क्या अगली गिरफ्तारी उपेन्द्र यादव और रामबहादुर थापा ‘बादल’ की होगी ?
काठमांडू, २८ मार्च ०२६। नेपाल की राजनीति में हाल के घटनाक्रम ने एक नया मोड़ ले लिया है। पूर्वप्रधानमन्त्री की गिरफ्तारी के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा और भी बड़े नेताओं तक पहुँच सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है कि अब निशाने पर दो और बड़े नेता— ‘बादल’ और यादव आ सकते हैं।
भुटानी शरणार्थी काण्ड और बादल पर शक
भुटानी शरणार्थी काण्ड नेपाल की हालिया राजनीति के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। इस मामले में पहले ही कई बड़े अधिकारी और नेता गिरफ्तार हो चुके हैं।
पूर्व उपप्रधानमन्त्री एवं पूर्व गृहमन्त्री ‘बादल’ पर भी इस प्रकरण में संलिप्तता के आरोपों की चर्चा फिर तेज हो गई है।
इस घोटाले में पूर्वमन्त्री तीन वर्षों से जेल में हैं। उनके साथ कई अन्य आरोपी—जिनमें बादल के पुत्र प्रतीक थापा, पूर्व गृहसचिव टेकनारायण पाण्डे और अन्य बिचौलिये—भी न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं।
अदालत ने भी पहले आदेश दिया था कि मामले का अंतिम फैसला होने तक मुख्य आरोपियों को रिहा न किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, हाल में सरकार ने इस मामले से जुड़े पुराने दस्तावेज फिर से मंगवाने शुरू किए हैं।
गौर हत्याकाण्ड और उपेन्द्र यादव
दूसरी ओर, 2007 में रौतहट के गौर में हुए भीषण हिंसक संघर्ष का मामला भी फिर से चर्चा में आ गया है। उस समय और के कार्यक्रम एक ही स्थान पर पड़ जाने से हिंसा भड़क गई थी।
इस झड़प में 27 लोगों की मौत हुई और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में वर्तमान जसपा अध्यक्ष को भी आरोपों के घेरे में लाया जा रहा है।
हाल ही में ने इस मामले में आगे जांच करने का परमादेश दिया था, जिसके बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियाँ सक्रिय बताई जा रही हैं।
सरकार की सक्रियता
सूत्रों के अनुसार वर्तमान प्रशासन—प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री —इन दोनों मामलों को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ाने के मूड में है। बताया जा रहा है कि गृहमन्त्री ने शनिवार की छुट्टी के दिन भी मंत्रालय में बैठकर संबंधित फाइलें मंगवाई हैं।
क्या बड़े राजनीतिक टकराव की शुरुआत ?
यदि इन दोनों मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो नेपाल की राजनीति में एक और बड़ा भूचाल आ सकता है।
एक ओर भुटानी शरणार्थी घोटाला सत्ताधारी और मुख्यधारा के दलों को प्रभावित करता है, वहीं गौर हत्याकाण्ड मधेश की राजनीति से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या अगली गिरफ्तारी उपेन्द्र यादव और रामबहादुर थापा ‘बादल’ की होगी ? यह खबर जन आस्था ने दी है ।


