बिजली बिल पर VAT को लेकर आलोचना के बाद सरकार राहत की तैयारी में
बिजली बिल पर लगाए गए मूल्य वर्धित कर (VAT) को लेकर चौतरफा आलोचना होने के बाद नेपाल सरकार बिजली शुल्क कम करने की तैयारी में जुट गई है।
इसी उद्देश्य से गत साउन 13 को ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण के निदेशक मंडल के सदस्य अंशुकिरण शाही की संयोजकता में बिजली शुल्क पुनरावलोकन समिति का गठन किया था। समिति को 15 दिनों के भीतर सुझाव देने का समय दिया गया था, लेकिन तय समय समाप्त होने के 11 दिन बाद भी समिति अपनी रिपोर्ट मंत्रालय और प्राधिकरण को नहीं सौंप सकी है।
समिति के संयोजक अंशुकिरण शाही ने बताया कि अध्ययन कार्य पूरा नहीं होने के कारण समिति की समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन के बाद ही अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
शाही के अनुसार अब तक समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं और संबंधित निकायों के साथ लगातार चर्चा जारी है। समिति उद्योगों को भी रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि यदि वर्षा ऋतु में उद्योगों को सस्ती बिजली मिलेगी तो वे अपने उत्पाद भी कम कीमत पर उपभोक्ताओं तक पहुँचा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि सीज़नल टैरिफ लागू कर वर्षा ऋतु में बिजली की दरें कम करने पर चर्चा चल रही है। फिलहाल बिजली दरों में बड़ी बढ़ोतरी या भारी कटौती के बजाय उपभोक्ताओं को कुछ राहत देने वाला मॉडल तैयार किया जा रहा है।
समिति का कहना है कि वर्षा ऋतु में अतिरिक्त बिजली की खपत नहीं होने से नेपाल विद्युत प्राधिकरण को हर महीने अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराकर घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों में बिजली की खपत बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण और नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (FNCCI) के बीच समन्वय में कुछ तकनीकी देरी हुई थी, लेकिन अब शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। वर्तमान में इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि वर्षा ऋतु में अतिरिक्त बिजली का बेहतर उपयोग कैसे हो और पीक आवर में उद्योगों की बिजली खपत को किस तरह व्यवस्थित किया जाए।
शाही ने बताया कि समिति उद्योगों के लिए बिजली की दर 11 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 5 रुपये प्रति यूनिट तक करने की संभावना पर भी अध्ययन कर रही है। हालांकि इसके साथ यह शर्त होगी कि उद्योग सस्ती बिजली का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हुए अपने उत्पादों की कीमत भी कम करें।
बिजली शुल्क बढ़ने की आशंकाओं के बीच शाही ने स्पष्ट किया कि फिलहाल शुल्क बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि 150 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली बिल पर लगाए गए VAT को हटाने या उसमें संशोधन करने के विषय में ऊर्जा मंत्रालय और अर्थ मंत्रालय के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही है।
समिति का लक्ष्य है कि एक सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिश सरकार को सौंप दी जाए। शाही ने कहा कि समिति बिजली प्राधिकरण की संरचना में सुधार और अगले दो महीनों के भीतर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की योजना पर भी काम कर रही है।

