तनाव और दबाव में प्रधानमंत्री
फागुन -१ , काठमान्डू , आर एन यादव
प्रधानमंत्री और सत्ता सहयात्री कांग्रेस के बीच अविश्वास बढते जा रहा है । सरकार गठन की समय कांग्रेस और माओवादी केन्द्र बीच स्थानीय चुनाव तक प्रचण्ड और उसके बाद प्रदेश तथा संघ के चुनाव कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व में कराने की सहमति हुई थी । लेकिन , पीछले दिनों में प्रधानमंत्री चुनाव को तिथि घोषणा नहीं करने पर कांग्रेस के नेताओं असन्तुष्ट हैं ।
मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पुराने संरचना अनुसार ही स्थानीय निकाय के चुनाव कराने के पक्ष में है । लेकिन , प्रधानमंत्री प्रचण्ड उसमे सहमत नहीं है । स्थानीय चुनाव चैत में सम्पन्न कराने की सहमती अनुसार प्रचण्ड प्रधानमंत्री बने , लेकिन चुनाव के तिथि में भी ढिलाइ होने के कारण कांग्रेस असन्तुष्ट दिखाई देते हैं ।
सत्ता गठबन्धन के दूसरे दल राप्रपा भी प्रधानमंत्री के साथ् ना खुश है । वे कहते है कि है हम लोंग सरकार में रहे भी तो प्रधानमंत्री ने सत्ता सहयात्री दल के जैसे व्यवहार नहीं करते है , यह मेरी गुनासा है । संविधान संशोधन विधेयक लाने के समय हम लोंगों के साथ् सल्लाह भी नहीं किया इसी कारण राप्रपा अब विपक्ष में मतदान देंगें ।
संविधान संशोधन के लिए मोर्चा ने प्रधानमंत्री के ऊपर दबाब देते आ रहे हैं । मोर्चे का कहना है कि ‘यदि संशोधन के विना ही चुनाव घोषणा हुआ तो उसी दिन से आन्दोलन में उतरने की चेतावनी दी है ‘ । संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव शनिबार सप्तरी में कहा कि विना संशोधन सरकार चुनाव की तिथि घोषणा करें तो हमलोंग भी आन्दोलन की घोषणा से आगे बढेङ्गे ।
प्रधानमंत्री और सत्ता सहयात्री कांग्रेस के बीच अविश्वास बढते जा रहा है । सरकार गठन की समय कांग्रेस और माओवादी केन्द्र बीच स्थानीय चुनाव तक प्रचण्ड और उसके बाद प्रदेश तथा संघ के चुनाव कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व में कराने की सहमति हुई थी । लेकिन , पीछले दिनों में प्रधानमंत्री चुनाव को तिथि घोषणा नहीं करने पर कांग्रेस के नेताओं असन्तुष्ट हैं ।
मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पुराने संरचना अनुसार ही स्थानीय निकाय के चुनाव कराने के पक्ष में है । लेकिन , प्रधानमंत्री प्रचण्ड उसमे सहमत नहीं है । स्थानीय चुनाव चैत में सम्पन्न कराने की सहमती अनुसार प्रचण्ड प्रधानमंत्री बने , लेकिन चुनाव के तिथि में भी ढिलाइ होने के कारण कांग्रेस असन्तुष्ट दिखाई देते हैं ।
सत्ता गठबन्धन के दूसरे दल राप्रपा भी प्रधानमंत्री के साथ् ना खुश है । वे कहते है कि है हम लोंग सरकार में रहे भी तो प्रधानमंत्री ने सत्ता सहयात्री दल के जैसे व्यवहार नहीं करते है , यह मेरी गुनासा है । संविधान संशोधन विधेयक लाने के समय हम लोंगों के साथ् सल्लाह भी नहीं किया इसी कारण राप्रपा अब विपक्ष में मतदान देंगें ।
संविधान संशोधन के लिए मोर्चा ने प्रधानमंत्री के ऊपर दबाब देते आ रहे हैं । मोर्चे का कहना है कि ‘यदि संशोधन के विना ही चुनाव घोषणा हुआ तो उसी दिन से आन्दोलन में उतरने की चेतावनी दी है ‘ । संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव शनिबार सप्तरी में कहा कि विना संशोधन सरकार चुनाव की तिथि घोषणा करें तो हमलोंग भी आन्दोलन की घोषणा से आगे बढेङ्गे ।
प्रतिपक्षी एमाले लगायत ९ दलों प्रधानमंत्री के साथ् सरकार गठन के समय से लेकर अभी तक असन्तुष्ट ही हैं । १४ मंसिर में संविधान संशोधन विधेयक दर्ता होने के बाद विपक्षी और भी चिढा हुवा है । एमाले ने तत्काल ही चुनाव के तिथि घोषणा करके चुनाव में जाने के लिए दबाब देते आ रहे हैं ।
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