संविधानः संशोधन नहीं, कार्यान्वयन आज की आवश्यकता –लालबाबु पण्डित
काठमांडू, ३ दिसिम्बर |हि.स.नेकपा एमाले के नेता लालबाबु पण्डित ने कहा है कि संविधान संशोधन नहीं, उसका कार्यान्वयन आज की आवश्यकता है । हिमालिनी से हुई बातचित में उन्होंने कहा– संविधान का संशोधन कब और कैसे करना है, उस सम्बन्धित प्रावधान संविधान में ही अन्तरनिहित है । समय अने पर संशोधन हो सकता है ।’ नेता पण्डित का मानना है कि संशोधन सम्बन्धी विषय को लेकर अभी जो विवाद किया जा रहा है, वह बेकार है । उन्होंने आगे कहा– ‘संविधान के अनुसार ०७४ माघ तक सरकार को तीन निर्वाचन सम्पन्न करवाना है ।
इस तरह विवाद करते रहेंगे तो वह निर्वाचन सम्भव नहीं है । इसीलिए आज की आवश्यकता संविधान संशोधन का नहीं है, कार्यान्वयन का है ।’ संशोधन प्रस्ताव पर मधेशी मोर्चा की असन्तुष्टि और जारी आन्दोलन में टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा– ‘अगर संशोधन प्रस्ताव किसी को भी स्वीकार्य नहीं है तो उसको वापस लेकर नये निर्वाचन में जाना चाहिए ।’ सीमांकन सम्बन्धी मधेशी मोर्चा का मांग विल्कुल नाजायज दावा करने वाले नेता पण्डित बताते हैं– ‘हिमाल, पहाड और तराई एक ऐसा पूर्ण शरीर है, जिसको खण्डित करेंगे तो कोई भी पार्ट सही ढंग से काम नहीं कर पाएगा ।’ अभी हाल पाँच नम्बर प्रदेश से पहाडी जिला को अलग करके सरकार ने जो संशोधन प्रस्ताव किया है, उसको ठीक नहीं मानते हैं नेता पण्डित । उनका यह भी मानना है कि अभी जो दो नम्बर का प्रदेश है, वह भी अपूर्ण है । उसको पूर्ण करना है तो कमसे कम उसमें उदयपुर, सिन्धुली और मकवानपुर जिला को जोड़ना होगा । नेता पण्डित मानते हैं कि जातीय और भाषिक पहचान ही प्रदेश को समृद्ध नहीं बना सकता, प्राकृतिक सम्पदा और भौगोलिक विविधता ही राष्ट्र को समृद्ध बना सकता है । इसीलिए वह चाहते हैं– हर प्रदेश में, हिमाल, पहाड और तराई हो और मानते हैं– विश्व जगत के लिए यह एक विशिष्ट पहचान भी है ।


