हिन्दी भाषा मात्र नहीं अपितु विश्व-बन्धुत्व एवं मानव के लिए ज्योति-स्तम्भ है : जनार्दन मण्डल
प्रो. जनार्दन मण्डल, हिन्दी, अवकाश प्राप्त, रा रा ब कैम्पस ,जनकपुर, पुस2 गते ।
हिन्दी काम-काज व रोजी-रोटी की भाषा है | हिन्दी एक भाषा मात्र नहीं है अपितु विश्व-बन्धुत्व एवं मानव मात्र के लिए ज्योति-स्तम्भ है.| हिन्दी मे अनन्त सम्भावनाओं के बीज सन्निहित हैं | . वैस्विक परिदृश्य में हिन्दी के मंचों पर विराजमान होनेवाले अनेक मनीषी -चिन्तकों के मुख से ऐसे वाक्य अक्सर सुनने को मिलते हैं कि भूमण्डलीकारण के दौर मे हिन्दी का महत्त्व सिद्ध हुवा है.| हिन्दी फिल्मों के माध्यम से हिन्दी दुनिया भर के देशों में फाइल रही है| नेपाल,सिंगापुर,मलेशिया ,थाइलेडं आदि देशों में हिन्दी बोलने-समझनेवालों की काफी संख्या है |
.नेपाल में हिन्दी प्राचीनकाल से ही लोकप्रिय भाषा रही है | तराई-मधेश में ही नहीं,बल्कि समस्त उत्रांचल तक की धार्मिक ,सांस्कृतिक परम्पराएँ हिन्दी से प्रेरित प्रभावित रही है | इसके साथ् ही नेपाल में हिन्दी जिनकी वह प्रथम या द्वितीय भाषा है,उन सब के लिए भी उतनी ही उपयोगी है | हिन्दी का अच्छा ज्ञान नेपाली के अच्छे ज्ञान मे स्वाभाविक रुप से सहयोगी होता है| इसलिए उन लोगों के लिए भी सरल पड्ती है जिन्की मातृभाषा नेपाली नहीं है | हिन्दी सीख लेने के बाद नेपाली सिखना और भी आसान हो जाता है.|
नेपाल में हिन्दी भाषा का संरक्षण व सम्बर्धन हेतु हिन्दी के पुस्तकालय बढ़ाने होंगे | हर बडे शहर और गाँवो मे साक्षरता पर बल देना होगा | हिन्दी प्रशिक्षण केंद्रों की व्यवस्था होनी चाहिए | हिन्दी साहित्य एवं हिन्दी कार्य को स्थान देना होगा | मूल बात यह है कि हिन्दी के प्रति विरोधी -मानसिकता के लोगों को अपना नजरिया बदलना होगा | इसी से हमारी आनेवाली जेनेरेशन के मन में भी हिन्दी के प्रति सम्मान और श्रद्धा जाग्रत होगी. | ‘हिन्दी की बात ‘ से ज्यादा ‘हिन्दी में बात’ पर बल देना होगा | .हिन्दी को ‘आजीविका साधक ‘ बनाना होगा. | कुल मिलाकर हिन्दी केवल भावना और समवेदना की भाषा न रहे ,उसके साथ-साथ् काम – काज की ,जीवन का मार्ग प्रशस्त करने की ,रोजी – रोटी और विकास की भाषा बने,यह आज के नेपाल के लिए आवश्यक है|


