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जितेन्द्रनारायण देव की हत्या और स्थानीय पुलिस की भूमिका

 

चन्द्रनारायण देव/हिमालिनी

 अनसुलझी है आज तक जितेन्द्रनारायण की हत्या और संदेह के घेरे में है स्थानीय पुलिस की भूमिका । इस देश में सच कहा जाय तो देश और जनता

जीतेन्द्र देव
जीतेन्द्र देव

दोनों ईश्वर के सहारे ही चल रहे हैं । आए दिन लोग सुनियोजित तरीके से या तो मारे जा रहे हैं या रहस्यमय परिस्थितियों में मर रहे हैं । कानून नाम की चीज अब सिर्फ प्रावधानों में ही सिमट कर रह गई हैं । देश स्पष्ट तौर पर दो खेमों में बँटा हुआ है । मधेश जहाँ हर तरह से असंतुष्ट है, पहाड़ वहीं खामोशी के साथ सत्ता का साथ दे रहा है । मधेश में तो कानून स्पष्ट तौर पर समुदाय विशेष के लिए ही कार्यरत दिखाई दे रहा है ।
क्या आम इंसान को जीने का हक नहीं है ?
जीतेन्द्रनारायण देव, उम्र ३० साल, घर राजबिराज नगरपालिका, वार्ड नं. ६ सप्तरी जिला, जिन्हें आश्विन ३० गते शनिवार के दिन गायब कर दिया गया और बाद में उनकी क्षतविक्षत लाश मिली । जिसे देखकर स्पष्ट पता चल रहा था कि उनकी हत्या बड़ी बेरहमी के साथ की गई है । जितेन्द्रनारायण देव का मृत शरीर सप्तरी जिले के बरही बीरपुर ग्राम पंचायत स्थित कोशी नहर में वहाँ मिला और सबसे अहम बात यह कि वहाँ नजदीक ही सशस्त्र पुलिस का बेस कैंप है । लेकिन पुलिस इससे पूरी तरह अनभिज्ञ रही ।
क्या हुआ था उस दिन
वि.सं. २०७२, आश्विन ३०(अक्टुबर१७,२०१५) शनिवार के दिन शाम तकरीबन ५ बजे हर रोज की भाँति घूमने के खयाल से राजविराज स्थित अपने घर से मंदिर होते हुए मुख्यबाजार की तरफ जीतेन्द्रदेव साइकिल से निकले । धीरे धीरे रात हो गई पर वो घर नहीं लौटे । जब रात के ८ बज गए तो घर वालों को चिन्ता होने लगी । उन्होंने जितेन्द्र नारायण देव से मोबाइल पर सम्पर्क करने की कोशिश की िकिन्तु मोबाइल स्वीचआफ बता रहा था । जैसे जैसे वक्त गुजर रहा था घर वालों की चिन्ता डर का रूप लेने लगी थी । किसी अव्यक्त आशंका से घरवाले घबराने लगे तो उन्होंने स्वयं मंदिर और मुख्य बाजार में खोजने की कोशिश की । जानपहचान वालों और जितेन्द्रदेव के दौस्तों से भी सम्पर्क कर के उनके विषय में पूछना शुरु किया । किन्तु उनकी कोई खबर नहीं मिली । तब घर के सदस्यों ने उसी रात जिला प्रहरी कार्यालय में जाकर मौखिक रूप से उनके गायब होने की जानकारी दी ।
दूसरे दिन भी जब जितेन्द्र देव की कोई खबर नहीं मिली तो घरवालों ने प्रहरी कार्यालय में जाकर लिखित रूप से जितेन्द्रदेव के लापता होने की रपट लिखाई । आशंकित मन के साथ घरवालों ने रविवार और सोमवार को अपनी ओर से जी जान लगा कर जितेन्द्रदेव को खोजने की कोशश की । किन्तु उन्हें नहीं मिलना था अंततः वो नहीं मिले ।
कार्तिक ३ गते(अक्टुबर२०) को मंगलवार की सुबह घरवालों पर तब वज्रपात हुआ जब उनके पास फोन आया कि नहर चौक के पास जितेन्द्रनारायण देव का मृत शरीर मिला है । घरवालों ने वहाँ जाकर जो देखा वो उनके लिए असहनीय था । जितेन्द्रदेव का पूरा शरीर खून से लथपथ था, पूरे शरीर पर गम्भीर चोट लगी हुई थी । माथे पर भी चोट के निशान थे । जाहिर सी बात थी कि उनकी किसी ने वीभत्स तरीके से हत्या कर दी थी । उसी दिन लाश को पोस्टमार्टम के लिए धरान भेज दिया गया । ४ गते उनका पोस्टमार्टम हुआ और उसी दिन उनका दाह संस्कार कर दिया गया ।
उस दिन के बाद से आज तक परिजन पुलिस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं किन्तु पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो रही है । तकरीबन पाँच महीने होने को आए किन्तु आज तक कोई सुराग पुलिस नहीं लगा पाई है । जब भी जितेन्द्रनारायण के परिवारजन उनके पास जाते हैं तो उनका एक ही जवाब होता है आप निश्चिंत रहें हम अपना काम कर रहे हैं । कोई उनसे पूछे कि वो घर कैसे निश्चिंत रह सकता है जिसका जवान बेटा बेमौत मारा गया हो । माता पिता, भाई बहन और पत्नी इन सबकी जिम्मेदारी उठाने वाला शख्स ही न रहा हो तो उस घर का क्या हो सकता है । सामान्य परिवार है जितेन्द्रनारायण का, राजविराज घर में ही उनकी अपनी दुकान है उपभोक्ता पसल । दुकान चलाने के साथ साथ यूनिक एकेडेमी में डिप्लोमा इन फार्मेसी की पढाई भी कर रहे थे और सपना था कि उपभोक्ता पसल की जगह अपनी एक फार्मेसी खोलेंगे । पर अब, सब एक सोच बन कर रह गई है । जीविकोपार्जन का कोई अन्य माध्यम नहीं । घर चलानेवाला हाथ नहीं और उस पर से जिसने जितेन्द्रनारायण को मौत दी वह आज भी आजाद है । जो चला गया वो नहीं आ सकता किन्तु परिवारवालों को अगर सबसे ज्यादा कुछ तकलीफ दे रही है तो पुलिस की अकर्मन्यता और हत्यारे का आजाद रहना । समाज और पड़ोस स्तब्ध है जितेन्द्रनारायण की मौत से क्योंकि वह एक बहुत ही सुलझे और सरल स्वभाव के इंसान थे । पर कानून को इन सब बातों से क्या मतलब इसलिए शायद उसे अन्धा कहा जाता है क्योंकि उनके पास सहृदयता नाम की चीज नहीं होती । पर उन्हें अपने फर्ज की जानकारी तो होनी ही चाहिए । माना जाता है कि अगर पुलिस चाहें तो कोई भी केस सुलझा सकती है पर सवाल वही है कि चाहे तो । कई बातें हैं जो पुलिस अनदेखा कर रही है । समय पर अगर उस पर ध्यान दिया गया होता तो हत्यारे को पकड़ना सहज होता ।

