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कुवेत में प्रवासी मजदूर की मौत, युद्ध के कारण शव नहीं पहुंचा

 

मतदान के दिन आया दुखद समाचार, 22 महीने बाद घर आने का था वादा

कान्तिपुर से साभार

काठमांडू, 31 मार्च 026। सिरहा, नेपाल — प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले रात कुवेत से रमेश कुमार मोची ने अपनी पत्नी प्रमिला कुमारी राम को फोन किया। 22 महीने पहले कुवेत गए रमेश ने बताया कि वह बैशाख में छुट्टी लेकर घर आएंगे, ताकि डेढ़ साल के बेटे आर्यन को देख सकें। उन्होंने देश के भविष्य पर भी बात की — “चुनाव में अच्छे लोगों और युवाओं को वोट देना चाहिए, इस चुनाव के बाद देश बदलेगा।”

लेकिन देश बदलने से पहले ही किस्मत बदल गई। अगले दिन चुनाव के दिन रमेश के दुनिया छोड़ने की खबर परिवार के आंगन तक पहुंच गई।

सुखीपुर नगरपालिका-1 शिवनगर की 31 वर्षीय प्रमिला के पिछले दो सप्ताह रोते-तड़पते बीते हैं। रमेश के 55 वर्षीय पिता रामनारायण शव लाने के लिए कंपनी और दूतावास को रोज फोन कर रहे हैं।

16 साल विदेश में बिताए, तीन महीने पहले आखिरी बार बात हुई थी

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सिरहा के 35 वर्षीय रमेश ने विदेशी रोजगार में 16 साल बिताए थे। 17 साल की उम्र में उम्र बढ़ाकर पहली बार कुवेत गए थे। कुवेत में 8 साल काम करके लौटे, फिर मलेशिया में दो साल, कतर में दो साल और सऊदी अरब में दो साल काम किया। आखिरी बार कुवेत में काम शुरू किए 22 महीने हो चुके थे।

प्रमिला ने बताया, “सुबह साढ़े सात बजे सास-ससुर के साथ पड़ोस के गांव मोहनपुर के सामुदायिक स्कूल के मतदान केंद्र पर वोट डालने गए थे। वोट डालकर लौटे तो दोपहर 2 बज गए थे। मैं बर्तन मांज रही थी कि अचानक रिश्तेदार राहुल पति की मौत की खबर लेकर आंगन में आ पहुंचे। सुनते ही जमीन पर गिर पड़ी।”

रमेश के साथ काम करने वाले रामकुमार राम ने बताया कि रमेश ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे थे। “रात करीब 2 बजे वह उठकर टॉयलेट गए, दवा हाथ में लेकर खाने ही वाले थे कि गिर पड़े। आधा घंटे बाद एंबुलेंस आई, अस्पताल ले जाते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”

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युद्ध के कारण 22 शव फंसे, उड़ानें नहीं हो रही संचालित

16 फरवरी से अमेरिका और इज़राइल लगातार ईरान पर हमला कर रहे हैं। ईरान ने अमेरिकी सैन्य कैंप वाले कुवेत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान में जवाबी हमले जारी रखे हैं। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के कारण कुवेत समेत कई देशों के हवाई अड्डे संचालित नहीं हो पा रहे हैं।

नेपाली दूतावास ने शव भेजने की अनुमति दे दी है, लेकिन 22 शव फंसे हुए हैं — कुवेत में 7, सऊदी में 7, यूएई में 8।

कुवेत में नेपाली राजदूत घनश्याम लम्साल ने बताया, “अब तक कुवेत से नेपाल जाने वाले विमान संचालित नहीं हुए हैं। हवाई उड़ान शुरू होते ही शव भेजने की तैयारी है।”

रियाद स्थित नेपाली दूतावास के श्रम काउंसलर कविराज उप्रेती ने बताया कि सऊदी में 6 शवों के कागजात पूरे हो चुके हैं, लेकिन नियमित उड़ानें नहीं हो रहीं। कार्गो से एक शव भेजने पर करीब 9 लाख रुपये (25 हजार रियाल) शुल्क लग रहा है।

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दुबई में नेपाली महावाणिज्यदूत हरि ओढारी ने बताया कि यूएई में 8 शव रुके हैं। ईरान ने दुबई हवाई अड्डे पर 28 फरवरी, 7 मार्च और 16 मार्च को तीन हमले किए हैं, जिससे उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

‘घर का खंभा था बेटा, अब कैसे चलेगा परिवार’

रमेश के पिता रामनारायण ने आंसुओं के साथ कहा, “मेरा रमेश बेटा घर का खंभा था। वहीं जिम्मेदारी समझकर विदेश गया था। खंभा ही संसार से चला गया, अब कैसे परिवार चलेगा और पोते-पोतियों को कैसे पालूंगा? कब विमान उड़ेगा, कब शव आएगा — हर दिन काटना मुश्किल हो रहा है।”

गौरतलब है कि कतर में रुके 5 शव 16 मार्च को नेपाल भेज दिए गए हैं। कतर एयरवेज ने एक ही दिन ये शव नेपाल पहुंचाए। कांतिपुर से,

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