Sat. May 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

दिग्गजों का पतन, घंटी का उदय: कैसे एक शिक्षक राजकिशोर महतो ने बदला धनुषा-4 का इतिहास

Raj kishor Mahato
 

यह जीत एक शिक्षक की कलम की ताकत है, जिसने सत्ता के घमंड को हराकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा ‘वीआईपी’ (VIP) जनता होती है।

हिमालिनी डेस्क, ८ अप्रैल ०२६।

Raj kishor Mahato MP from Dhanukha-4 : कहते हैं कि जब जनता का सब्र टूटता है, तो इतिहास की दीवारें हिल जाती हैं। धनुषा-4 की सड़कों पर इस बार जो शोर था, वह केवल नारों का नहीं, बल्कि बरसों से दबी हुई उस सिसकी का था जिसे सत्ता के गलियारों ने कभी सुना ही नहीं। मधेश की तपती धूप में पसीना बहाते उस किसान और रोजगार की तलाश में पासपोर्ट हाथ में लिए उस युवा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी—बदलाव की चमक।

दशकों से यहाँ ‘दिग्गजों’ का शासन रहा। बड़े नाम, ऊँचे पद और दिल्ली से काठमांडू तक पहुँच रखने वाले रसूखदार नेता। जनता ने उन्हें सिर आँखों पर बिठाया, इस उम्मीद में कि शायद इस बार उनके बच्चों के स्कूल की छत नहीं टपकेगी, शायद इस बार अस्पताल में डॉक्टर मिलेगा। लेकिन साल बीतते गए, चेहरे वही रहे और वादे बस चुनावी रैलियों की धूल बनकर उड़ गए।

इसी बीच, एक साधारण सा व्यक्तित्व, एक शिक्षक, हाथ में ‘घंटी’ लेकर निकला। राजकिशोर महतो ने जब जनता के बीच जाकर उनके दुख साझा किए, तो लोगों को लगा कि यह कोई ‘नेता’ नहीं, बल्कि उन्हीं के घर का कोई अपना है जो उनके दर्द की भाषा समझता है।

राजकिशोर महतो की 48,270 वोटों की यह प्रचंड जीत महज एक आंकड़ा नहीं है; यह उन बूढ़ी आँखों का आशीर्वाद है जो अपने पोते-पोतियों को परदेश जाते देख थक चुकी थीं। यह उन युवाओं का आक्रोश है जो डिग्री लेकर भी बेरोजगार बैठे थे। जब बड़े-बड़े किलों के कंगूरे ढह रहे थे, तब धनुषा की मिट्टी यह गवाही दे रही थी कि अब मधेश “सिर्फ वोट बैंक” बनकर नहीं रहेगा।

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व और नेपाल के राजनीतिक रूपांतरण पर अंतरराष्ट्रीय बहस

यह जीत एक शिक्षक की कलम की ताकत है, जिसने सत्ता के घमंड को हराकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा ‘वीआईपी’ (VIP) जनता होती है। आज धनुषा-4 की हवाओं में एक नई उम्मीद है, एक नया विश्वास है कि अब अंधेरा छँटेगा और विकास का सूरज सच में उगेगा।

Raj kishor Mahato

धनुषा-4 में बदलाव की आंधी: राजकिशोर महतो ने दिग्गज नेताओं को दी मात

नेपाल के संसदीय चुनाव 2026 (वि.सं. 2082) के परिणामों ने पूरे देश को चौंका दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर धनुषा क्षेत्र संख्या 4 में देखने को मिला, जहाँ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के उम्मीदवार राजकिशोर महतो ने राजनीति के दो भीष्म पिताओं—नेपाली कांग्रेस के महेंद्र यादव और एमाले (UML) के रघुवीर महासेठ—को करारी शिकस्त दी। यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि मधेश की राजनीति में नए युग की शुरुआत का संकेत है।

आलेख की मुख्य विशेषताएं (Article Highlights)

  • ऐतिहासिक अंतर: राजकिशोर महतो ने 48,270 वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल की।

  • दिग्गजों का पतन: पूर्व गृहमंत्री रघुवीर महासेठ और कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्र यादव की हार।

  • नया चेहरा: शिक्षक से नेता बने राजकिशोर महतो अब धनुषा की नई आवाज़ हैं।

  • RSP का उदय: मधेश में ‘घंटी’ (RSP का चुनाव चिह्न) की गूँज ने स्थापित दलों के किलों को ढहा दिया।


चुनावी परिणाम: एक नज़र में

धनुषा-4 के परिणाम बताते हैं कि जनता ने ‘चेहरे’ के बजाय ‘परिवर्तन’ को चुना है। नीचे दिए गए आंकड़ों से जीत की भव्यता को समझा जा सकता है:

उम्मीदवार का नाम राजनीतिक दल प्राप्त मत परिणाम
राजकिशोर महतो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 48,270 विजयी
महेंद्र यादव नेपाली कांग्रेस (NC) 15,809 द्वितीय
रघुवीर महासेठ नेकपा (एमाले) 11,529 तृतीय
अन्य विभिन्न < 2,000
यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक: 30 अप्रैल 2026 गुरुवार शुभसंवत् 2083

कौन हैं राजकिशोर महतो?

राजकिशोर महतो का राजनीति में उदय किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। मूल रूप से धनुषा के बटेश्वर के रहने वाले महतो राजनीति में आने से पहले एक शिक्षक थे। उन्होंने गणित और विज्ञान के शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया और बाद में दवा व्यवसाय (Wave Pharma) से भी जुड़े।

उन्होंने 2017 में तत्कालीन संघीय समाजवादी फोरम से राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली थी। हालांकि, 2026 के चुनावों में जब उन्होंने रवि लामिछाने और बालेन शाह की लहर के साथ RSP का दामन थामा, तो उन्होंने वह कर दिखाया जो नामुमकिन माना जा रहा था।


दिग्गजों की हार के मायने

इस चुनाव में राजकिशोर महतो ने जिन दो नेताओं को हराया, उनका कद छोटा नहीं था:

  1. महेंद्र यादव (नेपाली कांग्रेस): यादव नेपाली कांग्रेस के पूर्व सह-महामंत्री और एक अनुभवी नेता हैं। मधेश की राजनीति में उनका गहरा प्रभाव रहा है।

  2. रघुवीर महासेठ (UML): महासेठ एमाले के उप-महासचिव हैं और इस क्षेत्र से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके थे। वे पूर्व उप-प्रधानमंत्री और प्रभावशाली मंत्री भी रह चुके हैं।

इन दोनों दिग्गज नेताओं की संयुक्त वोट संख्या (27,338) भी अकेले राजकिशोर महतो के वोटों (48,270) के आधे के करीब ही पहुँच पाई। यह दर्शाता है कि जनता पुराने चेहरों और पारंपरिक राजनीति से ऊब चुकी थी।


जीत के पीछे के प्रमुख कारण

  1. परिवर्तन की चाह: धनुषा-4 के मतदाता लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे थे। पुराने नेताओं के वादे कागजों तक सीमित रहे, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश था।

  2. RSP और बालेन फैक्टर: नेपाल में ‘बालेन शाह’ और ‘रवि लामिछाने’ के प्रति दीवानगी का असर धनुषा में भी दिखा। भ्रष्टाचार के खिलाफ और सुशासन के पक्ष में महतो ने खुद को एक स्वच्छ छवि वाले विकल्प के रूप में पेश किया।

  3. शिक्षित वर्ग का समर्थन: एक पूर्व शिक्षक होने के नाते महतो को युवाओं और शिक्षित मतदाताओं का भरपूर साथ मिला।

यह भी पढें   सरकार ने संसद अधिवेशन को रोककर लाया अध्यादेश

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: राजकिशोर महतो ने कितने वोटों से चुनाव जीता ? उत्तर: राजकिशोर महतो ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी महेंद्र यादव को 32,461 वोटों के अंतर से हराया (कुल 48,270 वोट प्राप्त किए)।

प्रश्न 2: रघुवीर महासेठ कौन हैं और उनकी हार क्यों महत्वपूर्ण है ? उत्तर: रघुवीर महासेठ नेकपा (एमाले) के उप-महासचिव और पूर्व उप-प्रधानमंत्री हैं। वे इस क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत चुके थे, इसलिए उनकी हार को इस दशक का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।

प्रश्न 3: राजकिशोर महतो की राजनीतिक पार्टी कौन सी है ? उत्तर: वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व रवि लामिछाने कर रहे हैं।


निष्कर्ष और भावना (Emotion)

राजकिशोर महतो की यह जीत केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि आम आदमी की उम्मीदों की जीत है। यह जीत संदेश देती है कि लोकतंत्र में कोई भी ‘अजेय’ नहीं है। मधेश की तपती धूप में जब जनता ने ‘घंटी’ बजाई, तो बरसों पुराने सत्ता के गलियारे हिल गए। यह जीत उस हर युवा की है जो खाड़ी देशों में मजदूरी करने के बजाय अपने देश में अवसर चाहता है। राजकिशोर महतो के रूप में धनुषा ने एक ऐसा प्रतिनिधि चुना है जिसे वे अपना मानते हैं—एक शिक्षक, एक पड़ोसी, और एक सेवक।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *