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तीसरी बार टूटी नेपाली कांग्रेस,क्या पार्टी को लेकर होगी कानूनी लड़ाई?

 

काठमान्डू 15जनवरी
नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस 1950 में गठन के बाद तीसरी बार टूट गई है. इससे पहले पार्टी 1953 में बिश्वेश्वर प्रसाद कोइराला और मातृका प्रसाद कोइराला के टकराव के कारण और 2002 में माओवादी विद्रोह के दौर में प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने के बाद विभाजित हो चुकी है. ताजा टूट को पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है.
गगन थापा पार्टी में क्या बदलाव चाहते हैं?
गगन थापा ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि अब नेपाली कांग्रेस को अपना चेहरा बदलना होगा. उन्होंने कहा कि पार्टी उस सरकार का हिस्सा रही है जिसने के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में युवाओं के आंदोलन को दबाने की कोशिश की. थापा के मुताबिक अगर पार्टी को दोबारा जनता का भरोसा जीतना है तो उसे नए नेतृत्व और नई सोच के साथ आगे बढ़ना होगा. विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया जब असंतुष्ट गुट ने 11 और 12 जनवरी को काठमांडू के भृकुटीमंडप में विशेष सम्मेलन आयोजित किया. देउबा गुट इस सम्मेलन के खिलाफ था और वह आम चुनाव के बाद मई में 15वां महाधिवेशन कराने के पक्ष में था.
बातचीत टूटने के बाद देउबा गुट ने एक नोटिस जारी कर गगन थापा, विश्व प्रकाश शर्मा और संयुक्त महासचिव फार्मुल्लाह मंसूर को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा कर दी. इसके जवाब में शर्मा ने कहा कि विशेष सम्मेलन ने इस निष्कासन को खारिज कर दिया है और असली पार्टी वही है जिसे सम्मेलन का समर्थन हासिल है. सम्मेलन को संबोधित करते हुए गगन थापा ने दावा किया कि उनके गुट को 60 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिनिधियों का समर्थन मिला है. उन्होंने देउबा के नेतृत्व वाली केंद्रीय समिति को भंग करने का भी ऐलान किया.
जानकारी के मुताबिक नेपाली कांग्रेस के दोनों गुट एक ही दिन चुनाव आयोग पहुंचे हैं और अब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई तय मानी जा रही है. इस विभाजन को नेपाल की राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर साफ नजर आ सकता है.

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