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जानकी गाउँपालिका में पर्यटन प्रवर्द्धन और प्रथम साहित्यिक महोत्सव 2082 संपन्न

 

नेपालगन्ज (बाँके), पवन जायसवाल। बाँके जिले की जानकी गाउँपालिका में “जानकी पर्यटन प्रवर्द्धन तथा प्रथम साहित्यिक महोत्सव 2082” फाल्गुन 2 गते शनिवार को भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। जानकी गाउँपालिका–3, मानपुर स्थित पौवा होटल में आयोजित इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन जानकी गाउँपालिका, बाँके तथा भेरी साहित्य समाज केन्द्रीय समिति, नेपालगन्ज द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जानकी गाउँपालिका की उपाध्यक्ष रामप्यारी यादव, प्रा.डा. गोपाल प्रसाद शर्मा अधिकारी तथा लुम्बिनी प्राविधिक विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रा.डा. कृष्ण प्रसाद घिमिरे ने पानस में दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।

भेरी साहित्य समाज के महासचिव तथा वरिष्ठ कलाकार सुन्दर गुरुङ द्वारा संचालित कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष इन्द्र बहादुर बस्नेत ने की। महोत्सव में जानकी क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं के साथ भाषा, साहित्य और संस्कृति के विविध आयामों पर व्यापक प्रस्तुतीकरण और चर्चा की गई। नेपाल तथा भारत से आए साहित्यकारों ने बहुभाषिक काव्य-पाठ प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों द्वारा नृत्य, हास्य-नाटक और सांगीतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।

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समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वरी रिजाल ने “जानकी पर्यटन प्रवर्द्धन: वर्तमान अवस्था और सम्भावना” विषयक अवधारणा-पत्र प्रस्तुत किया। कोषाध्यक्ष डा. राजकुमार थारु ने समग्र विकास में पर्यटन की खोजमूलक संभावनाओं पर अपने विचार रखे। पर्यटन अभियन्ता तथा नाट्टा बाँके चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष श्रीराम सिग्देल ने ग्रामीण, औद्योगिक और कृषि पर्यटन की संभावनाओं पर टिप्पणी की।

जानकी गाउँपालिका के प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत परशुराम उपाध्याय ने इस वर्ष पर्यटन क्षेत्र के समग्र विकास हेतु विस्तृत कार्ययोजना बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाषा और साहित्य के संवर्द्धन में ऐसे महोत्सव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पर्यटन प्रवर्द्धन के लिए ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ा जाएगा।

वरिष्ठ सलाहकार डा. हरि प्रसाद तिमिल्सिना के अनुसार महोत्सव में दाङ, सुर्खेत, बर्दिया, कैलाली, कञ्चनपुर सहित विभिन्न जिलों से नेपाली, हिन्दी, अवधी और उर्दू साहित्यकारों की सहभागिता रही। भारत के उत्तर प्रदेश से भी अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया।

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सांस्कृतिक सत्र में महेन्द्र सेढाई, केबी शाही, खगेन्द्र गौतम, राकेश गुरुङ, मदन लामा, देवी अधिकारी और अनिता लामिछाने ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए। बर्दिया के बढैयाताल गाउँपालिका स्थित कृष्णसार विद्या निकेतन के विद्यार्थियों ने हास्य एवं नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मनोरंजन किया।

भारत से आए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ भारत के अध्यक्ष शारीक रब्बानी ने किया। बज्म-ए-उर्दू पैकड भारत के उपाध्यक्ष डा. हरि गोविन्द यादव, अवधी साहित्यकार प्रदीप सारंग, उर्दू साहित्यकार अतिकास गंजबी, विभा त्रिपाठी, पीके प्रचण्ड, शालिनी सिंह, रहिस अहमद और बम्पर बहराईची सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे महोत्सव नेपाल–भारत के साहित्यिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाएंगे।

महोत्सव में विभिन्न व्यक्तित्वों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। पश्चिम नेपाल के वरिष्ठ कलाकार प्रेमदेव गिरी, गणेश गौतम, लखनऊ (भारत) के वरिष्ठ साहित्यकार डा. राम बहादुर मिश्र एवं प्रदीप सारंग, दाङ के साहित्यकार जगतराम यादव सहित कई स्रष्टाओं को दोसल्ला ओढ़ाकर सम्मान-पत्र प्रदान किया गया। वरिष्ठ कलाकार केबी शाही, देवी अधिकारी, मदन लामा, खगेन्द्र गौतम और अनिता लामिछाने को भी सम्मानित किया गया।

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इसके अतिरिक्त गोरखा-पत्र के सिराज खान तथा दैनिक नेपालगन्ज के प्रधान सम्पादक झलक गैरै को भी सम्मान-पत्र प्रदान किया गया। सुदूरपश्चिम लोकदोहोरी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष लिलाधर बास्कोटा और ठाकुरबाबा प्रज्ञा प्रतिष्ठान, बर्दिया के उपाध्यक्ष खगेन्द्र नेपाल ने हुडके नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में प्रा.डा. गोपाल प्रसाद शर्मा अधिकारी, प्रा.डा. कृष्ण प्रसाद घिमिरे, वरिष्ठ कथाकार सनत कुमार रेग्मी, वरिष्ठ लेखक नरेन्द्रजंग पिटर, अवधी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के संस्थापक विष्णुलाल कुमाल, प्राज्ञ महानन्द ढकाल, खजुरा प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उपकुलपति इन्द्र बहादुर भण्डारी सहित अनेक साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और सामाजिक व्यक्तित्वों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

यह महोत्सव जानकी क्षेत्र में पर्यटन, भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक समन्वय के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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