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प्रधानमंत्री राजीनामा दें : नरायाणकाजी श्रेष्ठ

 

सामाजिक संजाल पर नारायण काजी का वक्तव्य

२१ जुलाई, मालिनी मिश्र, काठमाण्डू ।

कुछ दिनों पहले तक यह बात स्पष्ट नहीं थी कि माओवादी केंद्र के नेता नरायाणकाजी श्रेष्ठ किसका पक्ष लेंगे पर अब उनके इस फेसबुक स्टेटस (सामाजिक संजाल) को पढकर पाठक स्वयं ही स्पष्टतः फैसला कर सकते हैं कि कौन किसके पक्ष में है व विपक्ष में ।

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नारायण काजी का स्टेटस इस प्रकार है जो कि सामाजिक संजाल पर एैसे ही नही व्यक्त किया गया होगा|  माओवादी के द्वारा सरकार प्रति का समर्थन वापस लेने के बाद की स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री के पी ओली की सरकार अल्पमत में पड गयी है और सरकार को तत्काल ही राजीनामा देना चाहिए था और सरकार ने इस बात का पालन न करके राजनैतिक नैतिकता का उल्लंघन किया है । प्रधानमंत्री के विरुद्ध संसद में अविश्वास प्रस्ताव दर्ता करने के बाद व मतदान के पहले ही प्रस्ताव के पक्षधरों के द्वारा राजीनामा की मांग भी गलत है । अविश्वास प्रस्ताव को लोकतांत्रिक अभ्यास के रुप में आगे बढते देख अन्य विषयों को अनावश्यक रुप से आगे बढाना व संसद में कार्यवाही का अवरोध करना किसी के लिए भी उपयुक्त नही है । ऐसी स्थिति में तो लचीला व्यवहार दिखा कर सहमति प्रदर्शन ही अच्छा होता । अभी की स्थिति में सरकार का गठन नहीं हो सकता , इस प्रकार की बात कह कर संसार भर में मजाक का पात्र बनना कोई उचित बात नही है । हमारा देश आलोचनात्मक चेतना विहीन का राजनैतिक वकीलों का समाज बन रहा है । जो कि सत्य व प्रगति के लिए बाधक है । आज की राष्ट्रिय आवश्यकता सहमती है अभी की स्थिति में कम से कम संविधान क्रियांवयन के पहले चरण के कार्यभार के रुप में तीनों चुनाव न होने तक राष्ट्रिय सहमती ही सरकार के लिए आवश्यक है । द्वंद इसका समाधान नही है।

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