Tue. Jun 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सत्ता की दहलीज पर संकल्प: जब प्रचंड जीत ने ओढ़ी ‘विनम्रता’ की चादर

 

हिमालिनी डेस्क, काठमांडू, 19 मार्च 926।
​नेपाल के राजनीतिक क्षितिज पर राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का उदय केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक दबी हुई जन-आकांक्षा का विस्फोट है। हाल ही में पार्टी सभापति रवि लामिछाने ने नवनिर्वाचित सांसदों को जो संबोधन दिया, वह सत्ता की चिर-परिचित ‘अहंकारी भाषा’ से कोसों दूर था। उस हॉल में केवल तालियों की गूँज नहीं थी, बल्कि एक भारी जिम्मेदारी का अहसास और भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा थी।
​१. विरासत का सम्मान: अतीत से संवाद, भविष्य का संकल्प
​राजनीति के मंच पर अक्सर नई शक्तियाँ पुराने इतिहास को मिटाकर ही अपना नाम लिखना चाहती हैं। लेकिन लामिछाने ने एक भावुक और परिपक्व रुख अपनाते हुए पूर्ववर्ती राजनीतिक दलों के संघर्ष और योगदान को नमन किया। उन्होंने इतिहास को नकारा नहीं, बल्कि उसे एक ‘सीख’ के रूप में स्वीकार किया।
​उनका यह संदेश स्पष्ट था: हम विरोध के लिए नहीं, बल्कि सुधार के लिए आए हैं। यह उन करोड़ों नेपालियों के लिए एक भरोसेमंद क्षण था जिन्होंने दशकों तक पुराने दलों को सींचा था, लेकिन अब बदलाव की राह देख रहे थे।
​”विरासत का सम्मान भी, और भविष्य का अरमान भी; जीत के इस शोर में, जिम्मेदारी का आह्वान भी।”
​२. सत्ता: पुरस्कार नहीं, एक कठिन ‘अग्निपरीक्षा’
​जहाँ प्रचंड बहुमत के बाद जश्न और दावतों का दौर चलता है, वहाँ रवि लामिछाने का स्वर सचेत और गंभीर था। उन्होंने अपने सांसदों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यह सत्ता उनके लिए कोई ‘व्यक्तिगत अवसर’ नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की ‘अग्निपरीक्षा’ है।
​तथ्य: रास्वपा के पास अब जनता का ऐतिहासिक जनादेश है।
​भावना: लामिछाने ने इस जनादेश को ‘काँच के बर्तन’ की तरह बताया, जिसे जरा सी लापरवाही चूर-चूर कर सकती है। उन्होंने अनुशासन की एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची, जो सांसदों को आत्ममुग्धता से बचाकर जनसेवा की ओर मोड़ती है।
​३. जीत को ‘पचाने’ की कला और मर्यादित आचरण
​नेपाल की राजनीति ने कई बार देखा है कि दल अक्सर जीत को पचा नहीं पाते और हार को सह नहीं पाते। दो-तिहाई के करीब पहुँचती शक्ति के बावजूद, सभापति के संबोधन में स्पष्टता, आशा और अनुशासन का अद्भुत संगम था। उन्होंने केवल निर्देश नहीं दिए, बल्कि अपने सांसदों के भीतर उस ‘भरोसे’ को फिर से जीवित किया जिसे आम नेपाली नागरिक अपनी आँखों में लेकर मतदान केंद्र तक गया था।
​एक नए युग की आहट?
​रवि लामिछाने का यह मन्तव्य केवल एक पार्टी की ‘गाइडलाइन’ नहीं है, बल्कि यह नेपाल की उस बदलती राजनीतिक संस्कृति का दस्तावेज़ है, जहाँ ‘शक्ति’ को ‘सेवा’ और ‘पद’ को ‘दायित्व’ माना जा रहा है।
​यह संबोधन बताता है कि लोकतंत्र में जीत केवल सिर गिनने का नाम नहीं, बल्कि निरंतरता के साथ दिल जीतने की एक पवित्र प्रक्रिया है। यदि रास्वपा इस विनम्रता और अनुशासन को धरातल पर उतारने में सफल रही, तो यह आधुनिक नेपाल के निर्माण में एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होगा।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *