क्या भारत और पाक तनाव के बीच नेपाल सुरक्षित है ?-डा. श्वेता दीप्ति
पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक का प्रभाव यह है कि भारतीय नेतृत्व की स्थिति और मजबूत हो गई है । मोदी सरकार ने भारत की जनता के अलावा २० से ज्यादा देशों के राजदूतों को भी सूचित कर उन्हें भरोसे में लिया । प्रमुख विपक्षी दल काँग्रेस ने तो पहले ही इस मामले में सरकार के साथ होने का ऐलान कर दिया था ।
न्युयार्क टाइम्स के अनुसार यदि भारत पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है तो १.५ करोड़ लोग तत्काल अपनी जान गँवा देंगे और अगले २० वर्षों तक इसके जानलेवा परिणाम और भी न जाने कितनी जानें लेंगी । देखा जाय तो अगर भारत पाक परमाणु युद्ध हुआ तो मानवजाति के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा ।
(भारत–पाक) में परमाणु युद्ध हुआ तो उसका असर नेपाल पर भी पड़ना स्वभाविक है और यह असर भौगोलिक, पर्यावरण और आर्थिक रुप से पड़ने वाला है । जिससे भूकम्प के मार से पीड़ित नेपाल के लिए निकलना सम्भव नहीं होगा ।
इस समय विश्व पटल पर सर्वाधिक चर्चा का विषय बना हुआ है भारत पाकिस्तान रिश्ता । अगर सोशल मीडिया के रिपोर्टस को देखें तो भारत की जनता आर पार की लड़ाई चाह रही है । वर्षों से आतंकवाद के साए में साँस लेती भारत की जनता शायद अब इस त्रासदी से बाहर निकलना चाह रही है । किन्तु यह सर्वमान्य सच है कि युद्ध से कभी किसी का भला नहीं हुआ है । फिलहाल स्थिति ऐसी बनी हुई है कि भारतीय जनता परमाणु युद्ध के लिए भी तैयार है । पर हम सब जानते हैं कि इस युद्ध की परिणति कितनी खौपनाक होगी । रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर भारत ने कोई कठोर सैनिक कार्रवाई की तो इसका अंत एक भयानक परमाणु युद्ध हो सकता है ।
युद्धोन्माद तो ठीक है किन्तु इसके परिणामों से भी सभी को वाकिफ होना होगा । नेपाल जो भारत का करीबी देश है और दोनों देशों के बीच की खुली सीमा जितनी रिश्तों को मजबूत बनाती है उतनी ही तनाव का कारण भी बनती है । सीमा में बसे लोगों को यह अहसास ही नहीं होता कि वो दो अलग देशों के नागरिक हैं लेकिन जब किसी भी कारण से सीमाओं पर हाईअलर्ट जारी होता है तो सबसे अधिक इन्हें ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है । भारत और पाक के तनावग्रस्त रिश्ते का असर सीमा पर दिखना शुरु हो चुका है । त्योहारों के इस मौसम में यह तल्खी कुछ ज्यादा ही असर दिखा रही है । खैर, ये स्थिति तो सामान्य हो जाएगी लेकिन आज सवाल इस बात का है कि अगर भारत पाक में युद्ध होता है तो क्या नेपाल इसके परिणामों से अछूता रह पाएगा ? आज परमाणु युद्ध की बात चल रही है । जगजाहिर है कि यह कितना विनाशकारी साबित हो सकता है । ऐसे में नेपाल जो भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत के भी करीब है और पाकिस्तान के भी, इस अवस्था में नेपाल कितना सुरक्षित है यह चिन्तनीय विषय है ।
भारत की नीति पहले ‘परमाणु’ हथियारों का उपयोग ना करने की है, इस अवस्था में परमाणु हथियार प्रयोग करने की सम्भावना पाकिस्तान की ओर से ही है और वह बार बार धमकी दे भी रहा है । प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पास भारत से अधिक परमाणु हथियार हैं, जिनमें ‘डर्टी बम’ अत्यधिक खतरनाक रेडियोधर्मी पदार्थ और आण्विक प्रक्षेपास्त्र होता है, वो भी शामिल है । इसके प्रयोग से तत्काल १२ करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं । भारत के हर बड़े शहरों में नेपाल के नागरिक रहते हैं इस अवस्था में उनकी स्थिति का भी सहज अनुमान लगाया जा सकता है । सामान्य तौर पर इसके प्रभाव को देखें तो जिस भी जगह आण्विक परमाणु विस्फोट होगा, उस क्षेत्र में तीक्ष्ण चमक के साथ भयानक आग का गोला उठेगा जो कई मील तक सबकुछ जलाकर भस्म कर देगा ।
