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भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तीन महीने में दूसरी मुलाकात जिनपिंग से

 
हांगझाउ.
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नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात की। उम्मीद की जा रही है कि पीएम ने पीओके से गुजरने वाले चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) का मुद्दा उठाया। इसके अलावा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप्स (एनएसजी) में भारत की मेंबरशिप और टेररिज्म के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच तीन महीने में यह दूसरी मुलाकात है। बता दें कि मोदी जी-20 समिट में हिस्सा लेने यहां पहुंचे। 5 सितंबर को मोदी बराक ओबामा से भी मिलेंगे।
  न्यूज एजेंसीज के मुताबिक, दोनोंं नेताओं के बीच बाइलेटरल टॉक में कई मुद्दों पर बातचीत हुई है।
– तीन महीनों से भी कम वक्त में मोदी और शिनपिंग के बीच यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच जून में ताशकंद में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) की मीटिंग के दौरान मुलाकात हुई थी। अब अगली मुलाकात गोवा में BRICS समिट के दौरान होगी।
मोदी ने कहा“भारत किर्गिस्तान में चीन एम्बेसी पर हुए आतंकी हमले की भारत निंदा करता है।”
– चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर पर भारत की चिंता। 46 अरब डॉलर का ये कॉरिडोर पीओके में गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरने वाला है।
– NSG मेंबरशिप चीन की वजह से भारत को नहीं मिल पाई। इस पर भी नए सिरे से बातचीत हुई।
– मोदी जैश-ए-मोहम्मद को यूएन से टेरर आउटफिट डिक्लेयर कराना चाहते हैं। चीन ने पिछली बार इसमें रोड़ा अटकाया था।
– ट्रेड बैलेंस भी चर्चा का हिस्सा रहा। जी-20 में भारत टेरर फाइनेंसिंग और टैक्स चोरी रोकने समेत कई मुद्दे उठे।
BRICS देशों के नेता भी मिले
– ब्रिक्स देशों के नेताओं ने साथ में एक फोटो भी ली। इस मौके पर पीएम ने कहा-“मैं आप सभी का गोवा में होने वाले BRICS समिट के लिए स्वागत करता हूं।”
क्यों अहम है मोदी का दौरा?
– तीन महीने में मोदी की जिनपिंग से दूसरी मुलाकात। लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव जारी।
– चीन को लगता है कि वियतनाम और साउथ चाइना सी पर मोदी की अप्रोच एग्रेसिव है।
चीन और भारत के बीच कई मुद्दों पर तनाव
– मोदी वियतनाम से सीधे चीन पहुंचे हैं। साउथ चाइना सी पर भारत वियतनाम के साथ है। चीन इस मुद्दे पर भारत को वार्निंग भी दे चुका है।
– भारत ने अरुणाचल में सुखोई और ब्रम्होस तैनात कर दिए हैं। चीन को इस पर ऐतराज है।
– भारत और अमेरिका ने डिफेंस सेक्टर में अब तक सबसे बड़ी डील की है। चीन और पाकिस्तान इसको लेकर परेशान हैं।
– भारत चीन से ट्रेड बैलेंस की मांग करता रहा है। भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर चीन हमेशा चुप रहा है। उसका इंट्रेस्ट सिर्फ एक्सपोर्ट बढ़ाने पर है।
होंगझाउ में सन्नाटा
– जी-20 समिट होंगझाउ में है। दुनिया के टॉप लीडर्स की शिरकत को देखते हुए एक हफ्ते पहले ही इस टूरिज्म डेस्टिनेशन को काफी हद तक बंद कर दिया गया है।
– 90 लाख की आबादी वाले इस शहर में फिलहाल सड़कें सूनी हैं। समिट तक दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी।
– चीन एयर पॉल्यूशन के लिए बदनाम है। होंगझाउ मे एयर पॉल्यूशन न हो, इसलिए यहां की 200 मिलों को बंद कर दिया गया है।
– इसी शहर में चीन की ई-काॅमर्स कंपनी अलीबाबा का हेडक्वॉर्टर भी है।
वियतनाम में क्या हुआ?
नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चीन से पहले वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे। 15 साल बाद किसी इंडियन पीएम का वियतनाम दौरा हुआ। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी हनोई गए थे। मोदी ने वियतनाम को डिफेंस के लिए 50 करोड़ डॉलर (करीब 3300 करोड़ रु.) देने का एलान किया है। शनिवार को वियतनाम के पीएम नगुएन जुआन फुक के साथ डेलिगेशन लेवल की बातचीत के बाद मोदी बौद्ध मंदिर कुआन सू पगोडा पहुंचे। उन्होंने कहा, ”युद्ध ने आपको दुनिया से दूर किया। बुद्ध ने आपको भारत से जोड़ दिया।”
साभार, दैनिक भास्कर

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