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जेनजी बिद्रोह के वादका बङ्गलादेश : डॉ धन कुमारी थापा ‘ सरु ‘

डॉ धन कुमारी थापा ‘ सरु ‘, काठमांडू । अभी दुनिया की राजनीतिमा सामाजिक सञ्जालका प्रभाव ज्यादा जोर से बढ रहा है। जेन जेड पुस्ता नई क्रान्तिका नेतृत्व कर रहा है। जेन जेड जिसकी चलन चल्तीको भाषामा जेन्जी भि कहा जता है , ये बाल्यकाल से ही इन्टरनेट और सामाजिक सञ्जालका साथ जुडा हुआ पहला पुस्ता है। जेन्जि पुस्ताको साथ उनके आगे वाला पुस्ता का साथ ठीकठाक संवाद नहीं हो पाया है। उसके वजह से ही जेंजी पुस्ता राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्पेस ढुड्ने के लिए बेचैन प्रकट कर्ते है, और उनका ऐसा प्रदर्शन राजनीतिक उथलपुथलको रूप लेता है।

बङ्गलादेश मे जुलाई/अगस्ट २०२४ मा एक अभूतपूर्व जेन्जी विद्रोह ने शेख हसिना वाजेद को निर्वाचित सरकार से बहार कर दिया था और विद्यार्थीको समर्थन में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मदी युनुस कि अध्यक्षतामे एक अन्तरिम सरकारका गठन हुआ था। युनुस सरकार नै लम्बा सङ्क्रमणको चुनाव तक ले आया है।बङ्गलादेश में १३औं संसदीय निर्वाचनने प्रष्ट जनादेश का संकेत किया है। बङ्गलादेश नेसनलिस्ट पार्टी बिएनपी को दुई तिहाई बहुमत मिली और २० साल के बाद ओ पार्टी सत्तामा पहुँच गया है।

शेख हसिना वाजिद कि पार्टी अवामि लीगको निर्वाचनमा भाग लेने से प्रतिबन्ध किया था, उसके वजह से बङ्गलादेशका निर्वाचन द्विपक्षीय प्रतिस्पर्धा बन गया था। एक तरफ बिएनपी और दूसरा तरफ११ पार्टीकी मोर्चा जमाते इस्लामी जिसमें जेञ्जी युवाका पार्टी नेसनल सिटिजन पार्टी (एनसिपी )सामेल था। बङ्गलादेशकी निर्वाचनकी रोचक वाद ये हुई की सामाजिक सञ्जाल मे लोकप्रिय जेन्जी युवा निर्वाचित हो नै पाए। इसका पाठ है कि सामाजिक सञ्जाल मे लोकप्रिय हुन और निर्वाचन विजयी हुन अलग अलग मामला है।

बङ्गलादेशकी नयाँ प्रधानमन्त्री तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमन्त्री बेगम खालिदा जिया के पुत्र हैं। उनको राजकाजका मामला पारिवारिक विरासत में मिली है।

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इतिहास मे सबसे ज्यादा गलतफेमी वाला समझ ये हे कि आन्दोलन ही किसी भी यात्रा कि निर्णायक क्षण हो ता है। लेकिन एसा नै हे, ऐ सुरुवात हो ता है।
देशका असली दिशा त उहाँसित सुरु होता है – संस्था कैसे रेस्पोन्स करते है, एलिट कैसे समझदारीमा आते है, शक्तिको पुनः वितरण कैसे किया जाता है और आर्थिक अपेक्षा र सम्बोधन होता है कि नहीं।

कोही भी राजनीतिक संक्रमण – कौन आदमी वा नेता देशका कार्यकारी पद में आ जाते ,उसमे सिमित कर्ना भुल होता है। गहरा सवाल तो सेवा प्रवाहको संगठित क्रिया कि नहीं , न्यायिक स्वतन्त्रता व्यावसायिक कर्मचारीतन्त्र, चुनावी विश्वसनीयता संसदीय कार्यकुशलताको अमूर्त चीज मानाजना भूल होता है। जब कोही भी पद्धति मे बाहर से धक्का मिल्ता है, उसको अस्तित्वमै सङ्कट पैदा गर्ने से चलायमान संस्था है वचा सकते है।

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एक स्थिर व्यवस्था फरक मत आलोचना औ परस्पर विरोधी विचारधाराको स्थान देता है। फरक मत शासन केप्रति बेगुना नै होता है। उही लोकतन्त्र सफल होता है जो आजको बहुमतको कल की अल्पमतको रुपमा दिखा जाता है नियमको बनाता है और पालनकर्ता है।

बङ्गलादेशकी नई सरकारकी सफलता लोकतन्त्र के आधारभूत मापदण्डको पालन गर्ने मे आधारित होगा। बङ्गलादेशको नई सरकारको शपथ ग्रहण समारोहमा नेपाल के परराष्ट्रमन्त्री वालानन्द शर्मा भि सामेल हो गए थिए। बङ्गलादेश के स्थापना के समयमे नेपाली कांग्रेस पार्टी ने हतियारका भी सहयोग किया था। नेपाली काङ्ग्रेस के संस्थापक नेता बीपी कोइराला की सक्रियतामे ये योगदान हुवा था।

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चरम अनिश्चितता के बाद बंगलादेशमा लोकतान्त्रिक विधि से सरकारको चयन होना पुरा दक्षिण एसियाकी लोकतन्त्र के लिए खुसीका खबर है।

डॉ धन कुमारी थापा ‘ सरु ‘

( लेखिका कांग्रेस नेतृ है) भाषा कला संस्कृति विभागीय प्रमुख बागमती प्रदेश l

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