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अपने ही बिछाए जाल में फँस गई है, बेचारी ओली सरकार : गंगेश मिश्र

 

गंगेश मिश्र, कपिलबस्तु, 13 नोभेम्बर ।la-1

” दरक़ार जिस अधिकार की, ना छोड़ना होगा।

सरकार को सरकार के घर, घेरना होगा।

अपने ही बिछाए जाल में फँस गई है, बेचारी ओली सरकार।राष्ट्रीयता कीघुट्टी पिला कर, जनता को बरगलाने की साजिश असफल सिद्ध हुई है। कुछतथाकथित सरकारी “राष्ट्रभक्त” चाटुकारों के बल पर जनता की भावनाओं कोभड़काने की नाकाम कोशिश सरकार पर भारी पड़ रही है।ये ऐसे राष्ट्रभक्तहैं, जो पासपोर्ट लेकर घूमते हैं, एक राजदूतावास से दूसरे दूतावास तक।पासपोर्ट पर ठप्पा लगा कि फुर्र हो जाते हैं, राष्ट्रीयता के साथ।गैस नहीं है, तेल नहीं है, महगाई आसमान छू रही है।खाद्यान्न की कमी है;जनता भूखों मरने की कगार पर है। और सरकार है, कि जिसे इसकी कोई परवाहनहीं । जनता अब समझ चुकी है, काठमांडू के लोगों ने विरोध करने के लिए एकरैली का आयोजन किया है।जिसका नारा था,हिमाल, पहाड़, तराई; कोई छैन पराई। (हिमाल, पहाड़, तराई; कोई पराया नहीं)ऐसे ही कई नारों के साथ रैली निकाली गई। ऐसी ही स्थिति पर एक कहावत है,

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” भूखे भजन न होय, गोपाला।

 लैलो आपन , कंठी माला।”

सरकार अभी भी भ्रम में है, अभी भी प्रधानमन्त्री जी अपना वही पुराना रागअलाप रहे हैं।बसन्तपुर के एक  समारोह में मधेश की माँगों को नाज़ायज कहनेसे नहीं चूके। मौका मिलते ही ज़हर उगल ही देते हैं, ओली जी। एक तरफ भूकम्प और संविधान जारी होने के पश्चात, मधेश आन्दोलन की समस्या से देश को ऊपर उठाने के लिए सभी दलों से आह्वान करते हैं, तो दूसरी तरफ सवारी के लिए साइकिल का आह्वान कर देते हैं।अब बहुत हो चुका, पानी सर के ऊपर चढ़ चुका ।समय की पुकार है,  जागो नहीं तो सो नहीं पाओगे।

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मधेश आन्दोलन, अब थमने वाला नहीं है, सकारात्मक वार्ता के लिए सरकार को आगे आना चाहिए।तराई मधेश लोकतन्त्रिक पार्टी के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर ने कहा है, ” वार्ता का औचित्य समाप्त नहीं हुआ है।सरकार नयी वार्ता टोली का गठन करे, हम सकारात्मक वार्ता के लिए अभी भी तैयार हैं।”सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, ये दिगर है कि अहसास नहीं होने दे रही।

आन्दोलन का दायरा बढ़ कर सरकार की चौखट, काठमांडू तक पहुँच चुका है। अब

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सरकार के घुटने टेकने का समय आ गया।

” आन्दोलन सफल बनाना है यदि,

 सरकार के सर पर दस्तक दो।

नाकाबंदी छोड़ो, इसके;

 नाक में दम कर दो।

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