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“डियर भूकंप” अगली बार आना तो चुपके से आना

 

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बिम्मी शर्मा, बीरगंज, २८ ,नवम्बर |

“डियर जिंदगी” फिल्म गत शुक्रवार को रिलीज हुई और आज सुबह ही “डियर भूकंप” जीवन का महत्व बताने के लिए आ धमका बिन बुलाए मेहमान की तरह । भूकंप हमारी जिंदगी में शामिल हो चूका है एक नटखक बच्चे की तरह । कभी धीमे धीमे चूहलबाजी करता है तो हम लोग खुश हो जाते है पर जब ज्यादा बदमाशी करके हमें जब हिलाने डुलाने लगता है तब सभी कि जान पर बन आती है । हम भले भूकंप को भूल जाएं पर वह हमें नहीं भूलता इसी लिए दुलारने आ जाता है ।

डेढ साल पहले तक भूकंप नेपाल और नेपालियों के लिए एक सपना जैसा था । कभी कभी सपने में आता था और हकीकत बन कर चला जाता था । अब तो भूकंप सपना नहीं एक कड्वी सच्चाई या हकीकत है जो पिछले डेढ साल से ज्यादा समय से हम सब देख और भोग रहे हैं । दरअसल भूकंप हमें हमारी गल्तियों के लिए पछतावा करने के लिए आता है और सुधरने के लिए एक मौका दे कर चला जाता है । पर कुत्ते की दूम जिस तरह सीधी नहीं होती उसी तरह हम भी कभी नहीं सुधरते हैं ।

हमें जिदंगी में हर चीज में पूर्णता चाहिए । घर, परिवार, पैसा और बालबच्चे सभी दूसरों से बढिया और उम्दा चाहते है । घर बहु मंजिला बना कर दूसरों से खुद को बड़ा और संपन्न होने का दिखावा जो करते है । और यहीं पर डियर भूकंप एक जिद्धी बच्चे की तरह दौड़ कर आता है और हमारे नींव विहीन सपने और घरौंदे को धड़ाम से हिला कर मिट्टी में मिला देता है । हम फिर भी नहीं चेतते और उन्हीं मिट्टी, पत्थर के टुकड़ों से दुसरा घरौंदा बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं ।

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हम अपने अंदर मानवता को तो पनपने नहीं देते पर ९ महीना बच्चे को गर्भ में पाल कर खुद के सृष्टि कर्ता होने का भ्रम चारों तरफ फैलाते है और बच्चे में भी यही संस्कार का बीज डाल देते हैं । उपर बैठा जो सचमुच दुनिया का सृष्टिकर्ता है वह मिट्टी का माधो जैसा ईंसान को घमंड करते देख अपनी ही सृष्टि पर शरमा जाता है और मन ही मन सोचता कि “हाय यह मैने कैसी दुनिया रच डाली ?” इसी लिए उपर वाला डियर भूकंप नाम के इस शरारती बच्चे को धरती में डोलने के लिए छोड़ देता है । तब यह बच्चा सब को डरा कर और सब की नींद खराब कर मजे से चला जाता है ।

डियर भूकंप तो चला जाता है पर हम सभी सहम जाते है । पता नहीं फिर कब आ धमकें और कितनों को अपना ग्रास बना ले ? कभी डियर भूकंप बचपन में मेलें में बिछ्डे भाई की तरह मिलने आ जाता है तो कभी गहरे प्रेम में डूब कर उतरे भूत पूर्व प्रेमी, प्रेमिका अचानक जिस तरह रास्ते में अचानक मिल जाते है उसी तरह मिल जाता है । और कभी, कभी तलाक ले चुके पति, पत्नी जो अपनी दूसरी गृहस्थी में रमने लगे है । उन्हे पुरानी बात और रात याद दिलाने लगता है अचानक हिल कर और मिल कर । डियर भूकंप कभी कभी अपने पिछले गुनाह या पाप के सजा के रुप में आ धमकता है और सभी को अंदर तक हिला जाता है । पर हम भी भूंकप से ज्यादा जिद्धी है न अपराध करने से बाज आते हैं और न पाप करने से पछताते है । तभी तो शनिवार २५ अप्रील २०१५ का भूकंप का वह दिल दहलाने वाला मंजर सभी भूल गए हैं । डेढ साल से ज्यादा वक्त हो गया है पर अभी भी सरकार उन भूकंप पीड़ितों के लिए घर बना कर नहीं दे पाई । अभी भी वह इस ठंडी में भी त्रिपाल में या खूले आसमान के नीचे रात काट्ने को मजबुर हैं ।

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भूकंप पीड़ितों के लिए दाता राष्ट्रों से आए आर्थिक सहयोग सरकार के ही कर्मचारी बिना काम कर के ही डकार जाते हैं । और बांकी काम एनजिओ आईएनजिओ कर लेते हैं । इन के लिए भूकंप भी प्रकृति द्धारा खोला या भेजा गया एक बेशकीमती लाटरी है । जिस को कैश कर के यह वारे न्यारे हो जाते हैं । इन कमीशन खोरों के लिए हर भूकंप पीड़ित एक छोटा, बड़ा लाटरी है जो इन पीड़ितों के आंसू और तकलीफ को विदेशीं दाताओं के सामने भजा कर अपना बैंक बैंलेंस बढ़ाते जा रहे हैं ।

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यह भूकंप भले ही गरीब और बेसहारा लोगों के लिए “फियर” हो पर एनजिओ, आईएनजिओ, सरकारी कर्मचारी और कमीशन के दलालों के लिए यह भूकंप “डियर” है । जितना ज्यादा और बड़ा भूकंप का झ्टका लोगों को लगेगा उतना ही ज्यादा यह मालामाल होंगे । क्या हुआ लोग बेघर हो गए । किसी के घर का कमाने वाला मर गया या आशियाना छिन गया इन की बला से । भूकंप तो प्राकृतिक विपत्ति है जो किसी के लिए दुख तो किसी के सुख और कमाने का साधन बन कर आता है ।

तो डियर भूकंप जब अगली बार आना तो चुपके से आना और लोभी, पापी लोगों के ही घर में आना । क्योंकि उन्ही घर मे दूसरों को लूट कर छुपाए हुए खजाने है । इन्हीं लोगो के घर की धरती में सांप की तरह डोलना और इन्हे अपने किए हुए पाप कर्म की याद दिलाना । पर प्लीज उन गरीबों की झोपड़ी को बख्श देना जहां जिदंगी सिसक कर घिसट रही है । डियर भूकंप तुम तो प्राकृतिक आपदा हो तो जिसने गुनाह किया है उन्हे दंड दो । जिस ने धरती माँ के साथ छेड़खानी की है । विकास के नाम पर धरती का बुरी तरह उत्खनन कर जो विनाश कर रहे हैं उनको उनके किए की सजा दो । (व्यग्ंय)

 

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