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मिथिला में फीर से तिरपेक्षण का रौनक, मध्यमा परिक्रमा आज से आरम्भ

 

विजेता चौधरी, फागुन २६,
परिक्रमाओं का शहर जनकपुर मे फिरसे तिरपेक्षण का रौनक छाया हुआ है । पन्द्रह दिन का माध्यमिकी परिक्रमा आज से प्रारम्भ हुयी हंै । परिक्रमा को लेकर जनकपुर तथा आसपास के क्षेत्र मे काफी उत्साह दिख रहा है । parikrama
पं श्यामलकिशोर झा उक्त परिक्रमा के विषय में बताते हैं– मध्यमा परिक्रमा के विषय में विष्णु पुराण अन्तर्गत के मिथिला महात्म में जिक्र किया गया है । महात्म में कुल तीन परिक्रमा के विषय में कहा गया हैं पं झा बताते हैं । उनके मुताविक– पहला वृहत मिथिला परिक्रमा दूसरा मध्यमा परिक्रमा तथा अन्तिम लघु परिक्रमा अर्थात अन्तगृह परिक्रमा जिसको जनबोली में पञ्चकोशी परिक्रमा भी कहा जाता है ।
परिक्रमा को लक्षित करते हुये पहली बार जनकपुर वृहत्तर विकास परिषद द्वारा जगह–जगह पर शौचालय, पीने का पानी, बिजली आदि की व्यवस्था की गई हैं ।
मिथिला परिक्रमा संचालन व्यवस्थापन समिति के संयोजक नवलकिशोर शरण बताते हैं–नेपाल और भारत के कुल डेढ लाख श्रद्धालु तथा साधु–महात्मा इस परिक्रमा में सहभागी हो रहे हंै । महिला–पुरुष, वृद्ध, वालक से यात्रा की शोभा दोगुनी हो गई हैं–शरण जानकारी देते हैं ।
जनकपुर अग्निकुण्ड स्थित सुन्दर सदन मन्दिर से किशोरी जी तथा कौचरी गाँव से मिथिलाविहारी के दो डोलाओं के नेतृत्व के साथ आज जनकपुर से भारत के मधुवनी जिला स्थित कल्यानेश्वर को तिरपेक्षण चली है । शरण बताते हैं– नेपाल–भारतके कुल ४० खाल्सा अर्थात टोली विशुद्ध पदयात्रा की जाने
वाली उक्त परिक्रमा कुल पन्द्रह विश्राम स्थल होते हैं, जहाँ पे सम्पूर्ण खालसा विश्राम करते हुये परिक्रमा पूर्ण करेगी ।
परिक्रमा आयोजन समिति के सदस्य बताते हैं– कञ्चनवन विश्राम स्थल में वृहत होली का आयोजन किया जाएगा । गौरतलव है, इसी दिन से मिथिला में होली त्योहार मनायी जाती है । janaki temple
एक श्रद्धालु मीरा देवी बताती हैं–सम्पूर्ण परिक्रमा का आर्कषण मिथिला महात्म के कथा वाचन होती हैं । पं श्यामलकिशोर झा प्रत्येक विश्राम स्थल पर कथा वाचन करते हुए यात्रियों के थकान को उत्साह में भर देते हैं ।

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