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मधेश के राजनितिक ठेकेदारों का भी औकात उदागं होता है : रामेश्वर प्रसाद सिंह

 
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रामेश्वर प्रसाद सिंह(रमेश), सिरहा , १० मार्च | लोकतांत्रिक मुल्क की अदालत में वादी एवं प्रतिवादी की ओर से रहे वकिल की वहश सुनने के बाद न्यायलय की वकिल अदालत की फैसला सुनाते हैं। पर मधेश में रहे नेपाली साम्राज्य की न्यायालय में ऐसा नहीं हुआ। आखिर उपनीवेश जो ठहरा।  मिति २०७३ फाल्गुन २२ गते सप्तरी जिलें की चन्द्र कान्त राउत (जो की स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के केन्द्रीय संयोजक तथा भुत पूर्व वैज्ञानिक हैं) लगायत १० स्वराजी को सिरहा जिला अदालत में पेशी के दौरान बिना कोई बहश २० दिन फिर से अनुसंधान के नाम पर गैर-न्यायिक, गैर-लोकतांत्रिक, गैर-कानुनी एवं गैर-संवैधानिक हिरासत में रखा जा रहा है ।

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नेपाल की संविधान में भी यह उल्लेखीत हैं की अनुसंधान के क्रम में अगर कोई उपलब्धि हो तो म्याद बढ़ा सकते हैं पर अदालत में रहे हर वकिल के मुताबिक ना तो कोई अनुसंधान का रेकॉर्ड पेश किया जाता हैं ना ही कोई उपलब्धि बताई जाती है । बस गिरफ्तारियों को परेशान करने हेतु सिधा म्याद बढ़ाया जाता हैं।

एक वकील ने नाम ना खोलने की सर्त पर बताया कि आज सभी स्वराजीयों  रिहा हो जाते पर राजनैतिक पार्टियाँ एवं नेपाल प्रहरी के दवाव पर ऐसा नही हुआ। यह कैसा लोकतंत्र हुआ जहाँ न्यायालय भी स्वच्छ नहीं ?

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इससे एक बात और सावित होता हैं कि मधेश पर उपनीवेश लादने वाला नेपाल खुद भी स्वतंत्र नहीं बल्कि कुछ गलत चरित्र वाले लोगों की गुलाम हैं और जो देश गलत चरित्र लोगों की गुलाम हो उस देश  को गलत कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं।

इसे मधेश के नाम पर राजनिति करने वाले ठेकेदारों का भी औकात उदागं होता हैं। जो साम्राज्य खुद स्वतंत्र ना हो तथा भिख पर चलता हो उसे अधिकार की भिख मांगने वाले की औकात क्या रहेगा यह सभी जानते हैं।

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इसिलिए मधेश को अधिकार दिलाने हेतु सभी स्वाभिमान मधेशीयों से आन्दोलन में हिस्सा लेने हेतु अपिल भी करता हुँ। जड़ से उखाड़ फेंके हम नेपाली उपनीवेश को और पुनः उथिष्ठ एवं उत्कृष्ट बनाए मधेश को।

(नोटः यह लेख कोई राजनैतिक लेख नहीं बल्कि सत्य पर आधारित लेख हैं और कोई संगठन कि ओर से नहीं। इसिलिए इस के उपर किसी भी टिप्पणी का सफाई किसीसंगठन की ओर से आधिकारिक रुपमे पाने की अपक्षा न करें।)

रामेश्वर प्रसाद सिंह(रमेश)
रामेश्वर प्रसाद सिंह(रमेश)

 

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