जीविका का जांबाज सफर: विजेता चौधरी
कभी–कभी पुरुष यात्री छेंड़खानी करने के साथ, एकदम सट के बैठना और कितने तो मोबाइल नम्बर भी मांगते हैं ।
टेम्पु में इमरजेन्सी ब्रेक नहीं होता है इसीलिये एक ही बार में ब्रैक नहीं लगता इसीलिये बगल में बैठे यात्रियों से टकराने का डर रहता हैं, वे कहती हैं ऐसी अवस्था में कई बार पुरुष यात्री गलत हरकत व बत–तमीजी करते हैं
कभी ट्राफिक का अभद्र व्यवहार, कभी किसी पुरुष यात्री का छिछोरापन झेलती हैं तो कभी भाड़ा के लिए किचकिच और अन्य बड़ी सवारी चालक का अभद्र बर्ताव…..सफर यहीं खतम नही होता, सड़क का धुँवा, धूल व अन्य बिमारियाँ भी साथ लेकर चलती हंै सुवह शाम ।
नेपाल की प्रथम महिला टेम्पु चालक व उन का अनुभव
नेपाल की प्रथम महिला टेम्पु चालक लक्ष्मी शर्मा हैं । उन्होंने सन् १९८४ मे ड्राइविगं कर ख्याति प्राप्त की थी । किन्तु वो ड्राइभिगं में पूर्णतः परिपक्व नही थीं । शर्मा अपनी इच्छा पूरा करने के लिए मात्र टेम्पु चलाती थीं क्योंक उन्होंने चालक पेशा को कभी भी व्यवसायिक रूप में नही अपनाया । उनके बाद पूरे एक दशक महिलाओं को व्यवसायिक चालक होने के लिये इन्तजार करना पड़ा ।
उनके बाद महिला पुरुष के उपर निर्भर रहती हैं जैसी नकारात्मक मान्यता का उन्मूलन करते हुए सुमित्रा दंगाल ने टेम्पु चलाना शुरु किया । झापा में पैदा हुईं दंगाल, झापा मल्टिपल क्याम्पस से कानून विषय में प्रवीणता प्रमाणपत्र तह में महिला में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली महिला भी हैं । उन्होंने कानून विषय में स्नातक तक की अध्ययन पूरा किया । उन्होंने टेम्पु चालक सम्वन्धी तालिम प्राप्त कर के डेढ़ वर्ष रोजगार के रूप में टेम्पु चालक पेशा को अपनाया । फिलहाल वे ड्राइविंग सीखनेवाली महिलाओं को तालीम प्रदान करती हैं साथ ही अपना अनुभव सुनाते हुए कहती हैंः लोग मुझे महिला हो कर भी टेम्पु चलते देख वक्र दृष्टि से आश्चर्य मान कर देखते थें और बाते बनाते थें लेकिन मैं उन लोगों की बातो को अनसुना कर अपने उददेश्य प्राप्ति में निरन्तर लगी रही ।
कलंकी ६ की ३६ वर्षीया वीणा रिजाल, सातदोबाटो १४ नं. रूट में टेम्पु चलाती हैं । १३ वर्ष से इस पेशा में संलग्न रिजाल सफा परिवहन
चालक संघ की कोषाध्यक्ष भी हैं । स्वयम् कोषाध्यक्ष हो के भी रिजाल कहती हैं बड़ी गाड़ी वाले अन्य गाड़ियों से ज्यादा टेम्पु को न जाने क्यों बहुत परेशान करते हंै । बड़ी गाड़ियों की वजह से बस स्टाप में टेम्पु रोक नही पाते और ट्रैफिक को जुर्माना देने में ही कमाई खतम हो जाती है । ट्रैफिक भी तू तड़ाक कहकर निम्न स्तर पर उतर कर बोलता है जिस से काम के दौरान मन भारी रहता है ।
छाउनी रूट की टेम्पु चालक नौबीसे की ३८ वर्षीया शोभा महत कहती हंै – शौचालय के अभाव से पानी कम पीती हूं जिस के कारण पेट में जलन व दुखने की समस्या पुरानी है । वें कहती हैं सुरक्षित तो ये लाइन है ही नही, खुद सही होना पड़ता है । इस पेशे में कई प्रकार के विचार के लोगों के साथ भेट होती है । गन्दी नजर से देखने वाले, गलत भावना से सोचने वाले बहुत होते हैं । कभी कोई पुरुष यात्री आगे की सीट पर बैठ कर सटने की कोशिश करता है, ज्यादा बात करने की कोशिश करता है । इसी तरह उनकी दूसरी शिकायत है। बड़ी गाड़ियों वाले महिला चालक से अभद्र