भारत मना रहा है अपना ७७ वां गणतंत्र दिवस
काठमांडू, माघ १२ – भारत आज अपना ७७ वां गणतंत्र दिवस मना रहा है । गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने जा रहे परेड की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी । इस सामारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय ओयोग की अध्यक्ष उर्सूला वॉन डेर लेयेन हैं ।
भारतवासियों के लिए यह बहुत ही पावन दिन है । गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर, भारत अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है।
आज के दिन ही भारत को अपना संविधान मिला । स्वतंत्र तो भारत १९४७ में ही हुआ लेकिन जिस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था और देश एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना वो दिन था २६ जनवरी १९५० । इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में हर वर्ष गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं । संविधान समानता और आजादी से जीने का अधिकार देता है ।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक संजाल के माध्यम से ७७वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है । उन्होंने लिखा है “भारत के गौरव और महिमा का प्रतीक यह राष्ट्रीय पर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे। मेरी यही कामना है कि विकसित भारत का संकल्प और भी मजबूत हो।“
गणतंत्र का अर्थ है – जनता का शासन , अर्थात् देश की असली शक्ति जनता के हाथों में होती है । जनता को वोट देने का अधिकार है । अपने प्रतिनिधियो को चुनने का अधिकार दिया गया है । और यह तब संभव हुआ जब संविधान लागू हुआ ।
इसबार गणतंत्र दिवस की थीम बेहद ऐतिहासिक है । इसबार सरकार ने राष्ट्रगीत के रुप में गाए जाने वाले “वंदे मातरम” के १५० वर्ष होने के अवसर पर इसे उत्सव के रुप में मनाने का फैसला किया है । इस वर्ष की थीम “वंदे मातरम और आत्मनिर्भर” भारत है । बंकिम चंद्र चट्टोपध्याय द्वारा रचित यह गीत इस साल की परेड, झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केन्द्र बिंदु है ।
इस दिन को मनाने के लिए भारत को बहुत संघर्ष करना पड़ा है । पूरा भारत आज के दिन उन सपूतों को याद करते हैं, नमन करते हैं जिनकी वजह से यह आज का दिन मना पा रहे हैं । पूवर्जो ने इस आजादी को पाने, और संविधान के लिए अपने आप को न्यौछावर कर दिया । बहुत बलिदान, बहुत तपस्या और त्याग के बाद मिली है ये आजादी । महात्मा गाँधी,चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और उनके जैसे न जाने कितनों ने एक ऐसे भारत का सपना देखा जहाँ सभी लोग आजादी और सम्मान से रह सकें । उनके साहस, समर्पण और बलिदान ने ही आज के आधुनिक भारत की नींव रखी थी ।


