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क्या मोर्चा महतो पर कारवाई करेगी ?

 

काठमांडू, २५ माघ
संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा ने सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र महतो को कारवाही करने का निर्णय लिया है । मोर्चा ने मधेस आन्दोलन को धोखा देने का आरोप लगाते हुए उनके ऊपर कारवाइ करने का फैसला किया है | सोमबार शुवह तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर के निवास भक्तपुर में सम्पन्न मोर्चा की  बैठक में ऐसा निर्णय लिया गया है । बैठक में महतो को माफी मांगने के लिए भी कहा गया है । s modi
‘आन्दोलन खत्म करने के लिए और वीरगंज नाका खोलने के लिए महतो ने महत्वपूर्ण और शंंकास्पद भूमिका निर्वाह किया है’ मोर्चा बैठक का निष्कर्ष है । ‘महतो के कारण ही आन्दोलन कमजोर बना है’ इस तरह का निष्कर्ष निकालते हुए मोर्चा बैठक ने महतो को सुधरने के लिए भी कहा गया है । ‘महतो के कारण ही वीरगंज नाका खुला है’ मोर्चा का निष्कर्ष है । मोर्चा बैठक ने यह भी निर्णय किया है कि अगर महतो ने माफी मांगने से इन्कार किया तो मोर्चा थप कारवाइ के लिए निर्णय कर सकता है । मोर्चा का दावा है कि जारी मधेश आन्दोलन कमजोर बनाने के लिए महतो ने प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली और एमाओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के साथ शंकास्पद सम्बन्ध कायम किया है ।

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यह निर्णय तत्काल मोर्चा को राहत जरुर दे सकती है लेकिन कुछ ऐसे सवाल है जो की अनुत्तरित है |

बीरगंज घटना को सभी लोग अपने अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं। मोर्चा में आबद्ध कई बडे नेता, मोर्चा से हमदर्दी रखने वाले कई बुद्धिजीवी लोग, आन्दोलन में सदभाव दिखाने वाले लोग काफी चिंतित दिखे। उन्हें लग रहा है कि बीरगंज नाका खुलने के साथ ही आन्दोलन खत्म हो गया। आन्दोलन धराशायी हो गया। अब क्या होगा? कैसे होगा? कौन करेगा?

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अपने मन में किसी प्रकार की सोच बनाने से पहले कुछ सवालों का जबाब अवश्य ढूंढना चाहिए। जो लोग आज ऊंचे स्वर में क्रान्तिकारी भाषण झाड रहे हैं उन्हें दिल पर हाथ रख कर खुद से पूछना चाहिए

# मैंने आन्दोलन में कितनी इमानदारी दिखाई है?
# मैंने आन्दोलन में कितना समय खर्च किया है?
# मैंने पूरे आन्दोलन के दौरान मधेश में कितना समय बिताया है और काठमांडू में रहने का कितना बहाना ढूंढा हैं?
# आन्दोलन के लिए दिए गए जिम्मेवारी को कितनी इमानदारी से निभाया है?
# जिस नाकाबन्दी के लिए हायतौबा मचा रहे हैं उसमें मेरा कितना योगदान है?
# आन्दोलन खत्म करने के लिए, गलत समझौता करने के लिए मैंने कौन कौन सा प्रपंच रचा है?
# आन्दोलन में शहीद हुए कितने परिवार का हालचाल लेने पहुंचा?
# आन्दोलन में घायल हुए कितने लोगों को ढांढस बंधाया है?
# आन्दोलन छोड कर काठमांडू आने के लिए कितने तरह के बहाने बनाए हैं?
# अपने ही सहकर्मी के योगदान को नौटंकी, पब्लिसिटी स्टंट बताया है या नहीं?
# गलत समझौते के लिए दबाब बनाने हेतु कौन कौन सा हथकंडा अपनाया है?

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और यदि यह सब किया है तो फेसबुक पर क्रान्तिकारी बनने और काठमांडू में रह कर नाकाबन्दी का ढोल पीटने की कोई जरूरत नहीं। अगर बीरगंज नाका खुलने से किसी के इज्जत पर धब्बा लगा है तो जाए और नाका पर बैठे।

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