व्यवहार करते हैं । साथ ही गलत दिशा से सड़क काट देने जैसा व्यवहार प्रद्र्रशन करते हैं । महत पीड़ित लहजे में आगे बताती हैं – ट्राफिक का व्यवहार बहुत ही बुरा व बेकार होता है । महिला ट्राफिक तो और भी छुद्र बचन बोलती है, सीधे तू कहकर बोलती है । वे थापाथली एवम् त्रिपुरेश्वर की महिला ट्राफिक कों इंगित करती हुईं कहती हैं – महिला होकर महिला को ही देख नहीं सकती, चालक भी तो ट्राफिक नीति नियम सीख कर सडक पर आते हंै, छोटीमोटी गलती हो जाने पर भी सही बोली तो बोलना चाहिए ।
काठमाण्डू के सड़क पर टेम्पु चलाती दिख रहीं बोल्ड टेम्पु चालक महिला अपनी सुरक्षा व जीविका के लिए हर रोज ऐसे ही न जाने कितनों से लड़ती हैं । कभी ट्राफिक का अभद्र व्यवहार, कभी किसी पुरुष यात्री का छिछोरापन झेलती हैं तो कभी भाड़ा के लिए किचकिच और अन्य बड़ी सवारी चालक का अभद्र बर्ताव…..सफर यहीं खतम नही होता, सड़क का धुँवा, धूल व अन्य बिमारियाँ भी साथ लेकर चलती हंै सुवह शाम ।
टेम्पु चालक पेशा में महिलाओं का आर्कषण
काभ्रे की ३० वर्षीया तुलशा शाही १० वर्षों से छाउनी रूट में टेम्पु चलाती आ रहीं हैं । शौक से इस पेशा को चुननेवाली शाही अपना खुद का टेम्पु खरीद चुकी हैं । वो टेम्प्ु चलाकर बहन को पढ़ा रहीं हैं । खुद ज्यादा न पढ़ पाने की विवशता को छिपाती हुई शाही कहती हैं– ट्राफिक और शौचालय की समस्या होते हुए भी वो काम के लिए विदेश जानेवाली महिलाओं को कहना चाहती हैं ः नेपाल में ही काम किया जा सकता है । टेम्पु व्यवसाय में अवसर है । बैक भी टेम्पु खरीदने के लिये महिलाओं को कम व्याजदर में ५ लाख तक ऋण उपलब्ध कराती है ।
३५ वर्षीया एकल महिला चालक निशा पौडेल कहती हैं ः मैं इस पेशा से बहुत खुश व संतुष्ट हूं । मेरे बेटे का भविष्य बन गया, टेम्पु चलाकर ही उसे पढ़ालिखा कर उसका जीवन सुधारने पर मुझे गर्व महसूस होता है । इसी तरह छाउनी रूट में टेम्पु चलाती आ रहीं ३२ वर्षीया विमला गौतम ४ वर्ष से टेम्पु चला रहीं हैं । वें शौक से उक्त पेशा अपनाने की बात बताते हुये कहती हैं, पहले ये काम पुरुष मात्र करते हंै व कर सकते हैं ऐसा समझा जाता था लेकिन अब तो उल्टा महिलायें ही उम्दा काम कर रहीं हैं । गौतम बताती हैं मुझे इस पेशा में आने के लिये मेरे पति ने भी भरपूर सहयोग कियां ।
छाउनी रूट में ही टेम्पु चलाने वाली ३२ वर्षीया रबीता चौधरी ५ कक्षा तक ही पढ़ी हैं । वे अपनी पेशा के प्रति गौरव करते हुए कहती हैंं, दूसरों के घरों में बर्तन धोने से अच्छा है सीप सीख कर काम करना । इस में फायदा भी होता है । 
टेम्पु चालक पेशा के प्रति महिलाओं के लगाव के विषय में इलेक्ट्रिक भेहिकल एशोसीएशन नेपाल की म्यानेजर यशोदा राई कहती हैं, हमारा ध्येय महिला स्वयम् सक्षम हों ऐसा होता हैं । उस में भी एकल महिला, साक्षर, निरक्षर के लिये स्वरोजगार निर्माण हों, वें लोग आत्मसक्षम बने यही हमलोगाें का मोटिभ है । राई बताती हैं– महिलाएँ चालक कार्यसमिति के भीतर बड़े पदों पर पहुँच चुकी हंै । उन्होंने चालकों का तलब भत्ता, ज्याला सब बराबर होने की बात बताते हुए कहा– महिलाएँ इस क्षेत्र में बहुत ही प्रगति कर रहीं हैं ।
