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नागढुंगा–नौबिसे सड़क खंड में दूसरे चरण का कालोपत्र (अलकतरा) पूरा, अंतिम चरण चुनाव के बाद

काठमांडू। में दूसरे स्तर (सेकेंड लेयर) का कालोपत्र (अलकतरा) कार्य पूरा कर लिया गया है। 12.26 किलोमीटर लंबे पहले खंड में अब तीसरे और अंतिम चरण का कालोपत्र कार्य ही शेष है। झ्याप्लेखोला क्षेत्र के 100 मीटर हिस्से में भी दूसरे स्तर का कालोपत्र पूरा हो चुका है।

(पूर्वी खंड) के प्रमुख केशवप्रसाद ओझा के अनुसार, अंतिम परत का कालोपत्र करने के लिए सड़क को पूर्ण रूप से बंद करना पड़ेगा, जो चुनाव से पहले संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस खंड में अंतिम कालोपत्र के अलावा खानीखोला में अपंगमैत्री आकाशे पुल (फुट ओवरब्रिज) का निर्माण कार्य भी बाकी है। चुनाव के कारण मजदूरों की उपलब्धता प्रभावित होगी, जिससे कार्य पूरा होने में देरी की संभावना है।

पहले खंड का 1 अरब 30 करोड़ रुपये का ठेका जाङ्सु–सगुन जेवी को दिया गया है। 29 चैत 2078 को अनुबंध होने के बावजूद काम 26 जेठ 2079 से शुरू हुआ। समय-सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है और अब फागुन तक का समय दिया गया था, लेकिन चुनाव के कारण कार्य चैत तक खिंचने की संभावना है।

दूसरे खंड (नौबिसे–मलेखु) में 58 प्रतिशत प्रगति

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नौबिसे–मलेखु (43.54 किमी) खंड में अब तक 58 प्रतिशत कार्य प्रगति हुई है। साढ़े 21 किमी सड़क पर पहली परत का कालोपत्र दोनों ओर से पूरा हो चुका है, जबकि 15 किमी में दूसरी परत भी बिछाई जा चुकी है। इस खंड में 13 पुलों में से 10 का निर्माण पूरा हो चुका है। सोप्याङ, फेदी खोला और खहरे खोला पुल निर्माणाधीन हैं।

बिजली के 168 पोल में से अब भी लगभग 100 पोल हटाए जाने बाकी हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। फेदी खोला पुल के मामले में कानूनी विवाद और स्थानीय अवरोध भी सामने आए हैं। इस खंड का 5 अरब 33 करोड़ 19 लाख रुपये का ठेका जेडआईसीजी–शर्मा–लामा जेवी को दिया गया है। समय-सीमा बढ़ाकर असोज 2083 तक कर दी गई है।

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मलेखु–मुग्लिन खंड में 40 प्रतिशत प्रगति

मलेखु–मुग्लिन (38.86 किमी) खंड में समग्र निर्माण प्रगति 40 प्रतिशत बताई गई है। पश्चिमी खंड की प्रमुख सजना अधिकारी के अनुसार, पहले जहां मासिक प्रगति 0.5 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 3.04 प्रतिशत हो गई है। 11 किमी चार लेन सड़क पर पहली परत का कालोपत्र पूरा किया जा चुका है।

निर्माण सामग्री की कमी अब भी प्रमुख समस्या बनी हुई है। मलेखु के लामाबगर से सामग्री निकालने की पर्यावरणीय स्वीकृति (ईआईए) मिलने के बावजूद स्थानीय विरोध के कारण उत्खनन नहीं हो पा रहा है। फिलहाल सामग्री नुवाकोट और चितवन के जुगेडी से लाई जा रही है। इस खंड में भी 109 बिजली पोल हटाए जाने बाकी हैं।

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शर्मा–जेडआईसीजी जेवी को 4 अरब 80 करोड़ 59 लाख रुपये में यह ठेका दिया गया था। मूल रूप से 2082 पुस तक कार्य पूरा होना था, लेकिन समय-सीमा बढ़ाकर 15 असार 2083 कर दी गई है।

गौरतलब है कि नागढुंगादेखि मुग्लिन तक 94.66 किलोमीटर सड़क का स्तरोन्नयन कार्य जारी है। इस मार्ग से प्रतिदिन 12 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं, जिससे यह देश की महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाओं में से एक माना जाता है।

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