राष्ट्रीयता की आड़ में, देश जाए भाड़ में,
ज़हर बुझे खंज़र ..
गंगेश मिश्र

भ्रम की खेती,
करने वाले,
गरम मसाले,
एमाले।
अति राष्ट्रवादी,
देश की बर्बादी के लिए,
जिम्मेदार।
ये पैदा ही हुए हैं,
बस, भ्रष्टाचार के लिए।
ये होते हैं ही ऐसे,
” कोयल बोले, बोली ऐसी;
करनी होती कौवे जैसी।”
ज़हर बुझे खंज़र।
राष्ट्रीयता की आड़ में,
देश जाए भाड़ में,
बस कुर्सी मिल जाए,
यार ! मज़ा आ जाए।
यही सोच रहती है इनकी।
चार, पाँच में उलझन है ?
या उलझाया गया है,
बात कुछ,
समझ में न आया है।
बहाना मिला इन्हें;
कुछ इस कदर,
योजना बनाई गई,
कि पार्टी,
सड़क पर आ गई।