यह चमक इतनी तेज होगी कि इससे लोग अन्धे हो सकते हैं, इससे उठने वाला आग का गोला वातावरण की सारी वायु खींचकर कई मील तक वातावरण को वायुशून्य कर देगा । इससे प्रघातीय तरंगें उत्पन्न होंगी जो आसपास की इमारतों और अन्य वस्तुओं के परखच्चे उड़ाकर उन्हें नष्ट कर देगी । इसके सम्पर्क में आने वाले सभी लोगों की हड्डियाँ गल जाएँगी और वे जीवित ही अन्दर से जल जाएँगे । यह परमाणु आयुध ६मेगाटन से अधिक का हुआ तो इसका परिणाम अत्यन्त विनाशकारी होगा । इतना ही नहीं इससे निकलने वाला कार्बन से बना बादल बहुत कम समय में ही अत्यन्त बड़े क्षेत्र में फैले सूर्यकिरणों को आने से रोकेगा । इस काले घने बादल से होने वाली अम्ल वर्षा से लाखों लोग मारे जाएँगे । वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बादल को छंटने में कई साल लगते हैं और इसका परिणाम अत्यन्त विपदकारी होता है । इसका भयावह परिणाम मौसमी बदलाव और वैश्विक नमी में कमी, जिससे कम वर्षा और भीषण तूफानों का निर्माण होगा । माना जा रहा है कि परमाणु विस्फोट से ओजोन परत में भारी नुकसान होगा । कार्बन से बने बादल धरती की कुल २५–४० से लेकर ७० प्रतिशत ओजोन परत को नष्ट कर देंगे जिसके पश्चात् अंतरिक्ष से आनेवाली पराबैंगनी किरणों से मानवजाति और वनस्पति के अस्तित्व पर गम्भीर परिणाम होंगे । (संदर्भः आईएनपीटी, आफ्टर इफेक्ट्स ऑफ न्यूक्लियर वॉर इन अरबन पॉपुलेशन)
न्युयार्क टाइम्स के अनुसार यदि भारत पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है तो १.५ करोड़ लोग तत्काल अपनी जान गँवा देंगे और अगले २० वर्षों तक इसके जानलेवा परिणाम और भी न जाने कितनी जानें लेंगी । देखा जाय तो अगर भारत पाक परमाणु युद्ध हुआ तो मानवजाति के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा । कहने का तात्पर्य यह है कि अगर (भारत–पाक) में परमाणु युद्ध हुआ तो उसका असर नेपाल पर भी पड़ना स्वभाविक है और यह असर भौगोलिक, पर्यावरण और आर्थिक रुप से पड़ने वाला है । जिससे भूकम्प के मार से पीड़ित नेपाल के लिए निकलना सम्भव नहीं होगा ।
अभी तो भारत ने उरी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक किया है । जिसकी उम्मीद पाकिस्तान को बिल्कुल नहीं थी । भारत दशकों से पाक प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेल रहा है । भारतीय सैनिकों द्वारा आतंकियों के खिलाफ की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान हतप्रभ है कि भारत जैसा शाँत रहने वाला देश उसके देश में ही घुसकर इतने बड़े कार्यवाही को कैसे अंजाम दे सकता है ? पैराकमांडोज हेलिकाप्टर के जरिए पीओके में उतर कर चार घंटे तक इस कार्यवाही को अंजाम देते रहे और आतंकी शिविरों को नष्ट किया । इस घटना को देखते हुए एक बात गौरतलब है कि पाक का खुफियातंत्र कहीं ना कहीं कमजोर साबित हुआ । वहीं भारतीय तंत्र ने यह दिखा दिया कि वह आधी रात में अपनी खुफिया योजनाओं को अंजाम दे सकता है । पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक का प्रभाव यह है कि भारतीय नेतृत्व की स्थिति और मजबूत हो गई है । मोदी सरकार ने भारत की जनता के अलावा २० से ज्यादा देशों के राजदूतों को भी सूचित कर उन्हें भरोसे में लिया । प्रमुख विपक्षी दल काँग्रेस ने तो पहले ही इस मामले में सरकार के साथ होने का ऐलान कर दिया था । आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार ने भारत के नजरिए को दुनिया के सामने लाने में कोई भी कसर बाकी नहीं रखी है । प्रधानमंत्री मोदी, विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव एस.