इस सन्दर्भ में चार्जिगं स्टेशन (सल्लाघारी) प्रमुख सत्यराज राई कहते हैं ः ये पेशा महिलाआें की जीविका के लिये अच्छा है । वातावरण मैत्री सवारी होने के कारण भी ये उपयुक्त है लेकिन बिजली की समस्या के कारण उक्त व्यवसाय को सोंच के अनुरूप विकसित नहीं कर पा रहे हैं । उनके मुताबिक बैट्री भोल्टेज अन्र्तगत चार्ज कर के भेजना पड़ता है, पार्टपूर्जा की समस्या है । राई कहते हैं– संभावना बेहतर है परन्तु मुश्किलें भी हैं । वो पूरे व्यवसाय को राहत मिले इसीलिये जीसी २४० एक्सन नामक नया बैट्री भारत से मगाकर काम चलारहें हैं । उक्त बैट्री की वारन्टी लम्बी व टिकाउ है ।
क्या कहता है चालक महिला के रोजगार से जुड़ा आंकड़ा
टेम्पु चालक महिलाओं के रोजगार के संबन्ध में होमनेट नेपाल गैरसरकारी संस्था द्वारा हाल ही में ५० चालक महिलाओं के उपर किया गया एक सर्वेक्षण के आंकड़े के मुताबिक अधिकांश जवाबदाता (६६%) प्रतिशत महिला चालक, अपने पेशा से संतुष्ट हैं । इसी प्रकार टेम्पु चालक व्यवसाय में आमदनी कम होने की बात बताने बाली (४०%), ज्यादा समय काम करने की बात बतानेवाली (४०%) एवम् जोखिमपूर्ण काम (२० %) होने के कारण ३४ प्रतिशत जवाबदाता अपने पेशा से असंतुष्ट हैं । इसी प्रकार कुल जवाबदाता महिला चालक मध्य अधिकांश (६२ %) जवाबदाता अपने काम को मर्यादित समझती हैं एवम् अपने पेशा के प्रति गर्व महसूस करती हैं । इसी प्रकार सर्वेक्षण के मुताविक जवाबदाता महिला चालक दिन के ५ घण्टा से १४ घण्टा तक काम करती हैं । जिस मध्य ४६ प्रतिशत महिला दिन के १२ घण्टा एवम् ३६ प्रतिशत दिन के १४ घण्टा तक टेम्पु चलाने की बात समाने आई है ।
होम नेट नेपाल द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताविक अध्ययन में १८ वर्ष से ३५ वर्ष उपर की महिलाओं द्वारा टेम्पु चलाने की बात समाने आई है । इसी प्रकार जवावदाता महिला चालक की दैनिक रूप में होनेवाली आमदनी को देखते हुए ४४ प्रतिशत को दिन का रु ५०० से कम, ३४ प्रतिशत को दिन का ५०० से १००० तक एवम् २२ प्रतिशत जवावदाता को दिन की आमदनी २००० से अधिक रही है । दिन का २००० से अधिक आमदनी होनेवाली जवावदाता महिला खुद का निजी टेम्पु चलाती हैं । इसी के साथ अधिकांश जवावदाता ७० प्रतिशत द्वारा चलाई जानेवाली टेम्पु भाड़ा का अर्थात साहु का होता है तथा ३० प्रतिशत चालक महिला का खुद का निजी टेम्पु चलाती है । भाडेÞ का टेम्पु का दैनिक भाड़ा मालिक को २००० से ३५०० तक रकम चुकानी पड़ती है जो ट्रिप अनुसार रही है । साथ ही सर्वेक्षण से पता चला है अधिकांश जवाव दाता महिला चालक ६८ प्रतिशत द्वारा चलाइ जाने वाली टेम्पु का बीमा किया गया है तो वही पर ३२ प्रतिशत महिला चालक को खुद के टेम्पु का बीमा होने न होने के विषय मे कुछ जानकारी नही है ।
होम नेट नेपाल के संचालक ओम थपलीया ने बताया संर्वेक्षण दिखाता है अधिकाशं जवाबदाता महिला में से ७२ प्रतिशत महिला चालक हपm्ता में ६ दिन काम करती है तो २२ प्रतिशत हपm्ता में सातों दिन काम करती पाई गई, थपलीया कहते हैंं सुवह से शाम तक सड़क पर रहनेवाली महिला चालक सातों दिन काम करना, ये आंकड़ा झकझोरने बाला है । चालक महिला के स्वास्थय व आराम के प्रति चालक संघ को सोंचना चाहिये ।
सर्वोक्षण कर्ता प्रीति आचार्य बताती हंैं– सर्वेक्षण के दौरान मैने देखा चालक महिलायें निडर व सक्षम है तथा अपने पेशा के प्रति ईमानदार भी ।

महिला चालक से क्यों करता है ट्रैफिक अभद्र व्यवहार ?
