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आंध्रप्रदेश में फिर पटरी से उतरे रेल डिब्बे, 40 की मौत

 
फाइल
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*नई दिल्ली.मधुरेश*- भारतीय रेल दुर्घटनाओं के इतिहास में 22 जनवरी को एक और बड़ा हादसा दर्ज हो गया। शनिवार की देर रात आन्ध्र प्रदेश के कुनेरू स्टेशन के पास जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखण्ड एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन सहित 7 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में अब तक 40 यात्रियों की मौत हो चुकी है और 100 से भी ज्यादा यात्री घायल हो गये जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। पिछले एक माह में यह चौथ मौका है जब ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे हैं। कानपुर रेल दुर्घटना की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पटरियों से छेड़छाड़ करने के पीछे आतंकवादियों का हाथ है और इसमें पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका है। यानि जो पाकिस्तान आतंकवादियों के माध्यम से भारत में आतंकी हमले करवाता था, उसने अब रेल दुर्घटनाएं करवाना शुरू कर दिया है। इन दुर्घटनाओं में निर्दोंष यात्रियों की तो मौत होती ही है, साथ ही रेलवे को भारी आर्थिक क्षति होता है। एक साथ जब दस-दस डिब्बे चकनाचूर हो रहे हैं तो नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। रेल दुर्घटना में सबसे गंभीर बात यह है कि हमारे ही देश के लोगों के सहयोग से वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। रेल पटरियों से छेड़छाड़ करना आसान भी होता है। भारत में रेल पटरियों का विशाल जाल बिछा हुआ है। ऐसे में आतंकी हमले के मुकाबले रेल पटरियों की प्लेटें निकालने का काम बहुत सरल है। अब देखना है कि पाकिस्तान की इस नई चुनौती से सरकार कैसे निपटती है। 21 जनवरी को ही जब राजस्थान में रानीखेत एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतरे तो रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि अब आम नागरिक पटरियों की निगरानी का काम करे और गड़बड़ी की सूचना तुरंत रेल प्रशासन को दे। सुरेश प्रभु को देश की इस सच्चाई को समझना होगा कि देश के अंदर ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जो रेल दुर्घटनाएं करवाने में सहयोग कर रहे हैं। होना तो यह चाहिए कि ऐसे देशद्रोहियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।

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