संदेह के घेरे में पुलिस की भूमिका
परिवार वालों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने जितेन्द्रनारायण की खोज में गम्भीरता नहीं दिखाई और नही कोई मदद की । आजकल किसी भी केस में सबसे पहला सबूत मोबाइल का काल डिटेल बनता है । किन्तु परिवार वालों के निवेदन पर भी जितेन्द्रनारायण का काल डिटेल न निकालना, सशस्त्र बेस कैंप के पास ही लाश का मिलना और पुलिस की अनभिज्ञता, बार–बार पुलिस से तफसीस के लिए अनुरोध करने पर भी ध्यान नहीं देना, इतना ही नहीं आम तौर पर किसी भी पोस्तमार्टम की रिपोर्ट दो से तीन दिनों के भीतर आ जाती है जबकि जितेन्द्रदेव की पोस्तमार्टम रिपोर्ट को आने में २५ दिन लग गए । यह सब पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है । हत्या के मामले में छोटी छोटी बातें भी अहम होती हैं । जितेन्द्रनारायण की लाश के साथ ना तो उनकी चप्पल थी और न ही आज तक उनकी साइकिल को पुलिस खोज पाई है जबकि यह एक महत्वपूर्ण सुराग हो सकता था । आज तक पुलिस ने किसी भी व्यक्ति से कोई पूछताछ नहीं की है । ऐन मौके पर अनुसंधान अधिकृत का तबादला भी कर दिया गया और नए अफसर को अनुसंधान के लिए नियुक्त किया जाना । ये सारी ऐसी बातें हैं जो पुलिस विभाग को ही संदेह के घेरे में ला रही है ? आखिर पुलिस की अनदेखी की क्या वजह है । छोटी छोटी बातों को भी पुलिस क्यों नजरअंदाज करती आ रही है ? क्या देश में सामान्य इंसान के लिए कोई कानून नहीं है ? या मरनेवाला एक सामान्य वर्ग का और मधेशी समुदाय का है इसलिए इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है ? देश के लिए तो हर नागरिक एक होता है, फिर क्यों प्रशासन की तरफ से निष्क्रियता दिखाई जा रही है ?
 
पीडि़त परिवार की मा“ग
जनता के जान माल की रक्षा राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, परन्तु राज्य यहाँ पूरी तरह असक्षम दिख रहा है या यूँ कहें कि कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है । परिवारवालों का आरोप है कि अगर यह घटना किसी पहाड़ी समुदाय के साथ घटी होती ता प्रशासन इतना गैरजिम्मेदार नहीं होता । परिवारवालों की माँग है कि—
  -इस हत्या की जाँच सीआइबी के द्वारा स्पेशल कमिटी गठन कर के हो ।
  -पीडि़त परिवार को क्षतिपूर्ति दी जाय ।
  -परिवार के अन्य सदस्यों की सरक्षा की गारंटी हो और हत्यारे को जल्द से जल्द कठघरे के पीछे लाया जाय ।
  -पीडि़त परिवार समाज, मानवअधिकार, देश, पुलिस सबसे अपील करती है कि उनकी मदद की जाय और जितेन्द्रनारायण के हत्यारे को पकड़ा जाय    और सजा दी जाय ।
(लेखक जितेन्द्रनारायणदेव के भाई है ।)

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