स जैसे स्ट्रैटेजिक मिनरल्स भी बड़े पैमाने पर छिपे हैं, जो अभी तक निकाले नहीं गए. ये मिनरल्स इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी और दूसरी हाईटेक चीजों में इस्तेमाल होते हैं.
वेनेजुएला में प्रकृति का खजाना है. तेल, गैस, सोना, लोहा, कोयला, पानी, मिनरल्स सबकुछ यहां मौजूद है. अगर ये सब सही हाथों में इस्तेमाल होते हैं, तो न सिर्फ वेनेजुएला बल्कि पूरी दुनिया को फायदा होगा. अगर अमेरिकी कंपनियां वहां तेजी से उत्पादन शुरू करें तो बाकि देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. सालों से वेनेजुएला की ये दौलत राजनीतिक झगड़ों में फंसी रही है. मादुरो के समय में देश गरीबी और संकट से गुजरा, ट्रंप ने बुला है कि पुराना सिस्टम खराब हो चुका है, नया बनाकर तेल और दूसरी चीजें निकालेंगे. दुनिया के कुछ देश इसे गलत बता रहे हैं, वहीं, कुछ का कहना है कि इससे देश सुधरेगा. फिलहाल सबकी नजर इस पर है कि आगे ट्रंप क्या करेंगे.