टेम्पु चालक वर्ष ४० की सूर्य कुमारी कुँवर वताती हैंं ः एक बार महिला ट्रैफिक गीता सिहं थारु के साथ मारपीट ही हो गयी । उसने गलती न करने पर भी चिट काटने के साथ खाते जैसा व्यवहार व गाली दी इसी बात पर हम दोनो में मारपीट ही हो गयी । कुँवर बताती हैं कोई कोई अच्छा व्वहार भी करते हैं लेकिन कोई तो कमीशन के लिये भी मनमानी चिट काट्कर हमें रोज परेशान करने पर आमादा हैं ।
३५ वर्षिया एकल महिला चालक निशा पौडेल ट्रैफिक पुलिस के दुव्र्यवहार के विषय में बताती हैं– एक बार सई ट्रैफिक पुलिस के अभ्रद शैली से बोलने पर मैने तमीज व आदर से बोलने के लिये कहा इस बात पर वो मुझे पीटने के लिये हाथ उठाया, मेरे रोकने पर गालियाँं देने लगा फिर पीटा उसके बाद मैने भी उसे पीटा । उस घटना के बाद उसका तबादला हो गया ।
पौडेल कहती हैं ः सडक पर कभी उँच नीच होने पर मैंंने सम्भालना सीख लिया है । लेकिन ट्रैफिक महिला चालकों के साथ जानबूझ कर दुव्र्यवहार ना करें बस हम लोग इतना चाहते हैं ।
बानेश्वर लगनखेल घुम्ती में टेम्पु चलाती आ रहीं हेटौडा की ३५ वर्षीया एकल महिला सरस्वती तिमिल्सिना कहती हैं – महिलाओं को टेम्पु चलाते देख शौक से खुद भी चलाना आरम्भ किया था, अपनी कमाई पर जी रही हूँ, किसी की आस करने की जरुरत नहीं है पर ज्यादा दिन टिक पाना मुश्किल है, क्योंकि ट्रैफिक थोड़ा कुछ हुआ नही कि चिट काट देता है । ट्रैफिक पुलिस संभव होने तक नीचा दिखाने व दबाने के प्रयास में रहता है । मनमानी नियम बनाता है । सुबह उसी स्थान पर टेम्पु रोकने पर कुछ नहीं होता शाम को रोको तो चिट काट कर पैसा उसूलते हैं । सरस्वती कहती हैं– एक बार सातदोबाटो के ट्रैफिक पुलिस ने मुझे च्यूटी काटने की बात बताते हुये वे कहती हैं मैने उसे उसी वक्त ड्युटी में ही पीटा था ।
इसी तरह २४ वर्षीया वर्षा गौतम ९ कक्षा तक पढ़ी हुई हैं । सिन्धुपालचोक की रहने बाली गोैतम कहती हैं ःहम ड्राइभर भी ट्रैफिक विरुद्ध एकजुट न हो सकने की वजह से उनकी ज्यादती बढ़ती ही जा रही है ।
इस सन्दर्भ में महानगरीय ट्रैफिक प्रहरी परिसर, सातदोबाटो(ललतिपुर)के असई आमोदकान्त झा कहते हैं ः महिलाएँ भी टेम्पु अच्छे से ही चला रहीं हैं, लेकिन वों लोग लम्बे समय तक स्टापेज अर्थात बिसौनी में टेम्पु रोकना, यात्री को बीच सड़क से लेना, न रोकने को वाले स्थानो पर रोकना, ज्यादा लापरबाही बरतना जैसी कमजोरियां अधिक हैं । झा बताते हैं– ४० प्रतिशत महिला चालक मात्र ट्राफिक नियम पालन करती हैं और बाँकी लापरवाही करने की बात बताते हैं ।
होमनेट नेपाल गैसस द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक सवारी नियम का पालन करनेवाली जवाबदाता ९० प्रतिशत रही हैं तो ६ प्रतिशत न करने की बात बताई है वही पर ४ प्रतिशत ने ठीक ठाक ही नियम पालन करने की बात बताई है । नियम पालन न करने के सवाल में उनका जवाव है, आवश्यकता न समझ के तथा जल्दी होने की वजह से बताइ गई है ।
