सर्वोच्च अदालत ने संविधान संशोधन करने के विषय में सरकार से माँगा लिखित जवाब
सर्वोच्च अदालत ने संविधान के भावना विपरित प्रदेश की सिमाना हेरफेर करने, अंगीकृत नागरिकता, राष्ट्रीयसभा में प्रतिनिधित्व, भाषा आयोग के सन्दर्भ में संविधान संशोधन लाने के विषय में सरकार से लिखित जवाब मागां है ।
न्यायाधीश जगदीश शर्मा पौडेल के एकल इजलास ने आज नेपाल की संविधान के भावना विपरित संविधान संशोधन विधेयक संसद में दर्ता करने के कारण के विषय में पुस ५ गते लिखित जवाब मांग किया गया है ।
पूर्व सांसद मंच, नेपाल के तरफ से विष्णुबहादुर राउत, झलनाथ वाग्ले, शंकरनाथ शर्मा, ब्रम्मनारायण चौधरी, शारदा पोखरेल सहित सभी पाँच लोगों ने इसी मंसिर १६ गते प्रदेश के सिमाना हेरफेर, अंगीकृत नागरिकता, राष्ट्रीयसभा में प्रतिनिधित्व, भाषा आयोग के विषय में संसद में दर्ता किया गया संविधान संशोधन विधेयक नेपाल के संविधान के भावना विपरीत होने की बात करते हुए सर्वोच्च अदालत मे रिट दायर किया था ।
रित निवेदन में प्रदेश सिमाना तथा संख्या हेरफेर वा घटबढ करने का संवैधानीक अधिकार केवल निर्वाचित संघीय संसद तथा प्रदेशसभाओं को मात्र होने की बात उल्लेख किया गया था ।
आज की आदेश सरकार ने लिखित जवाब पेश करने के बाद आन्तरिम देने या न देने के बारे में भी उसी दिन विमर्श होने की बात उल्लेख है ।