जयशंकर समेत उनकी टीम ने इस कार्य को अंजाम दिया है और दुनिया को यह समझाया है कि पाकिस्तान किस तरह आतंकवाद को आश्रय देता रहा है और भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता रहा है ।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर सार्क के सदस्य देशों और रूस, यूरोप, अमेरिका व चीन तक सभी को अपने पक्ष में राजी करने लिए जबर्दस्त लॉबिंग की । इसका फायदा भी मिला। आज यह कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान विभिन्न् देशों की सद्भावनाएं गंवाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग–थलग पड़ता जा रहा है। चीन कभी कभार उसके पक्ष में खड़ा जरूर दिखता है, लेकिन भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उसने भी बीच का रास्ता अख्तियार करते हुए भारत और पाकिस्तान दोनों से संयमित रहने की अपील की है। साफ है कि चीन की निगाहें इस वक्त चीन–पाक आर्थिक गलियारे के निर्माण को जल्द से जल्द पूरा करने पर टिकी हैं, क्योंकि इससे न सिर्फ चीनी व्यापार को उछाल मिलेगा, बल्कि अरब सागरीय के क्षेत्र में उसे अपना दबदबा स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। वह कतई नहीं चाहेगा कि भारत–पाक के बीच युद्ध के हालात बनें, जिससे इस गलियारे के निर्माण में अवरोध आए। फिर यह भी गौरतलब है कि चीन–पाक आर्थिक गलियारा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से होकर भी गुजरेगा, जहां इस वक्त पाकिस्तान–विरोधी भावनाएं चरम पर हैं और लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह भी चीन की चिंता का एक बड़ा कारण है। अब तो भारत ने भी बलूच विद्रोहियों को अपना नैतिक समर्थन दे दिया है। इससे भी चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
परिस्थितियों को देखते हुए यह तो जाहिर है कि भारत भी इस बार अपने कड़े रुख के साथ सामने आ रहा है और पाकिस्तान बार–बार परमाणु युद्ध की धमकी दे रहा है । यह धमकी ही नेपाल के लिए चिन्ता का विषय है । इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान पूर्व की भाँति ही नेपाल की धरती का प्रयोग नहीं करेगा । इस वक्त नेपाल को भी अपनी सुरक्षा तंत्र को चौकस और चुस्त करना होगा और एक परिपक्वता के साथ कूटनीति का निर्वाह करना होगा । नेपाल के लिए यह समय कूटनीति के इम्तहान का है । राजनीतिज्ञों को एक सीख तो भारत की राजनीति से अवश्य लेनी चाहिए कि वहाँ की पार्टियों में चाहे कितने भी मतभेद हों देश की सुरक्षा के सवाल पर सभी एक हो जाते हैं । यही आवश्यकता फिलहाल नेपाल की राजनीति को भी है । यह कहना कि भारत नेपाल का भुटानीकरण करना चाह रहा है समयोचित् बिल्कुल नहीं है । फिलहाल आवश्यकता नेपाली जनता की सुरक्षा और सीमा पर भारत के साथ ही अपनी धरती की सुरक्षा का है, जिसपर तीक्ष्ण नजर रखने की जरुरत है । यह समय आरोप प्रत्यारोप या भारत के लिए विरोध जताने का तो बिल्कुल नहीं है क्योंकि यहाँ सवाल आतंक का है, आतंकवाद का है, नैतिकता का है और सम्पूर्ण मानवता का है, जिसकी सुरक्षा में हमें भी अपना योगदान देना ही चाहिए ।