महिला चालक के साथ ट्रैफिक द्वारा होने बाले दुव्र्यवहार के विषय में झा कहते हैं गलती करने पर कारवाही तो होगी ही । प्रतिप्रश्न करते हुए झा कहते हैं– चालक के साथ हमारी आपसी क्या मतभेद हो सकता है भला ।
महिला चालक की तरफ से यात्रु व अन्य से यौन दुव्र्यवहार होने का घटना व शिकायत कितनी आती है एक प्रश्न पर ट्रैफिक असई झा कहते हैं– यात्री द्वारा दुव्र्यवहार होने का घटना कभी–कभार आता है, अन्य किसी के साथ ऐसी घटना का शिकायत अभी तक नहीं आया है । उन्होंने वैसी समस्या व ऐसी अवस्था में हम पीड़क को प्रहरी बुलाकर जिम्मा लगाने तथा सार्वजनिक स्थल में अपराध ऐन अनुसार तत्काल बात आगे बढ़ाने की बात की ।
पुरुष यात्रियों का बर्ताव
छाउनी रूट में टेम्पु चलाती आ रहीं २२ वर्षीया देवकी खड्का बताती हैं– कभी–कभी पुरुष यात्री छेंड़खानी करने के साथ, एकदम सट के बैठना और कितने तो मोबाइल नम्बर भी मांगते हैं ।
छाउनी रूट में चलने वाली ३० वर्षीया बबिता श्रेष्ठ का अनुभव हैः टेम्पु में इमरजेन्सी ब्रेक नहीं होता है इसीलिये एक ही बार में ब्रैक नहीं लगता इसीलिये बगल में बैठे यात्रियों से टकराने का डर रहता हैं, वे कहती हैं ऐसी अवस्था में कई बार पुरुष यात्री गलत हरकत व बत–तमीजी करते हैं ।
चालक महिलाओं की सब से बड़ी समस्या शौचालय की
चालक वर्षा गौतम रास्ते का शौचालय गन्दा होने के साथ–साथ, सफर में शौचालय के अभाव से पेसाब रोककर रखने की बाध्यता होने की बात बताई । उन्होंने खास शौचालय के समस्या से दिशापिसाब रोकने की वजह से अब के दस वर्ष में चालक रोग लगने से मरने की नौबत आ सकता है । इसी प्रकार वर्ष ४० की सूर्य कुमारी कुँवर को शौचालय के अभाव से पेट दुखने का समस्या है । कुँवर बताती है, सार्वजनिक शौचालय में एक बार जाने का ५ रुपैया देना पड़ता है जो मंहगा है ।
लगनखेल रुट नं. १४ में टेम्पु चलाती आ रहीं २८ वर्षिया उर्मिला कार्की रास्ते में कहीं भी शौचालय अच्छा नही हैं बताते हुए कहा सभी स्थान में शौचालय न होने के वजह से पानी कम पीती हूँ जिसके वह से पैर दुखने की समस्या शुरु हो गयी है, डाक्टर ने भी अधिक पानी पीने के लिए कहा हैं । वे कहती हैं शौचालय हर जगह न होने के कारण मासिक धर्म के समय पैड बदलने के लिये भी दिक्कत होती है । सरकार चालकों को मध्यनजर कर जगह जगह शौचालय बनबा दें तो अन्य समस्या से हम खुद ही निबट सकते हैं ।
इभान की यशोदा राई से पूछने पर उन्होंने कहा –महिला चालकों की तरफ से शौचालय वा ट्रैफिक सम्बन्धी कोई शिकायत अभी तक नही आई है कहते हुए उन्होंने बताया टेम्पु चालक सम्बन्धी सभी सुनवाई एकाई समिति करता है
टेम्पु चालक महिला को नुकसान पहुँचाते बड़ी सवारी, क्या है सच
छाउनी सीतापाइला रुट में चलानेवाली ३८ वर्षीया तुलशा शाही कहती हैंः हमलोग दिनभर एक ही सड़क पर चलते हंै फिर भी बड़ी गाड़ी वालों का अभद्र व्यवहार, गलत साइड से रास्ता काटने की बदमासी व गाडी से ही कभीकभार गन्दी गाली व छेड़छाड़ की भाषा से परेशान हैं ।
