Mon. Mar 9th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

व्यस्त जीवन का स्वस्थ आधार (ध्यान–मेडीटेशन)

प्राची शाह
अत्यधिक तनाव के कारण लोग स्वाभाविक नींद को भूलते जा रहे हैं और दवाइयों के सहारे सोने का प्रयास करते हैं, लेकिन अगर ध्यान तकनीक का उपयोग किया जाए तो यह नींद के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है । नींद विश्रांति का सबसे अच्छा तरीका है जो ध्यान, मेडिटेशन के बिल्कुल करीब है । इसीलिए जो लोग अच्छी नींद लेते हैं, वे सदैव तन से भी सेहतमंद रहते हैं और मन से भी प्रफुल्लित रहते हैं । शेक्सपीयर के अनुसार नींद प्रतिदिन के जीवन के लिए मृत्यु, कठिन परिश्रम के लिए स्नान, घायल मस्तिष्क के लिए शान्तिदायिनी औषधि और क्षतिपूर्ण शरीर के लिए अमृतकुंड है ।
वस्तुतः मृत्यु के अनंतर भी हम एक लंबे विकास की स्थिति में होते हैं और जिस तरह हंसते–खेलते शिशु के रूप में हम पुनः जीवन धारण करते हैं, ठीक उसी तरह प्रतिदिन की नींद के बाद भी नवचेतना के साथ नया जीवन प्राप्त कर हम पुनः अपने कामकाज में लग जाते हैं । वाह ! यह कैसा अद्भुत खेल है प्रकृति का ? यह कैसी महान कृपा है निद्रादेवी की मनुष्य पर की जो वह हारा थका चूर–चूर होकर संसार की परेशानियों से क्लांत होकर निद्रादेवी की गोद में आकर सो जाता है और दूसरे दिन नव जागृत स्फूर्ति नवजीवन प्रसन्नता एवं उत्साह के साथ तरोताजा होकर उठता है । मजे की बात तो यह है कि इस महान उपकार के बदले हमें मां प्रकृति को कुछ भी देना नही पड़ता । किन्तु मनुष्य तो आखिर मनुष्य ही ठहरा, जो मुत में प्राप्त हुई इतनी अमूल्य सौगात, जिसकी तुलना में संसार का कोई भी पदार्थ समर्थ नहीं है, उसे भी अपने पास रख नहीं पाता ।
जी हां, हम सभी जानते हैं कि आज के संसार में एक गहरी नींद का आनंद तो जैसे दुर्लभ अवसर बन गया है, क्योंकि आज लाखों लोग स्लीप एप्निया, अनिद्रा, रेस्टलेस लेग सिंड्रोम एवं नार्काेलेप्सी जैसे विविध नींद संबंधी विकारों से ग्रस्त हैं । भारत में हुए एक ताजा सर्वेक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि बड़े महानगरों में रहनेवाले लगभग ७५ प्रतिशत से भी अधिक लोग नींद संबंधी शिकायतों को लेकर अपने डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं । क्यों ? क्योंकि अत्यधिक तनाव के कारण लोग स्वाभाविक निद्रा को भूलते जा रहे हैं और दवाइयों के सहारे सोने का प्रयास करते हैं । हमारी नींद को प्रभावित करनेवाला अन्य एक महत्वपूर्ण कारक है हमारा आहार । जी हां । यह एक चिकित्सकीय सिद्ध तथ्य है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य प्रतिकूल रूप से व्यक्ति की खाने की आदतों को प्रभावित करता है और आगे चलकर फिर वह उसकी नींद और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है । ऐसी बीमारियों में समुचित ध्यान तकनीक का यदि नियमित रूप से अयास किया जाये तो वह शरीर, स्वास्थ्य और नींद के लिए काफी मददगार सिद्ध हो सकती है ।
मनुष्य के लिए कितने घंटे की नींद पर्याप्त है । इस विषय पर वर्षाे से अनेक विचार–विमर्श और बहस होती रही हैं । शरीर विज्ञानियों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को नींद की आवश्यकता अलग–अलग होती है । कई व्यक्ति तीन–चार घंटे की नींद में ही पूर्ण विश्राम ले लेते हैं, जबकि बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो आठ–दस घंटे सोने पर भी पर्याप्त विश्राम नहीं ले पाते ।
सकारात्मक ऊर्जा के लिए
सकारात्मक ऊर्जा यदि घर में रखना हो तो वास्तु की मदद ले सकते हैं । सुबह घूमने जाना भी तनाव और नींद की समस्या को कम करता है । वास्तुशास्त्र में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिससे आप अपना तनाव और और नींद को भी काब’ में रख सकते हैं । यहां हम ऐसे ही ५ उपाय बता रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप इन परेशानियों को दूर कर सकते हैं ।
त घर में सभी एक साथ भोजन करें ऐसा करने पर आपसी सामंजस्य बनी रहती है ।
त यदि आप तनावग्रस्त रहते हों, सोते समय नींद नहीं आती हो तो रात को सोते समय शयनकक्ष में देशी घी का दीपक जलाएं ।
त शयनकक्ष में झूठे बर्तन न रखें । न ही किसी तरह का नशा करें ।
त सोने के कमरे में झाड़’ न रखें यह आपसी विश्वास को कम करता है ।
त घर के मंदिर में लाल बल्ब कभी न लगाएं । लाल रंग तीव्रता का वाहक है । लेकिन यह स्थल मन की शांति का स्थल है । यदि बल्ब जलाना है तो सफेद या पीले रंग का बल्ब जलाएं ।

यह भी पढें   नेपाल का चुनावी इतिहास : विनोदकुमार विश्वकर्मा

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

1 thought on “व्यस्त जीवन का स्वस्थ आधार (ध्यान–मेडीटेशन)

  1. मै आप के इस लेख से सन्तुष्ट हु ! आज के व्यस्त समाज के स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा प्रयास किया है ! धन्यवाद !!!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *