नेपाल बाढ़ त्रासदी: राहत और पुनर्निर्माण के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
10 भाद्र, काठमांडू।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक ने तत्काल आर्थिक और मानवीय सहायता के लिए समन्वय शुरू कर दिया है।
बाढ़ की खबर सामने आने के तुरंत बाद सुबह 10:35 बजे नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले से नेपाल के लिए विश्व बैंक के राष्ट्रीय निदेशक डेविड सिस्लेन ने संपर्क किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से आपातकालीन सहायता के रूप में 25 अरब नेपाली रुपये तक की मदद उपलब्ध कराई जा सकती है।
भारत ने तत्काल राहत सामग्री भेजने की तैयारी की
दक्षिणी पड़ोसी और मित्र राष्ट्र भारत ने नेपाल सरकार से बाढ़ प्रभावितों के लिए तत्काल आवश्यक राहत सामग्री की सूची भेजने का अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ समन्वय करते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि भारत से भेजी जा रही राहत सामग्री को आज ही काठमांडू पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
चीन भी देगा तत्काल नकद सहायता
उत्तरी पड़ोसी चीन ने भी नेपाल को तत्काल नकद सहायता देने की घोषणा की है। इसके लिए चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने वित्त मंत्री के माध्यम से नेपाल सरकार से सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
सरकार ने जताया आभार
पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय दाता संस्थाओं द्वारा व्यक्त उदार सहयोग की प्रतिबद्धता पर नेपाल सरकार ने आभार व्यक्त किया है। वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि सरकार अंतर-सरकारी समन्वय के माध्यम से सहायता की प्रक्रिया और उसके स्वरूप पर चर्चा कर रही है।
तीन पालिकाएं घोषित हुईं ‘आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र’
आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों की प्रभावित स्थानीय पालिकाओं को ‘आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र’ घोषित किया गया। इस निर्णय के बाद देश के भीतर और विदेशों से राहत एवं पुनर्निर्माण सहायता जुटाने का रास्ता औपचारिक रूप से खुल गया है।


