Mon. Jul 6th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

तालीम की रोशनी ज्यादा से ज्यादा फैलाई जाए रेखा शाह

 

मुस्लिम महिला, कुल मिलाकर दूसरे समाज की महिलाओं से बहुत पीछे हैं । इसका कारण यह है कि नेपाली मुसलमानों का एक बहुत बड़ा वर्ग अनपढ़ है । अब भी बहुत से खानदान लड़कियों की शिक्षा को अच्छी नजर से नहीं देखते । परदे की पाबन्दी लड़कियों को कौमी जिन्दगी में हिस्सा लेने से रोेक रखती है । लेकिन नेपाल के मुस्लिम समाज में परदे को अभी भी अत्याधिक महत्व दिया जाता है । परदे की रस्म की जड़े इतनी गहरी है कि उन्हें आसानी से नहीं उखाड़ा जा सकता । सिर्फ कुछ खानदानों को छोड़कर अधिकांश पढ़े–लिखे मुसलमानों में अभी इतनी हिम्मत नहीं कि वे मुस्लिम बहुमत वाले इलाकों में रहते हुए परदे के रिवाज को अपने–अपने घर से खत्म कर सकें ।

यह भी पढें   भारत - नेपाल संबंधों में नई शुरुआत का संकेत : श्वेता दीप्ति
रेखा शाह अध्यक्ष, महिला मंच, पर्सा
रेखा शाह
अध्यक्ष, महिला मंच, पर्सा

अकसर ऐसा होता है कि पढ़े–लिखे घरानों की लड़कियां भी कॉलेज या स्कूल जाते वक्त अपने घरों से बुरका पहनकर निकलती हैं । वे या तो रास्ते या फिर कॉलेज पहुँचकर बुरका उतार देती है और वापस आते समय दूबारा पहन लेती हैं । कारण स्पष्ट है कि वे समाज से डरती है और समाज में शिक्षा की कमी के कारण यह कट्टरपन अभी तक मौजूद है । इसके विपरीत गैर मुसलिम इलाकों में रहनेवाली मुसलिम औरतों को इस किस्म की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता । इसी तरह जिन मुस्लिम इलाकों में पढ़े–लिखे लोगों की संख्या अधिक है, वहां भी मुस्लिम महिला को इस तरह की परेशानी नहीं होती । इसलिए मुस्लिम समाज को तरक्की की राह पर चलने का यही एक तरीका है कि तालीम की रोशनी ज्यादा से ज्यादा फैलाई जाए, तभी मुस्लिम महिला आगे बढ़ सकती है ।
मौजूदा सामाजिक बंधनों के बावजूद मुस्लिम महिला का भविष्य अन्धकारमय नहीं है । दूसरे समाज की महिलाओं के साथ–साथ मुस्लिम महिला कदम बढ़ाने की कोशिश कर रही है । यद्यपि ऐसी मुस्लिम महिलाओं की संख्या जिन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़ दिया है, अधिक नहीं है । फिर भी यह तादाद उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है । ऐसी औरतों की संख्या बढ़ती जा रही है । आज कुछ महिलाएं कौमी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं । अनेक महिला सभासद की सदस्य भी हैं । महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य बन चुकी हैं । सहायक मंत्री के पद पर काम कर चुकी हैं । फिलहाल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य भी हैं ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *