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ईरान–अमेरिका जंग में भी मजबूत रही भारत की अर्थव्यवस्था

 

दिल्ली 21 जून

विश्व राजनीति में ईरान–अमेरिका तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियाँ हमेशा वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती रही हैं। विशेष रूप से तेल उत्पादक खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष विश्व बाजार में अस्थिरता पैदा करता है। भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित तेल पर निर्भर करता है, ऐसे संकटों से सीधे प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद हाल के ईरान–अमेरिका संघर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती और लचीलापन प्रदर्शित किया है।

ईरान–अमेरिका तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। युद्ध की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हुआ। भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी क्योंकि उसके ऊर्जा आयात का बड़ा भाग इसी क्षेत्र से होकर आता है। फिर भी भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखी।

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भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक प्रमुख कारण उसका विस्तृत घरेलू बाजार है। वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की आंतरिक मांग, सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण गतिविधियाँ अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहीं। सरकार द्वारा आधारभूत संरचना में निवेश, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ तथा वित्तीय अनुशासन ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान की। परिणामस्वरूप विदेशी निवेशकों का विश्वास भारतीय बाजार में बना रहा।

युद्धकालीन परिस्थितियों में सामान्यतः मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा रहता है। ईंधन की कीमतों में वृद्धि से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है। भारत ने मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों के समन्वय से इन दबावों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। यद्यपि थोक मूल्य सूचकांक पर कुछ प्रभाव दिखाई दिया, फिर भी व्यापक आर्थिक स्थिरता बनी रही और अर्थव्यवस्था किसी बड़े संकट में नहीं फँसी।

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इसके अतिरिक्त, हाल में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा तेल आपूर्ति मार्गों के पुनः सामान्य होने से भारत को अतिरिक्त राहत मिली है। तेल कीमतों में गिरावट से आयात बिल कम होने, रुपये को सहारा मिलने और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखने में सहायता मिली है।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ईरान–अमेरिका युद्ध जैसी गंभीर वैश्विक चुनौती के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी परिपक्वता और लचीलेपन का परिचय दिया है। मजबूत घरेलू मांग, विविधीकृत ऊर्जा नीति, प्रभावी आर्थिक प्रबंधन तथा बढ़ती वैश्विक साख के कारण भारत संकटों का सामना करने में पहले की तुलना में अधिक सक्षम दिखाई देता है। भविष्य में भी यदि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता, विनिर्माण विस्तार और आर्थिक सुधारों पर ध्यान देता है, तो वह वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के बीच भी विकास की गति बनाए रख सकेगा।

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