दमन के बिरुद्ध मधेस बन्द , प्रदर्शनकारी और पुलिस के बिच झडप जारी, मधेश फिर जाग उठा
बिनयकुमार, काठमांडू, २१ जुलाई | राज्य द्वारा किया गया दमन के बिरुद्ध आज मधेस पूर्ण रुप से बन्द है । कल्ह तराई–मधेस के जिलों और पहाड के कुछ जगहों में पुलिस ने व्यापक दमन किया था । पुलिस ज्यादती के बिरुद्ध संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेसी मोर्चा ने पूर्व के झापा से लेकर पश्चिम के कञ्चनपूर तक बन्द का आह्वान किया है । बन्द के कारण सवारी साधन नहीं चल सका है तो तराई के विभिन्न जिला के बाजार, शैक्षिक–संस्था, कलकारखाना, उद्योग पूर्ण रुप से बन्द है । मधेस के सड़क पर सुनसान–सन्नाटा छाया हुआ है ।
संविधान के प्रारम्भिक मसौदा के विरोध को लेकर कल मधेस धधक रहा था, जल रहा था । लेकिन कथित राष्ट्रीय मिडिया नें मसौदा उपर के सुझाव संकलन को ‘देशभर में उत्साह’ लिखने पर मधेस और आक्रमक रुप से प्रस्तुत हुआ है । कान्तिपूर पत्रिका को मधेस विरोधी करार देते हुए कइ जगह पर जालाया गया है । मधेसी अधिकार समिति के कार्यकर्ताओं ने जनकपुर के विभिन्न चौक–चौक पर टायर में आग फुक दिया है । सुबह से युवा लोग एकत्रित होने की जानकारी हिमालिनी को प्राप्त हुई है । तराई के झापा, सुनसरी, मोरङ मे यातायात पूर्ण रुप से बन्द है । सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, रौतहट, गौर समेत के अधिकांश जिला मे बन्द का व्यापक प्रभाव पड़ा है ।
प्राप्त जानकारी अनुसार जनकपुर मे फिर से पुलिस और प्रदर्शनकारीयों के बीच झडप हो रही है । पुलिस नें आंश्रुग्यासं भी प्रहार किया है । जनकपुर की अवस्था आन्दोलनमय होने की खवर हमारे सवांददाता कैलास दास ने दी है । राजबिराज मे भी प्रदर्र्शनकारी और पुलिस के बिच झडप हो रहा है । जिस में दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो चुका है । पुलिस ने आंश्रु ग्यांस भी प्रहार किया है । सप्तरी के भारदह में भी सुझाव संकलन कार्यक्रम को भङ्ग कर दिया है । इसी तरह पश्चिम जिला रुपन्देही की अवस्था भी काफी तनावग्रस्त बन गया है । रुपन्देही १ नम्बर क्षेत्र के कांग्रेस नेता अब्दुल रजाद ने सुरक्षाकर्मीयों को लाठी चार्ज करने का निर्देशन दिया है । पुलिस द्वारा हो रहे दमन में १ दर्जन से ज्यादा मधेसी घायल होने की खबर प्राप्त हुई है ।
इसीतरह बिरगंज के पोखरिया बजार की अवस्था भी तनावग्रस्त है । वहांपर प्रमुख मधेसी नेता के अनुपस्थिती होते हुए भी आम जनता आन्दोलन पर उतर चुका है ।
मधेस के इस तनावपूर्ण स्थिती में प्रमुख मधेसी नेतागण महन्थ ठाकुर, उपेन्द्र यादव, राजेन्द्र महतो का मधेस मे अनुपस्थिती को लेकर मधेसी युवाओं मे आक्रोस दिख रहा है । कितने युवाओं ने संविधान सभा से राजीनाम देकर मधेस में आने की मागे भी करने लगा है । इधर स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन के संयोजक डा. सीके राउत के कार्यकर्ताओं भी संघर्ष में उतर चुका है तथा स्वतंत्र मधेश की मांग कररहा है। वर्तमान में राउत मधेसी शिर्ष नेताओं ka विरोध भी और स्वतन्त्र मधेस के लिए संघर्ष को भी साथ साथ आगे बढाने की रणनीति में है । क्या मधेस में आग लगाने से अपना हक–अधिकार पा सकता है ? क्या मधेस के आवाज काठमाडूं में सुनाई दे रहा है ? अगर नहीं सुनाई दे रहा है तो २५ हजार से भी ज्यादा संख्या मे मधेसी लोग काठमाडौं आ सकता है ?

