नेपाल के धार्मिक पर्यटकीय स्थलों को विकसित करना होगा : जीवनचन्द्र कोइराला
जीवनचन्द्र कोइराला, काठमांडू , ३० जनवरी | सन्दर्भः भारत के ६८वें गणतन्त्र दिवस
नेपाल भारत के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए नेपाल के धार्मिक पर्यटकीय स्थलों को विकसित करना होगा ः जीवनचन्द्र कोइराला
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है । भारत ने लोकतन्त्र का बहुत बड़ा अभ्यास कर चुका है । लोकतन्त्र के प्रति प्रतिवद्ध होकर भारतीय जनता और सरकार ने भारत के समग्र उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे भूलाया नहीं जा सकता है । भारतीयों को लोकतन्त्र और राष्ट्रीयता के प्रति जो विश्वास है, जो आस्था है, और वहाँ कि जनता के द्वारा किया गया विकास है, उनसे हमें शिक्षा लेनी चाहिए ।
जहाँ तक रही बात नेपाल की, तो मेरे ख्याल से यहाँ की मौजूदा स्थिति खासकर राजनीति अस्थिरता ही रही है । इस अस्थिरता को शीघ्रातिशीघ्र समाधान कर हम भारत के साथ अनेक मुद्दों में सहकार्य कर सकते हैं । यह आज के समय की मांग भी है ।
भारत के विकास में नेपाल भी योगदान कर सकता है । मेरे ख्याल से दोनों देशों की जनता और राष्ट्रीय स्तर से सद्भाव एवं सहकार्य के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए । भारत आज ६८वें गणतन्त्र की यात्रा में प्रवेश कर चुका है । इसी तरह हमें भी अपने गणतन्त्र को संस्थागत मजबूती देने का प्रयत्न करना चाहिए । जाहिर है कि नेपाल–भारत के बीच सिर्फ पड़ोसी का ही सम्बन्ध नहीं है, अपितु धार्मिक–सांस्कृतिक एवं सामाजिक सम्बन्ध भी है । इस सम्बन्ध को और प्रगाढ़ बनाने के लिए पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, लुम्बिनी, जनकपुर आदि पर्यटकीय स्थलों को विकसित करना होगा । और इसके लिए भारत से सहकार्य करने की आवश्यकता है । इसी प्रकार अगर हम जलविद्युत एवं खनिज पदार्थों को सही मायने में सदुपयोग करने के लिए सक्षम हुए, तो कालान्तर में हम धार्मिक सांस्कृतिक, सामाजिक एवं औद्योगिक विकास की ओर आगे बढ़ सकते हैं । इससे दोनों देश उन्नति की ओर आगे बढ़ सकता है ।
(जीवनन्द्र कोइराला महामना मालवीय मिशन, नेपाल के महासचिव हैं ।)