माइक्रो चालक (नाम न बताने के शर्त में) बताते हैं ः हम लोग दूसरे चालक को ठीक से बोलने को कहते हैं महिलायें वास्तव में पुरुष चालक से पीड़ित हैं । उन के मुताबिक कितने तो अनावश्यक हार्न बजा कर परेशान करते हैं तो कितने चालक छेड़खानी भी करते है । एक प्रश्न पर उन्होंने कहा महिला चालक मात्र नही ट्रैफिक से पुरुष चालक भी उतना ही हैरान है ।
रुट नं १४के पुरुष टेम्पु चालक इमान लामा बताते हैं, बड़ीे गाड़ी टेम्पु को दबोचना चाहता है खास कर महिला चालक वैठी टेम्पु को हार्न बजाकर व साइड न देकर भी परेशान करता है । परन्तु मध्य उपत्यका यातायात चालक नाम न बताने की शर्त में कहा बड़ी गाड़ी जानबुझ कर तो क्यों परेशान करेंगे, वैसा नहीं होता । सभी चालक ऐसी हरकत नही करते ।
टेम्पु चालक पेशा में महिलाओं के लिए संभावना
सफा टेम्पु में महिलाओं के लिये सम्भावना है । हम पुरुष से ज्यादा महिला को प्राथमिकता देते हैं । साथ ही उनकी शिकायत है, एनजीओ आइएनजीओ सब सफा टेम्पु दिखाकर पैसा तो लाते हैं पर हमारे चालक बीमार होने पर उन्हें एक पैसे का भी सहयोग नही करते । इभान की यशोदा राई भी टेम्पु चालक पेशा में महिलाओं के लिए भरपूर संभावना देखती हैं । वे कहती है जितना पैसा लगाकर हम विदेश जाते है उतने में हम टेम्पु के मालिक होने के साथ स्वरोजगार भी निर्माण कर सकते हैं ।
बहरहाल अवस्था यह हैं कि अब टेम्पु चालक के रूप में पुरुष को देखना हैरानी की बात होने लगी है । यात्री भी महिला चालक के टेम्प्ु में बैठना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं । प्रदूषण रहित सफा टेम्पु सुरक्षित व भरोसेमन्द सवारी साधन हैं । सफा टेम्पु हटाने की बात कभी–कभार उठने से भी महिला चालक चिन्तित हों उठती थीं पर अब नाकाबन्दी के समय सफा टेम्पु के गुण तो सरकार भी समझ गई होगी चालक संघ की कोषाध्यक्ष विना रिजाल बताती हैं । वे महिला चालकों को बेफिक्र होकर पेशा अपनाने को कहती हैं ।
टेम्पु चालक पेशा में महिलाओं का आगमन एवम् प्रगति पहले से बढ़ता दिखाई दे रहा है । निरक्षर, सामान्य लेखपढ एवम् एस.एल.सी. से स्नातक तक की महिला उक्त पेशा को व्यवसायिक रूप में अपनाए हुए हैं । साथ ही आत्मनिर्भर हों स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे रहीं हैं ।
इभान की यशोदा राई ने सफा टेम्पु वातावरण मैत्री सवारी है चालक सहित ट्रफिक पुलिस भी अंग है , इसी लिये सरकार लगायत सभी को सहयोग करने के लिए आग्रह किया । उन्होनें बैट्री मंहगा होने के कारण और गाड़ी खरीद न सकने की बात बताते हुए कहा, हाल व्यवसायियों की संख्या घट रही है लेकिन चालकाें की संख्या बरकरार होने की जानकारी दीं ।
टेम्पु चालक पेशा में महिलाओं का आगमन और प्रगति हो रहा है । निरक्षर, सामान्य पढ़ी लिखी और एस.एल.सी. से स्नातक तक की महिला उक्त पेशा को व्यवसायिक रूप में अपना कर आत्मनिर्भर होकर स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही हैं । व्व्व्

